पटना में बढ़ने वाले हैं CNG स्टेशन, तैयारियां तेज, इन इलाकों में चल रहा काम
Bihar News: बिहार की राजधानी पटना में सीएनजी (CNG) स्टेशनों की संख्या जल्द ही बढ़ने वाली है. जिले में सीएनजी की बढ़ती मांग को देखते हुए प्रशासन और गैस कंपनियों ने नए स्टेशनों के निर्माण की योजना तैयार की है. इस योजना के तहत पटना जिले में कुल 24 नए सीएनजी स्टेशन बनाए जाने हैं. इनमें से 12 स्टेशनों का निर्माण कार्य फिलहाल चल रहा है, जबकि 12 स्टेशनों का निर्माण अभी शुरू होना बाकी है.
बढ़ जाएंगे CNG स्टेशन
अधिकारियों के मुताबिक, जब ये सभी नए सीएनजी स्टेशन बनकर तैयार हो जाएंगे, तब पटना जिले में सीएनजी स्टेशनों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो जाएगी. इससे सीएनजी वाहन चालकों को बड़ी राहत मिलेगी और लंबी लाइनों की समस्या भी कम होगी.
पटना के इन इलाकों में तेजी चल रहा काम
निर्माण कार्य की बात करें तो पटना के आर ब्लॉक, ट्रांसपोर्ट नगर, राजेंद्र नगर और फुलवारी परिवहन परिसर समेत कई इलाकों में सीएनजी स्टेशनों का काम तेजी से चल रहा है. जानकारी के अनुसार, ट्रांसपोर्ट नगर में बनने वाला मदर सीएनजी स्टेशन इसी साल मार्च 2026 तक तैयार हो सकता है. वहीं, फुलवारी परिवहन परिसर में सीएनजी स्टेशन के लिए अभी गेल कंपनी और परिवहन विभाग के बीच समझौता होना बाकी है. एग्रीमेंट पूरा होते ही वहां भी निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा.
पेट्रोल पंपों पर भी हो रही तैयारी
इसके अलावा, पटना के 10 और पेट्रोल पंपों पर भी सीएनजी स्टेशन लगाने की तैयारी है. इसके लिए पेट्रोल पंप मालिकों को प्रस्ताव भेज दिया गया है. बताया जा रहा है कि पटना में सीएनजी वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है. फिलहाल शहर में करीब 30 हजार सीएनजी वाहन चल रहे हैं, जिनमें ऑटो, बस, कार और अन्य छोटे वाहन शामिल हैं.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञों के मुताबिक, लगभग 1200 सीएनजी वाहनों पर एक स्टेशन होना जरूरी है. ऐसे में नए स्टेशनों के बनने से आपूर्ति व्यवस्था बेहतर होगी. सीएनजी वाहनों के कई फायदे भी हैं. पेट्रोल और डीजल की तुलना में सीएनजी सस्ती पड़ती है, जिससे वाहन चालकों का खर्च कम होता है. साथ ही, सीएनजी से कार्बन मोनोऑक्साइड और धुएं का उत्सर्जन कम होता है, जिससे प्रदूषण भी घटता है. सीएनजी वाहनों के इंजन में कार्बन जमाव कम होने से इंजन ज्यादा समय तक ठीक रहता है.
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भरोसा भारत की सबसे मजबूत करेंसी बन गया है : पीएम मोदी
कुआलालंपुर, 7 फरवरी (आईएएनएस)। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर शनिवार को मलेशिया पहुंचे। मलेशिया में उनके स्वागत में लोक नृत्य की प्रस्तुति दी गई। पीएम मोदी ने प्रस्तुति देने वालों का अभिवादन स्वीकार किया और उनकी सराहना की।
पीएम मोदी ने कुआलालंपुर में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा, भारत को विकास के लिए एक भरोसेमंद पार्टनर के तौर पर देखा जाता है। चाहे वह ब्रिटेन हो, यूएई हो, ऑस्ट्रेलिया हो, न्यूजीलैंड हो, ओमान हो, ईयू हो या अमेरिका, इन देशों के भारत के साथ ट्रेड डील हैं। भरोसा भारत की सबसे मजबूत करेंसी बन गया है।
मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे। पीएम मोदी ने कहा, भारत की सफलता मलेशिया की सफलता है। यह एशिया की सफलता है। इसीलिए मैं कहता हूं कि हमारे रिश्ते का गाइडिंग शब्द आईएमपीएसीटी है। आईएमपीएसीटी का मतलब है भारत-मलेशिया पार्टनरशिप फॉर एडवांसिंग कलेक्टिव ट्रांसफॉर्मेशन।
कुआलालंपुर पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का एयरपोर्ट पर उनके मलेशियाई समकक्ष ने गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके साथ मलेशिया के ह्यूमन रिसोर्स मिनिस्टर रामनन रामकृष्णन और मलेशिया के उपविदेश मंत्री लुकानिसमान बिन अवांग सौनी भी थे। इसके बाद दोनों देशों की साझी विरासत को दिखाते हुए सांस्कृतिक तरीके से स्वागत हुआ।
इस दौरे का मकसद 2024 में बनी भारत-मलेशिया कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप को और मजबूत करना है। यह भारत-मलेशिया रिश्तों को मजबूत करने के भारत के मजबूत प्रतिबद्धता को भी दिखाता है, जो नई दिल्ली की एक्ट ईस्ट पॉलिसी, हिंद-प्रशांत के दृष्टिकोण और महासागर के दृष्टिकोण का एक अहम स्तंभ है।
अपने भाषण में पीएम मोदी ने बताया कि मलेशिया में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी भारतीय मूल की समुदाय है और यह डायस्पोरा दोनों देशों के बीच एक मजबूत पुल का काम करता रहता है।
कुआलालंपुर में कम्युनिटी प्रोग्राम के दौरान पीएम मोदी ने कहा, हाल ही में, मैंने अपने रेडियो प्रोग्राम, मन की बात, में आपके बारे में बात की थी। मैंने 1.4 बिलियन भारतीयों के साथ शेयर किया कि कैसे मलेशिया के 500 से ज्यादा स्कूल बच्चों को भारतीय भाषाओं में पढ़ाते हैं। जिस तरह से आपने सदियों से परंपराओं को संभालकर रखा है, वह कमाल का है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मलेशिया में तमिल समुदाय के सदस्य अलग-अलग क्षेत्रों में समाज की सेवा कर रहे हैं। असल में, तमिल समुदाय कई सदियों से यहां है। इस इतिहास से प्रेरित होकर, हमें मलाया यूनिवर्सिटी में तिरुवल्लुवर चेयर बनाने पर गर्व है। अब हम अपनी साझी विरासत को और मजबूत करने के लिए एक तिरुवल्लुवर सेंटर बनाएंगे।
उन्होंने कहा, आपको अपने मलय दोस्तों को भी अपने साथ लाना चाहिए, क्योंकि लोगों से लोगों का संपर्क हमारी दोस्ती की नींव है। हम आपको भारत को जानें प्रोग्राम में देखने के लिए उत्सुक हैं। आपको यह जानकर खुशी होगी कि हम जल्द ही मलेशिया में एक नया भारतीय वाणिज्य दूतावास खोलने जा रहे हैं, जो हमें और भी करीब लाएगा। कुछ महीने पहले ही, हमने एक ऐतिहासिक फैसला लिया। हमने भारतीय मूल के मलेशियाई नागरिकों के लिए ओसीआई कार्ड की एलिजिबिलिटी छठे जेनरेशन तक बढ़ा दी।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
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