बांग्लादेश की राजधानी ढाका एक बार फिर उबल पड़ी जब अंतरिम शासन के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के खिलाफ सरकारी कर्मचारियों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। सैकड़ों कर्मचारी नौवां राष्ट्रीय वेतनमान लागू करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे और तीखे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पेट में अन्न नहीं, विकास केवल बातों में है और अन्याय का हिसाब खून से होगा।
शुक्रवार सुबह लगभग साढ़े दस बजे शाहबाग क्षेत्र से जुलूस निकला और जामुना स्थित मुख सलाहकार आवास की ओर बढ़ा। रास्ते में कई जगह बैरिकेड लगाए गए, पर भीड़ ने धक्का देकर आगे बढ़ने की कोशिश की। हालात बिगड़ते देख सुरक्षा बलों ने पानी की बौछार, आंसू गैस और ध्वनि बम का सहारा लिया। इसके बावजूद कुछ समय के लिए प्रदर्शनकारी जामुना तक पहुंच गए। बाद में सुरक्षा कड़ी कर क्षेत्र खाली कराया गया।
सबसे तीखे टकराव जामुना के बाहर हुए जहां कम से कम चालीस लोग घायल बताए गए। जब भीड़ ने बैरिकेड तोड़े तो लाठी चलानी पड़ी। इस विरोध में इंकिलाब मंच नाम का राजनीतिक समूह भी कूद पड़ा, जो यूनुस के विरोध के लिए पहले से जाना जाता है। उसके सह संस्थापक शरीफ उस्मान हादी की 18 दिसंबर को मौत हो गई थी, जिन्हें ढाका में सिर में गोली लगी थी। इंकिलाब मंच संयुक्त राष्ट्र की अगुवाई में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है और उसी मांग के साथ वह सरकारी कर्मचारियों के साथ जुड़ गया।
जामुना से हटाए जाने के बाद प्रदर्शनकारी दोपहर के आसपास एक बड़े अंतरराष्ट्रीय होटल के पास फिर जमा हुए और नारेबाजी जारी रखी। वहां से जामुना की ओर जाने वाले रास्तों पर अतिरिक्त बल तैनात किया गया। हालात पर नजर रखने के लिए पुलिस महानिरीक्षक बहारुल आलम और ढाका महानगर पुलिस आयुक्त शेख सज्जात अली समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। सुरक्षा घेरे के बीच विरोध सीमित रूप में चलता रहा।
हम आपको बता दें कि विरोध का मूल कारण नौवां राष्ट्रीय वेतनमान है। हाल ही में वेतन आयोग ने नई सिफारिशें दी हैं, पर उन्हें अभी राजपत्र में जारी नहीं किया गया। कर्मचारियों को डर है कि अगर फैसला भावी निर्वाचित शासन पर छोड़ दिया गया तो लागू होने में फिर देर होगी। प्रस्तावित ढांचे में न्यूनतम वेतन बीस हजार टका और उच्चतम वेतन एक लाख साठ हजार टका रखने की बात है। इससे पहले 2015 के आठवें वेतनमान में न्यूनतम वेतन आठ हजार दो सौ पचास टका और उच्चतम वेतन 78 हजार टका था। नया ढांचा न्यूनतम और उच्चतम वेतन के अंतर को कम कर असमानता घटाने का दावा करता है।
यह सब ऐसे समय हो रहा है जब देश चुनाव की ओर बढ़ रहा है। यूनुस प्रशासन ने कहा कि कई विदेशी पत्रकार और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक देश में पहुंच चुके हैं, इसलिए नागरिक शांति और जिम्मेदारी दिखाएं ताकि शांतिपूर्ण चुनाव संभव हो सके। पर सड़क पर उमड़ा गुस्सा बताता है कि जमीन पर बेचैनी गहरी है।
देखा जाये तो ढाका की सड़कों पर उठा यह धुआं केवल आंसू गैस का नहीं, शासन के भरोसे के जलने का धुआं है। जब सरकारी कर्मचारी, जो किसी भी देश की रीढ़ होते हैं, खुले टकराव पर उतर आएं तो समझ लेना चाहिए कि असंतोष सीमा पार कर चुका है। यूनुस की छवि विश्व मंच पर भले सधी हुई दिखे, पर घरेलू मोर्चे पर दरारें साफ दिख रही हैं। जामुना के बाहर सीधा विरोध प्रतीक है कि सत्ता का केंद्र अब सवालों के घेरे में है। इंकिलाब मंच जैसे समूहों का जुड़ना इस आग में राजनीतिक घी डाल रहा है। शरीफ उस्मान हादी की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग ने विरोध को भावनात्मक धार दे दी है।
इस घटनाक्रम का सामरिक महत्व भी कम नहीं है। बांग्लादेश हिंद महासागर क्षेत्र, बंगाल की खाड़ी और दक्षिण एशिया की राजनीति में अहम कड़ी है। वहां अस्थिरता का असर सीमाओं, व्यापार, समुद्री मार्गों और क्षेत्रीय संतुलन पर पड़ता है। यदि चुनाव से पहले अविश्वास बढ़ा, तो आंतरिक ध्रुवीकरण बढ़ेगा और राज्य तंत्र की क्षमता पर चोट लगेगी। एक कमजोर प्रशासन न तो अर्थव्यवस्था संभाल पाता है, न सुरक्षा। देखा जाये तो समाधान सीधा है पर साहस मांगता है। वेतनमान पर साफ समय सीमा, पारदर्शी निर्णय और हादी मामले पर विश्वसनीय जांच से ही भरोसा लौटेगा। डंडे और ध्वनि बम से भीड़ हट सकती है, असंतोष नहीं। अगर शासन ने संकेत नहीं समझे तो यह चेतावनी कल बड़े संकट में बदल सकती है। लोकतंत्र केवल चुनाव से नहीं, न्याय और उत्तरदायित्व से चलता है। ढाका की सड़कें यही याद दिला रही हैं।
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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने शुक्रवार को इंग्लैंड को अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में हराकर टीम के खिताब पर कब्जा जमाने वाली भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम को 7.5 करोड़ रुपये के पुरस्कार की घोषणा की। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने अंडर-19 विश्व कप जीतने, अपराजित रहने और फाइनल में इंग्लैंड को हराने पर भारतीय अंडर-19 टीम पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने घोषणा की कि बीसीसीआई टीम को 7.5 करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार देगा।
एएनआई से बात करते हुए बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने कहा कि अंडर-19 विश्व कप 2026 में हमारी अंडर-19 टीम की जीत पर पूरा देश और बीसीसीआई को गर्व है। जिस तरह से हमारी टीम ने फाइनल में इंग्लैंड को हराया और टूर्नामेंट में अपराजित रही, हम सभी को इस पर गर्व है। बीसीसीआई टीम को 7.5 करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार देगा। इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व कप में अंडर-19 टीम के शानदार प्रदर्शन पर उन्हें बधाई देते हुए कहा था कि भारत की क्रिकेट प्रतिभा चमक रही है! विश्व कप घर लाने के लिए हमारी अंडर-19 टीम पर गर्व है। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और असाधारण कौशल का प्रदर्शन किया। यह जीत कई युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरित करेगी। खिलाड़ियों को उनके आगामी प्रयासों के लिए शुभकामनाएं।
भारत अंडर-19 ने फाइनल में इंग्लैंड अंडर-19 को 100 रनों से हराकर आईसीसी अंडर-19 विश्व कप 2026 का खिताब जिम्बाब्वे के हरारे में जीता और अपना छठा खिताब अपने नाम किया। युवा भारतीय टीम ने रोमांचक फाइनल में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया। पहले बल्लेबाजी करने का फैसला करते हुए, भारत ने 411/9 का विशाल स्कोर खड़ा किया, जिसमें वैभव सूर्यवंशी ने मात्र 80 गेंदों में 15 चौकों और 15 छक्कों की मदद से 175 रनों की तूफानी पारी खेली। कप्तान आयुष म्हात्रे ने 51 गेंदों में 53 रन जोड़े, जबकि अभिज्ञान कुंडू ने 31 गेंदों में 40 रनों की तेज पारी खेली। इंग्लैंड के कालेब फाल्कनर ने 115 रनों की जुझारू पारी खेली, लेकिन मेहमान टीम 412 रनों के विशाल लक्ष्य को हासिल करने में नाकाम रही।
भारत के इस दबदबे वाले प्रदर्शन ने युवा वनडे फाइनल में छक्कों का नया रिकॉर्ड भी बनाया, जिसमें 31 छक्के शामिल थे - जो पिछले रिकॉर्ड 23 से कहीं अधिक है। इस जीत के साथ भारत ने 2000, 2008, 2012, 2018 और 2022 में अंडर-19 विश्व कप जीता था, जबकि इंग्लैंड को 1998 के बाद से अपना दूसरा खिताब जीतने का इंतजार है।
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