सूडान में बड़ी हिंसा, RSF ने विस्थापितों को ले जा रहे वाहन पर किया हमला; 24 लोगों की मौत
सूडान के विवादित पैरामिलिट्री समूह रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) ने मध्य सूडान के उत्तर कोर्डोफान प्रांत के पास एक विनाशकारी हमले को अंजाम दिया है. यह हमला शनिवार (7 फरवरी) को उन लोगों को ले जा रहे एक वाहन पर हुआ, जो अपनी जान बचाकर हिंसा वाले इलाकों से भाग रहे थे. इस हमले में कम से कम 24 लोगों की मौत हुई है और इनमें आठ बच्चे भी शामिल हैं. डॉक्टर्स ग्रुप सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क ने इस हमले और मौतों की जानकारी दी है.
घटना के बारे में जानकारी
घटना उत्तर कोर्डोफान के रहाद शहर के दक्षिण में हुई. बताया गया है कि यह वाहन दुबेइकर इलाके से भागकर सुरक्षित स्थान की ओर जा रहा था. उस वाहन में भारी संख्या में महिलाएं, बच्चे और अन्य नागरिक सवार थे, जो लगातार जारी संघर्ष से खुद को बचा रहे थे. डॉक्टर्स नेटवर्क के बयान में कहा गया है कि बच्चों में दो शिशु भी शामिल थे, जो मारे गए. इस गंभीर हमले ने सूडान में जारी मानवीय संकट की भयावहता को फिर उजागर किया है.
#BREAKING: Sudan Doctors Network: 24 killed in #RSF attack on bus carrying displaced persons in Kordofan https://t.co/3WkNAkNCp2 pic.twitter.com/rWaG1Hx8U7
— Arab News (@arabnews) February 7, 2026
मानव अधिकार संगठनों से अपील
सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों से तत्काल कार्रवाई करने की अपील की है. उन्होंने कहा है कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए और जो भी ऐसे अपराध कर रहे हैं, विशेषकर RSF के नेतृत्व को सीधे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. अभी तक RSF की ओर से इस घटना पर कोई बयान जारी नहीं किया गया है.
#BREAKING: Sudan Doctors Network: The international community must act to hold #RSF leaders accountable https://t.co/3WkNAkNCp2 pic.twitter.com/g0nGny77O7
— Arab News (@arabnews) February 7, 2026
तीन साल से जारी युद्ध और मानवीय संकट
गौरतलब है कि सूडान में संघर्ष अप्रैल 2023 में बढ़ गया था जब राजधानी खार्तूम सहित देश के कई हिस्सों में सैनिक और RSF के बीच सत्ता के लिए मुकाबला खुली लड़ाई में बदल गया. संयुक्त राष्ट्र और सहायता समूहों की मानें तो अब तक 40,000 से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है. इस युद्ध ने सूडान में सबसे बड़ा मानवीय संकट पैदा कर दिया है. तकरीबन 1.4 करोड़ लोग विस्थापित हो चुके हैं, महामारी और अकाल जैसी स्थिति फैल चुकी है, और लोगों को हर तरफ भय, भूख और बीमारी का सामना करना पड़ रहा है.
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'जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करें, समाज को दें योगदान': युवाओं से स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की अपील
नई दिल्ली, 7 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने शनिवार को युवाओं से जिम्मेदारी से काम करने और समाज के लिए कुछ करने की अपील की।
मानव रचना एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (एमआरईआई) के 2025-26 दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि यह सिर्फ एक एकेडमिक सफर का अंत नहीं है। यह देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी के एक नए दौर की शुरुआत है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पास होने वाले छात्र खुशकिस्मत हैं कि वे अमृत काल के दूसरे चरण में अपनी प्रोफेशनल जिंदगी शुरू कर रहे हैं, जो 2047 तक चलेगा, जब भारत एक पूरी तरह से विकसित देश बनने की ख्वाहिश रखता है।
नड्डा ने कहा कि यह दौर बहुत सारे मौके और उतनी ही बड़ी जिम्मेदारियां लेकर आया है; युवाओं को देश के विकास में सही तरीके से योगदान देना चाहिए। हमेशा यह भावना रखें कि समाज ने उनकी सफलता में मदद की है और बदले में उन्हें निस्वार्थ भाव से और सही तरीके से समाज की सेवा करके वापस देना चाहिए।
उन्होंने छात्रों से मजबूत मूल्यों, नैतिक व्यवहार और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ने का भी आग्रह किया। इस दौरान उन्होंने पिछले 11 सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में हासिल की गई बदलाव लाने वाली प्रगति पर भी जोर दिया।
जेपी नड्डा ने कहा कि पहले के सिर्फ छह एम्स थे, अब 23 स्थापित किए गए हैं, जिससे पूरे देश में अत्याधुनिक हेल्थकेयर संस्थानों का एक मजबूत नेटवर्क बना है। उन्होंने आगे कहा कि भारत ने हेल्थकेयर इंडिकेटर्स में, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से लेकर संक्रामक और गैर-संक्रामक बीमारियों तक, खासकर टीबी और मलेरिया के मामलों और मौतों में उल्लेखनीय प्रगति की है।
मंत्री ने आयुष्मान भारत, आयुष्मान आरोग्य मंदिर और बड़े पैमाने पर जनसंख्या स्क्रीनिंग कार्यक्रमों जैसी पहलों के साथ, हेल्थकेयर पर जेब से होने वाले खर्च में भी काफी कमी आने पर जोर दिया, जिससे हेल्थकेयर ज्यादा सुलभ और किफायती हो गया है।
दीक्षांत समारोह के दौरान इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, कानून, शिक्षा, विज्ञान और हेल्थकेयर सहित विभिन्न विषयों के कुल 2,150 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इसमें 521 अंडरग्रेजुएट छात्र, 58 पोस्टग्रेजुएट छात्र और 11 डॉक्टरेट स्कॉलर शामिल थे, जो पास होने वाले छात्रों के समूह के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि है।
--आईएएनएस
पीएसके
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