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'डिलीवरी के बाद बेटे को उठा नहीं पाती थी':ब्रॉन्ज मेडलिस्ट सीमा बोलीं- पहली बार थ्रो 15 मीटर भी नहीं गया; पति ने कॉमनवेल्थ की तैयारी कराई

डिलीवरी के बाद मैं अपने बेटे को भी गोद में नहीं उठा पाती थी... पहली बार दोबारा डिस्कस फेंका तो 15 मीटर भी नहीं गया। वहीं खड़ी होकर रो पड़ी थी। लगा था कि अब मेरा खेल खत्म हो चुका है। यह कहना है स्कॉटलैंड के ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में 58.65 मीटर दूर थ्रो फेंककर ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली भिवानी के दिनोद गांव की बहू और डिस्कस थ्रो खिलाड़ी सीमा कालीरमन का। शादी, मां बनने, गंभीर शारीरिक परेशानी और करियर खत्म होने जैसी परिस्थितियों के बीच सीमा ने हार नहीं मानी। पति के भरोसे ने उन्हें फिर मैदान तक पहुंचाया और मेडल जीता। अब सीमा एशियन गेम्स व ओलिंपिक का सपना देख रही है। दैनिक भास्कर से बातचीत में सीमा ने अपनी जिंदगी के संघर्ष, दर्द और डिस्कस थ्रो में वापसी की कहानी बताई। अब पढ़िए सीमा कालीरमन से हुए सवाल-जवाब… सवाल: यहां तक पहुंचने के संघर्ष को कैसे देखती हैं? सीमा: जब कोई खिलाड़ी मेडल जीतता है तो लोगों को सिर्फ उसका मेडल दिखाई देता है, लेकिन उसके पीछे की मेहनत, त्याग और संघर्ष बहुत कम लोग जानते हैं। यह सिर्फ खिलाड़ी और उसके परिवार को ही पता होता है कि यहां तक पहुंचने के लिए कितना कुछ छोड़ना पड़ता है। सवाल: डिस्कस थ्रो से जुड़ने की शुरुआत कैसे हुई? सीमा: मेरे पिता आर्मी से रिटायर्ड हैं और खुद अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। स्कूल में खाली पीरियड के दौरान हमें डिस्कस उठाने के लिए बुलाया जाता था। वहीं मैंने पहली बार थ्रो किया। स्कूल की डीपी सुनीता मैडम ने मेरी प्रतिभा पहचानी। उन्होंने मुझे जोनल, जिला और राज्य स्तर पर खिलाया। बाद में मेरा चयन स्पैट में हुआ, जहां वेदप्रकाश सर ने मेरी तकनीक पर काम कराया। फिर अंडर-14 नेशनल में रिकॉर्ड बनाया। सवाल: शादी और मां बनने के बाद खेल प्रभावित हुआ? सीमा: प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में दर्द और सूजन रहने लगी थी। हमें लगा कि यह सामान्य है, लेकिन डिलीवरी के बाद परेशानी बढ़ गई। शरीर इतना कमजोर हो गया कि मैं ठीक से चल भी नहीं पाती थी और बेटे रुद्र को गोद में भी नहीं उठा सकती थी। मेरे पति मुझे कई डॉक्टरों के पास लेकर गए। इलाज शुरू हुआ। उसी दौरान उन्होंने कहा कि हम दोबारा मैदान में लौटेंगे और जितना होगा, उतना करेंगे। सवाल: जब पति ने वापसी की बात कही तो आपका क्या जवाब था? सीमा: उस समय मेरी शारीरिक हालत बिल्कुल ठीक नहीं थी। मैं सामान्य रूप से चल भी नहीं पाती थी, इसलिए खेल में वापसी की कल्पना भी नहीं कर सकती थी। लेकिन उन्होंने लगातार मेरा हौसला बढ़ाया। सवाल: आखिर वह आपको मैदान तक कैसे लेकर गए? सीमा: उन्होंने कहा कि सिर्फ मैदान चलो, कुछ नहीं करेंगे। फिर बोले कि एक बार डिस्कस फेंककर देखो। मैंने कोशिश की, लेकिन 15 मीटर भी थ्रो नहीं कर पाई। मैं वहीं रोने लगी और कहा कि अब मुझसे नहीं होगा। तब उन्होंने समझाया कि खिलाड़ी की जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते हैं। धीरे-धीरे उन्होंने मुझे फिर तैयार किया और आज मैं इस मुकाम पर हूं। सवाल: उस समय कभी लगा था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी कर पाएंगी? सीमा: शुरुआत में ऐसा नहीं लगा था, लेकिन खुद पर भरोसा था। मेरा और मेरे पति का अनुशासन ही हमारी सबसे बड़ी ताकत रहा। प्रैक्टिस का समय कभी नहीं बदला। चाहे सुबह हो या शाम, प्रैक्टिस हर हाल में की। सबसे ज्यादा चुनौती शारीरिक थी। मानसिक रूप से मैंने कभी हार नहीं मानी। मेरा मानना है कि इंसान जो ठान ले, वह हासिल कर सकता है। सवाल: शादी के बाद ससुराल का कितना सहयोग मिला? सीमा: मेरे ससुराल वालों ने कभी किसी तरह का दबाव नहीं बनाया। परिवार और पूरे गांव ने हमेशा मेरा साथ दिया। सवाल: पति और कोच के साथ इस सफर का कोई ऐसा पल, जो आज भी याद हो? सीमा: वापसी के दौरान जिम्नास्टिक की एक्सरसाइज करते समय मेरे हाथ छिल गए थे। उस समय पति ने मेरी फोटो खींच ली और कहा कि एक दिन जब तुम स्टेज पर मेडल लेकर खड़ी होगी, तब यह फोटो दिखाऊंगा। आज भी वह फोटो मेरे पास है। अब उसे देखकर हंसी आती है कि तब मैं कैसी थी और आज कहां पहुंच गई हूं। सवाल: इस मेडल के पीछे सबसे बड़ा त्याग किसका मानती हैं? सीमा: मेरे पति का। उन्होंने हर संभव और कई बार असंभव लगने वाली चीज भी मेरे लिए की। हमारी कोई सरकारी नौकरी नहीं है, लेकिन उन्होंने कभी मुझे संसाधनों की कमी महसूस नहीं होने दी। उनके लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। सवाल: लोग कहते हैं कि मां बनने के बाद खिलाड़ी का करियर ढलान पर चला जाता है। आप क्या कहना चाहेंगी? सीमा: मेरे लिए तो बेटा रुद्र बहुत लकी रहा। उसके जन्म से पहले मेरा पर्सनल बेस्ट 48.08 मीटर था। उसके बाद मैंने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया। आज कॉमनवेल्थ में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। आगे एशियन गेम्स और ओलिंपिक भी खेलना चाहती हूं। इसकी पूरी योजना मेरे कोच बनाएंगे। सवाल: दूसरी बेटियों और बहुओं को क्या कहना चाहेंगी? सीमा: अगर आपके अंदर किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने की क्षमता है तो पहला कदम जरूर उठाइए। जब आप खुद आगे बढ़ेंगे तो रास्ते में साथ देने वाले लोग भी मिल जाएंगे। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें :- 2022 कॉमनवेल्थ के बाद गेम्स छोड़ना चाहती थीं शर्मिला धनखड़:मां ने कहा-अपने हिस्से की जमीन बेच दूंगी; पति ने फोकस के लिए दुकान छोड़ी कॉमनवेलथ गेम्स 2026 के महिला पैरा शॉट पुट F57 इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने वालीं शर्मिला धनखड़ की जिंदगी में एक समय ऐसा भी आया था, जब उन्होंने गेम्स से दूरी बनाने का फैसला कर लिया था। बस उन्होंने आखिरी बार अपनी मां से इसका जिक्र कर लिया। पढ़ें पूरी खबर…

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कनाडा के गुरुद्वारे में गोलक को लेकर झड़प, VIDEO:हिसाब-किताब की मीटिंग में 2 गुट भिड़े, प्रधान ने मेंबर को थप्पड़ मारा, बरछा उठाया

कनाडा के गुरुद्वारे में गोलक के हिसाब को लेकर 2 गुट आपस में भिड़ गए। जिस वक्त ये घटना हुई, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की मीटिंग चल रही थी। इस दौरान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान एक मेंबर की तरफ बरछा (भाला) ताने हुए नजर आए। मेहर सिंह गुट के लोगों ने आरोप लगाया कि प्रधान ने हमला करने की कोशिश की। इसके बाद दोनों गुटों में भिड़ंत हो गई। उन्होंने एक-दूसरे से धक्कामुक्की की और वहां जमकर हंगामा हो गया। इस झगड़े का CCTV फुटेज सामने आया है। जिसे 2 अगस्त को 'जट्ट वी लाइक कनाडा' नाम के इंस्टाग्राम पेज पर शेयर किया गया। इसी पेज पर प्रधान का एक कथित ऑडियो भी पोस्ट किया गया, जिसमें उन पर लड़कियों को फोन करने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, दैनिक भास्कर इस ऑडियो की पुष्टि नहीं करता। 5 पॉइंट में जानें, CCTV में क्या दिख रहा... प्रधान पर क्या आरोप हैं? गुरुद्वारे के प्रधान सुरजीत सिंह पंजाब के अमृतसर जिले के चिट्टा गांव के रहने वाले हैं। वह पिछले करीब 10 साल से गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी से जुड़े हैं। आरोप है कि गोलक का हिसाब मांगने पर उन्होंने गुस्से में हमला करने की कोशिश की। पुलिस की ओर से आधिकारिक जानकारी नहीं खबर लिखे जाने तक मॉन्ट्रियाल पुलिस की ओर से इस मामले में किसी शिकायत, केस दर्ज होने या कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। घटना का CCTV सोशल मीडिया पर वायरल है। घटना के बाद संगत में नाराजगी वीडियो सामने आने के बाद कनाडा में सिख संगत और भारतीय समुदाय में नाराजगी है। श्रद्धालुओं ने धार्मिक स्थल पर हिंसा और हथियार निकालने को गुरु घर की मर्यादा के खिलाफ बताया। संगत ने गोलक के पैसों की निष्पक्ष जांच, प्रधान को पद से हटाने और नए प्रबंधक की नियुक्ति की मांग की है। ************** ये खबर भी पढ़ें… अमेरिकी पुलिस गुरुद्वारे में जूते पहनकर घुसी, VIDEO:सिर भी नंगा; गोलक को लेकर हुआ था झगड़ा अमेरिका की पुलिस एक गुरुद्वारे में जूते पहनकर ही अंदर घुस गई। जिस जगह पुलिस वाले खड़े थे, वहीं पर श्री गुरू ग्रंथ साहिब का पवित्र स्वरूप भी रखा हुआ था। इसका वीडियो सामने आते ही पंजाब में सिख संगठनों में गुस्सा है। उन्होंने इसे मर्यादा के उलट बताया है। पुलिस यहां गोलक को लेकर हुए विवाद के बाद आई थी (पढ़ें पूरी खबर)

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WI vs PAK: अब्दुल्ला शफीक का शानदार शतक, बाबर आजम का भी चला बल्ला, दूसरे टेस्ट में पाकिस्तान की जोरदार वापसी

West Indies vs Pakistan 2nd Test Day-2 highlights: वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने जोरदार वापसी की है. दूसरे दिन के खेल की समाप्ति तक पाकिस्तान के लिए अब्दुला शफीक और बाबर आजम क्रीज पर खड़े थे. शफीक 107 रन और बाबर आजम 87 रन बनाकर खेलकर रहे हैं. वहीं, पाकिस्तान की टीम अभी पारी में 78 रन पीछे हैं. Tue, 4 Aug 2026 05:58:10 +0530

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