हवा बदलते ही पड़ जाते हैं बीमार? खुद का ऐसे रखें ध्यान, किसी भी मौसम में नहीं बिगड़ेगी सेहत
यूनानी चिकित्सा पद्धति में हवा को सिर्फ सांस लेने का साधन नहीं माना जाता, बल्कि इसे शरीर के संतुलन और अच्छे स्वास्थ्य से गहराई से जोड़ा गया है. इस पद्धति के अनुसार, मौसम और हवा के बदलते गुण हमारे शरीर पर सीधा असर डालते हैं. अगर हम मौसम के हिसाब से अपनी जीवनशैली, खानपान और दिनचर्या में सही बदलाव कर लें, तो बीमारियों से बचाव आसान हो जाता है और शरीर लंबे समय तक स्वस्थ बना रहता है.
फरवरी में करें डाइट में बदलाव, नींद में सुधार के साथ खांसी-जुकाम से भी मिलेगा छुटकारा
वसंत ऋतु में कफ दोष बढ़ता है जिससे नींद और अपच की समस्या होती है. आयुर्वेद में मूंग की दाल की खिचड़ी, बाजरा, लौकी, तोरई, परवल और जौ का सूप खाने की सलाह दी जाती है.
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