हल्के में न ले सफेद जीभ की परेशानी, देती है शरीर की आंतरिक बीमारियों का संकेत
नई दिल्ली, 7 फरवरी (आईएएनएस)। जीभ हमारे शरीर का अभिन्न अंग है, जो सिर्फ स्वाद का पता लगाने के लिए ही नहीं बल्कि शरीर के अंदर पनप रही बीमारियों का भी संकेत देती है।
जीभ का बदलता रंग बुखार से लेकर पेट के खराब होने का संकेत देता है, और यही कारण है कि जब भी हम डॉक्टर के पास जाते हैं तो डॉक्टर जीभ की जांच जरूर करता है। अगर सुबह उठते ही आपकी जीभ पर भी सफेद या पीली परत जमी रहती है तो समझ जाएं कि शरीर में आम बढ़ रहा है।
आयुर्वेद में आम को बहुत नुकसानदेह माना जाता है। आम शरीर में तब बढ़ता है जब विषाक्त और विषैले पदार्थ बाहर निकलने की बजाय अंदर ही जमा होने लगते हैं। ऐसा होने पर मेटाबॉलिज्म स्लो पड़ जाता है और खाना पेट में सड़ने लगता है और पेट दर्द, कब्ज, गैस, और अन्य पेट और आंत संबंधी रोग होने लगते हैं। इसी का असर मुंह और जीभ पर देखने के लिए मिलता है। यह सिर्फ पेट की प्रॉब्लम नहीं है। आम धीरे-धीरे खून को गंदा करता है और आगे चलकर गठिया, डायबिटीज, हार्ट डिज़ीज़ जैसी बड़ी बीमारियों की नींव रख देता है।
जीभ पर जमी सफेद या पीली परत आम जमा होने का संकेत देती है। इससे निपटने के लिए आयुर्वेद में कई तरह के उपाय बताए गए हैं, जिनमें से पहला है इंटरमिटेंट फास्टिंग। रोजाना 14-16 घंटे का उपवास रखना पेट और पाचन शक्ति के लिए अच्छा रहता है। इसके लिए शाम को 6 से 7 बजे तक खाना खा लें और अगले दिन 10-11 के बीच पहला मील लें। इस दौरान भूख लगने पर पेय पदार्थ ले सकते हैं। इससे पेट को साफ होने का पूरा समय मिलता है।
दूसरा उपाय है जीरा, धनिया और सौंफ का काढ़ा। इन तीनों को बराबर मात्रा में पानी में उबाल लें। इस काढ़े को दिनभर थोड़ा-थोड़ा घूंट करके पिएं। ये शरीर के अंदर के सारे ब्लॉकेज खोलकर गंदगी को बाहर निकालने में मदद करेगा। तीसरा उपाय है अग्निसार क्रिया। अग्निसार क्रिया को योग में सबसे ज्यादा पावरफुल क्रिया माना जाता है, जिसमें पेट को अंदर की तरफ पंप किया जाता है। ये क्रिया खाली पेट की जाती है, जिससे शरीर में जमा आम धीरे-धीरे निकलने लगते हैं।
अब सवाल है कि क्या नहीं करना चाहिए। कोशिश करें कि पूरे दिन हल्का गुनगुना पानी पीएं। ठंडा पानी टॉक्सिन को जमा होने में मदद करता है और कब्ज की परेशानी को भी बढ़ाता है। कब्ज और पेट से रोगों का अंत करने के लिए गुनगुने पानी से बेहतरीन विकल्प नहीं हो सकता है।
--आईएएनएस
पीएस/एएस
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सूडान में बड़ी हिंसा, RSF ने विस्थापितों को ले जा रहे वाहन पर किया हमला; 24 लोगों की मौत
सूडान के विवादित पैरामिलिट्री समूह रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) ने मध्य सूडान के उत्तर कोर्डोफान प्रांत के पास एक विनाशकारी हमले को अंजाम दिया है. यह हमला शनिवार (7 फरवरी) को उन लोगों को ले जा रहे एक वाहन पर हुआ, जो अपनी जान बचाकर हिंसा वाले इलाकों से भाग रहे थे. इस हमले में कम से कम 24 लोगों की मौत हुई है और इनमें आठ बच्चे भी शामिल हैं. डॉक्टर्स ग्रुप सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क ने इस हमले और मौतों की जानकारी दी है.
घटना के बारे में जानकारी
घटना उत्तर कोर्डोफान के रहाद शहर के दक्षिण में हुई. बताया गया है कि यह वाहन दुबेइकर इलाके से भागकर सुरक्षित स्थान की ओर जा रहा था. उस वाहन में भारी संख्या में महिलाएं, बच्चे और अन्य नागरिक सवार थे, जो लगातार जारी संघर्ष से खुद को बचा रहे थे. डॉक्टर्स नेटवर्क के बयान में कहा गया है कि बच्चों में दो शिशु भी शामिल थे, जो मारे गए. इस गंभीर हमले ने सूडान में जारी मानवीय संकट की भयावहता को फिर उजागर किया है.
#BREAKING: Sudan Doctors Network: 24 killed in #RSF attack on bus carrying displaced persons in Kordofan https://t.co/3WkNAkNCp2 pic.twitter.com/rWaG1Hx8U7
— Arab News (@arabnews) February 7, 2026
मानव अधिकार संगठनों से अपील
सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों से तत्काल कार्रवाई करने की अपील की है. उन्होंने कहा है कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए और जो भी ऐसे अपराध कर रहे हैं, विशेषकर RSF के नेतृत्व को सीधे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. अभी तक RSF की ओर से इस घटना पर कोई बयान जारी नहीं किया गया है.
#BREAKING: Sudan Doctors Network: The international community must act to hold #RSF leaders accountable https://t.co/3WkNAkNCp2 pic.twitter.com/g0nGny77O7
— Arab News (@arabnews) February 7, 2026
तीन साल से जारी युद्ध और मानवीय संकट
गौरतलब है कि सूडान में संघर्ष अप्रैल 2023 में बढ़ गया था जब राजधानी खार्तूम सहित देश के कई हिस्सों में सैनिक और RSF के बीच सत्ता के लिए मुकाबला खुली लड़ाई में बदल गया. संयुक्त राष्ट्र और सहायता समूहों की मानें तो अब तक 40,000 से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है. इस युद्ध ने सूडान में सबसे बड़ा मानवीय संकट पैदा कर दिया है. तकरीबन 1.4 करोड़ लोग विस्थापित हो चुके हैं, महामारी और अकाल जैसी स्थिति फैल चुकी है, और लोगों को हर तरफ भय, भूख और बीमारी का सामना करना पड़ रहा है.
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