असम की राजनीति में इस वक्त एक बहुत बड़ा तूफान आया हुआ है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेता गौरव गोगोई और उनकी पत्नी एलिजाबेथ को लेकर कुछ ऐसे खुलासे किए हैं, जिन्होंने सबको चौंका दिया है। मामला 'पाकिस्तानी कनेक्शन' और नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला?
असम सरकार ने एक SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) बनाई थी जिसने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट के आधार पर असम कैबिनेट ने अब भारत सरकार (MHA) से मांग की है कि इस मामले की जांच NIA या CBI जैसी बड़ी केंद्रीय एजेंसियां करें।
सीएम सरमा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि असम के एक बड़े नेता का पाकिस्तान से सीधा कनेक्शन है। उनके मुख्य आरोप ये हैं कि गौरव गोगोई अपने पिता तरुण गोगोई के सीएम रहते हुए पाकिस्तान गए थे, जिसकी जानकारी न तो पुलिस को थी और न ही केंद्र सरकार को।
सरमा का दावा है कि गौरव गोगोई पाकिस्तानी दूतावास भी गए थे, जो किसी भी कांग्रेसी नेता के लिए असामान्य है। साथ ही उनकी पत्नी एलिजाबेथ ने 2011-12 में पाकिस्तान में काम किया था और उनका सीधा संपर्क 'अली तौकीर शेख' नाम के एक पाकिस्तानी एजेंट से था।
SIT की रिपोर्ट में एलिजाबेथ पर कई संगीन आरोप लगाए गए हैं, जिनमें कहा गया है कि 2013-14 में उन्होंने IB (इंटेलिजेंस ब्यूरो) की एक सीक्रेट रिपोर्ट की जानकारी पाकिस्तान को भेजी थी, ताकि वे भारत के खिलाफ अपनी रणनीति बदल सकें। साथ ही वे अक्सर अटारी बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान जाती थीं और इन यात्राओं की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी जाती थी। उन पर जॉर्ज सोरोस से जुड़े होने और विदेशी फंडिंग (FCRA) के नियमों को तोड़ने का भी आरोप है। इसके साथ साथ ऐसा भी कहा गया कि उन्होंने अपने पाकिस्तानी बैंक खाते की जानकारी छिपाई।
गौरव गोगोई का जवाब
इन आरोपों पर गौरव गोगोई ने पलटवार करते हुए इसे "इस सदी की सबसे बड़ी फ्लॉप प्रेस कॉन्फ्रेंस" बताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की बातें किसी 'C-ग्रेड फिल्म' की कहानी जैसी हैं और यह सब उनकी अपनी 'समय परिवर्तन यात्रा' से ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है। गोगोई ने सीएम और उनके परिवार पर ही जमीन कब्जाने के आरोप लगाए हैं।
असम सरकार का कहना है कि SIT की अपनी सीमाएं हैं क्योंकि इस मामले में इंटरपोल और संसद की सीक्रेट फाइलों तक पहुंच की जरूरत है। इसलिए अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है। गृह मंत्रालय (MHA) तय करेगा कि इस मामले की जांच आगे कौन सी एजेंसी करेगी।
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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान बांग्लादेश में रहने वाले हिंदुओं की सुरक्षा पर कड़ा और साफ संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वहां के हिंदुओं को अकेले पड़ने की जरूरत नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया का हिंदू समाज उनके समर्थन में खड़ा है।
बांग्लादेशी हिंदुओं को सलाह
मुंबई के नेहरू सेंटर में संघ के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक लेक्चर में भागवत जी ने कहा, 'बांग्लादेश में करीब सवा करोड़ (1.25 करोड़) हिंदू हैं। अगर वे वहीं रहकर अपने अधिकारों के लिए लड़ने का फैसला करते हैं तो दुनिया भर के सभी हिंदू उनकी मदद के लिए आगे आएंगे।'
बांग्लादेश में क्यों बिगड़े हालात?
पिछले कुछ समय से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। यह सब अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद शुरू हुआ। इस तख्तापलट के बाद बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। इस उथल-पुथल के बीच हिंसक भीड़ ने हिंदू व्यापारियों, मजदूरों और छात्रों को निशाना बनाया। कई लोगों की जान गई और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया।
इसके बाद, छात्र नेताओं की मौत और राजनीतिक अस्थिरता के बाद ये हमले संगठित रूप से हिंदुओं के खिलाफ मुड़ गए।
एकता पर जोर
भागवत जी ने जोर देकर कहा कि ऐसी मुश्किल घड़ी में एकता ही सबसे बड़ा समाधान है। उन्होंने यह संदेश दिया कि बांग्लादेश के हिंदुओं को डरकर भागने के बजाय अपनी जगह सुरक्षित करने के लिए हिम्मत जुटानी होगी और इसमें बाहरी दुनिया के हिंदू उनका साथ देंगे।
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