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पुलिस हिरासत में केजरीवाल की देश से अपील, ‘‘सब लोग दिल्ली चलो’’

देश की राजधानी में शनिवार को वोट चोरी के खिलाफ सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल सहित सभी बड़े नेताओं और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. इससे पहले,अरविंद केजरीवाल के घर को छावनी में तब्दील कर दिया. जिसके विरोध में कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की. अरविंद केजरीवाल ने देशवासियों का आह्वान करते हुए कहा कि सब लोग दिल्ली आएं. अगर पुलिस रोके तो उसी जगह को जंतर-मंतर बनाकर धरने पर बैठ जाएं.

देशवासी अपने-अपने घरों से निकलिए

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के अंदर चप्पे-चप्पे पर पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स हैं. किसी को अपने घर से नहीं निकलने दिया जा रहा है. सड़क पर चलते हुए लोगों को पुलिस पकड़ रही है और किसी को कहीं जाने नहीं दिया जा रहा है. अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका, सौरभ दास और गुरुग्राम से ध्रुव राठी तथा रत्ना सिंह जैसे सभी लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिससे देश के युवा बहुत गुस्से में हैं. 

अरविंद केजरीवाल ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि सभी लोग देश में जहां भी हैं, अभी अपने घर से निकलिए और दिल्ली की तरफ कूच कीजिए. दिल्ली आइए, चाहे स्कूटर पर आइए, पैदल आइए, बस में आइए, हवाई जहाज में आइए या ट्रेन में आइए. जैसे भी आ सकते हैं, आइए. जहां मोदी जी लोगों को रोकें, वहीं बैठ जाइए और उसी जगह को जंतर-मंतर बना दीजिए. पूरे देश को जंतर-मंतर बना दीजिए. लेकिन मोदी जी को वोट चोरी करने से रोकना पड़ेगा, नहीं तो यह देश और जनतंत्र नहीं बचेगा.

पूरे देश में आपातकाल लगा दिया- संजय सिंह

“आप” के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि पूरी दिल्ली बंद कर दी गई है और दिल्ली आने वाली ट्रेनें भी रोक दी गई हैं. केवल एक चोर को बचाने के लिए मोदी द्वारा आपातकाल से भी बुरी स्थिति पैदा कर दी गई है, क्योंकि उस वोट चोर ने वोट चोरी करके इनकी कई सरकारें बनवाई हैं. इसीलिए आम आदमी पार्टी सीजेपी के प्रदर्शन का समर्थन कर रही है. संजय सिंह ने कहा कि एक वोट चोर सबसे महत्वपूर्ण हो गया है. 

नागरिक अपनी आवाज भी नहीं उठा सकते

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि लोग अपना हक मांगने देश की राजधानी आए हुए हैं. ऐसे तो अंग्रेज भी नहीं करते थे, जब महात्मा गांधी अपना हक मांगने के लिए दांडी मार्च करते थे, तो अंग्रेज भी उन्हें साबरमती से दांडी तक जाने देते थे और अपनी आवाज उठाने का मौका देते थे. आज की सरकार कह रही है कि नागरिक अपनी आवाज भी नहीं उठा सकते.

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इतनी पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स लगा दी गई है, जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश या चीन ने हमला कर दिया हो. सरकार, मंत्री और इंटेलिजेंस कहते थे कि ये लोग पाकिस्तानी और बांग्लादेशी हैं. अगर ये विदेशी हैं तो इनसे इतना डर क्यों है, पाकिस्तानी तो पाकिस्तान में बैठे हैं और बांग्लादेशी बांग्लादेश में बैठे हैं. ये हमारे ही देश के युवा हैं और वामपंथी संगठनों, हमारी छात्र विंग सहित कई अन्य छात्र संगठनों ने इस प्रदर्शन को समर्थन दिया है. ये लोग सुबह से अपनी गिरफ्तारियां दे रहे हैं और हम गिरफ्तारियां देने से डरते नहीं हैं. 

एहतियातन हिरासत में लिया गया है

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हम अपने देश के संविधान और अहिंसा में विश्वास रखने वाले लोग हैं. जो भी लोग आ रहे हैं, वे पूरी तरह अहिंसक तरीकों से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने आ रहे हैं. इसलिए सरकार को उन्हें अपनी बात कहने देनी चाहिए और उनके खिलाफ हिंसा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. 45,000 पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है. हजारों लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया गया है. 

आतिशी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करने पर दिल्ली के तीन बार मुख्यमंत्री रहे अरविंद केजरीवाल को दिल्ली पुलिस ने बर्बरतापूर्वक हिरासत में ले लिया. उन्होंने सवाल किया कि मोदी जी, आप ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए कितने लोगों को सलाखों के पीछे डालेंगे?

ट्रेनें और मेट्रो बंद कर दी है

“आप” के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री गोपाल राय ने कहा कि पूरी दिल्ली के अंदर इन्होंने ब्लैक इमरजेंसी लागू कर  रखी है. लाखों की संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है, लोगों को जबरन गिरफ्तार किया जा रहा है और  छात्र-युवाओं को हिरासत में लिया जा रहा है. सरकार ने दिल्ली आने वाली ट्रेनें और मेट्रो बंद कर दी है. इसके बावजूद हजारों लोग पहुंच रहे हैं और लोकतंत्र की रक्षा तथा ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए आंदोलन कर रहे हैं. आज ये हमें गिरफ्तार कर रहे हैं, तो हम गिरफ्तारियां देंगे और जेल जाएंगे. 

दिल्ली को छावनी बना दिया गया

बुराड़ी से विधायक संजीव झा ने कहा कि पूरी दिल्ली की किलाबंदी कर दी गई है और बीएसएफ, आईटीबीपी, दिल्ली पुलिस, सीआरपीएफ और सीआईएसएफ को तैनात करके दिल्ली को छावनी बना दिया गया है. लोगों को परेशान करते हुए ट्रेनें और बसें बंद कर दी गई हैं और यह सब सिर्फ ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए किया जा रहा है. ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी करके देश से गद्दारी की है, इसलिए उनसे इस्तीफा लिया जाना चाहिए था, लेकिन सरकार उन्हें बचाने के लिए यह किलाबंदी कर रही है.

 

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दिल्ली में विपक्षी नेताओं की हिरासत का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, मेनका गुरुस्वामी ने दी चुनौती

दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने इस कार्रवाई के खिलाफ याचिका दाखिल की है. याचिका में चार पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत विपक्ष के कई नेताओं को हिरासत में लिए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है. इस मामले की सुनवाई रविवार को सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ के सामने होगी.

इस मामले पर अब सबकी नजरें अदालत की सुनवाई पर टिकी हैं. माना जा रहा है कि सुनवाई के दौरान विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेने की कार्रवाई और उससे जुड़े कानूनी सवालों पर दलीलें रखी जा सकती हैं.

प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए नेताओं का मामला 

दरअसल, दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे. प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे विपक्षी नेताओं और दूसरे लोगों को लेकर भी कार्रवाई की गई. कुछ नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिया गया. इसी कार्रवाई को लेकर अब कानूनी रास्ता अपनाया गया है.

मेनका गुरुस्वामी की ओर से दाखिल याचिका में सवाल उठाया गया है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेने की कार्रवाई को किस आधार पर सही ठहराया गया. याचिका में चार पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत दूसरे विपक्षी नेताओं की हिरासत को चुनौती दी गई है.

हालांकि, याचिका में उठाए गए सवालों पर अदालत का फैसला आना अभी बाकी है. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अपनी दलीलें रखी जाएंगी. इसके बाद अदालत मामले से जुड़े तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी.

रविवार को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई 

इस मामले को रविवार को सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ के सामने सूचीबद्ध किया गया है. ऐसे मामलों में अदालत के सामने सबसे अहम सवाल यह होता है कि संबंधित कार्रवाई कानून के दायरे में की गई या नहीं. साथ ही यह भी देखा जाता है कि किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने के पीछे क्या आधार था और अपनाई गई प्रक्रिया नियमों के मुताबिक थी या नहीं.

इस मामले में भी सुनवाई के दौरान इन पहलुओं पर चर्चा होने की संभावना है. हालांकि, अदालत में कौन-सी दलील दी जाएगी और पीठ क्या निर्देश देगी, यह सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा. याचिका दाखिल होने से यह मामला अब केवल दिल्ली में हुए प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गया है. इसमें विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेने की कार्रवाई की कानूनी जांच का सवाल भी जुड़ गया है.

प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस 

दिल्ली में किसी बड़े प्रदर्शन के दौरान पुलिस के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है. प्रशासन को भीड़ को नियंत्रित करने और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाने पड़ते हैं. दूसरी तरफ, विरोध प्रदर्शन के जरिए अपनी बात रखने का अधिकार भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है.

ऐसे में किसी प्रदर्शन के दौरान की गई पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठने पर यह देखना जरूरी होता है कि सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम कानून के मुताबिक थे या नहीं. हिरासत में लेने की कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई, यह भी जांच का विषय हो सकता है. मेनका गुरुस्वामी की याचिका इसी पूरे घटनाक्रम को लेकर दाखिल की गई है. अब अदालत के सामने इस मामले के कानूनी पहलुओं पर विचार करने का मौका होगा.

अदालत के रुख पर टिकी नजरें 

रविवार को होने वाली सुनवाई इसलिए अहम है क्योंकि इसमें विपक्षी नेताओं की हिरासत को चुनौती दी गई है. याचिका में चार पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत कई नेताओं का मामला उठाया गया है. ऐसे में सुनवाई के दौरान अदालत के सामने हिरासत से जुड़े सवाल रखे जा सकते हैं. फिलहाल इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आया है. याचिका में लगाए गए आरोपों और हिरासत को चुनौती देने वाली दलीलों पर अदालत का रुख सुनवाई के दौरान ही साफ होगा.

अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ पर हैं. अदालत इस मामले में क्या सवाल उठाती है, संबंधित पक्षों से क्या जवाब मांगती है और आगे क्या निर्देश देती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा. रविवार की सुनवाई से इस मामले की आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है.

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