Ganesh Utsav Bhog Recipe: सातवें दिन घर पर बनाएं स्वादिष्ट Makhana Kesar Peda
आज गणेश उत्सव का सातवां दिन है। अगर आप बप्पा को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो इस बार घर में मखाना-केसर पेड़ा बना सकते हैं। मखाने से बना यह पेड़ा स्वाद में जबरदस्त लगता है। इसमें आप केसर डालने से मिठाई का स्वा और भी बढ़ जाता है। इसे आप घर में आसानी से मिलन वाली कुछ चीजों से तैयार किए जा सकते हैं।
सामग्री
-मखाना- 2 कप
-मिल्क पाउडर- 1/2 कप
-पिसी हुई चीनी- 1/2 कप
-दूध- करीब 1/2 कप या जरूरत के अनुसार
-केसर- 8-10 स्ट्रैंड
-इलायची पाउडर- 1/2 छोटा चम्मच
-घी- 1 से 2 छोटे चम्मच
-ड्राई फ्रूट- गार्निश करने के लिए
मखाना-केसर पेड़ा बनाने की विधि
- सबसे पहले आप ध्यान रखें कि मखाने जले नहीं, वरना पेड़े का स्वाद खराब हो जाएगा। अब भुने हुए मखानों को मिक्सर में डालकर अच्छे से पीस लें।
- इन्हें ज्यादा मोटा नहीं रखना है, क्योंकि पेड़े का मिश्रण जितना अच्छा पिसा होगा, पेड़े उतने ही आसानी से शेप में आएंगे।
-अब आप एक कड़ाही में थोड़ा-सा घी डालकर और इसमें मखाने का पाउडर डाल दें। इसको आप धीमीआंच पर थोड़ी देर चलाते हुए भून लें। अब इसमें मिल्क पाउडर डालकर अच्छे से मिला लें।
- फिर इसमें थोड़ा-थोड़ा करके दूध डालें और लगातार चलाते रहे हैं। दूध एक साथ ज्यादा डालने की जगह पर आप जरुरत के हिसाब से डालेंगी तो आपको माप का अंदाजा लग जाएंगे। इसके बाद मिश्रण को धीमी आंच पर पकाती रहें, जब तक यह गाढ़ा होकर कड़ाही छोड़ने न लगे।
- अब आप पिसी हुई चीनी डालें और अच्छे से मिला लें। चीनी डालने के बाद मिश्रण थोड़ा गीला हो जाएगा, इसलिए फिर से धीमी आंच पर चालते हुए इसे पकाना है।
- मिश्रण गाढ़ा होने के बाद इसे आसानी से हाथ से शेप दिया जा सके, तो गैस बंद कर दें। फिर एक प्लेट में निकालकर इसे थोड़ा ठंडा होने दें। ध्यान रखें कि मिश्रण पूरी तरह ठंडा न हो, हल्का गुनगुना रहने पर भी पेड़े आसानी से बन जाएंगे।
- इसके बाद हाथों पर घी लगाएं और थोड़ा सा मिश्रण लेकर इसे गोल करें। इसे हल्का-सा दबाकर पेड़े का शेप दे दें। इसके ऊपर आप एक केसर की स्ट्रैंड या थोड़ा-सा कट ड्राई फ्रूट लगा लकती हैं।
- तैयार है आपके घर में बने हुए मखाना-केसर पेड़े। इन्हें आप बप्पा को भोग में अर्पित कर सकती हैं।
Maruti Alto K10 बनी बजट कार खरीदारों की पसंद, 3.70 लाख रुपये शुरुआती कीमत
क्या आप इस दिवाली नई कार खरीदने की सोच रहे हैं? कई किफायती कारें अब अपनी पूरी रेंज में छह एयरबैग देती हैं, जिससे खरीदारों को बजट बढ़ाए बिना ज़्यादा सुरक्षा फीचर्स मिलते हैं। हालाँकि, एयरबैग सुरक्षा का सिर्फ़ एक हिस्सा हैं; क्रैश-टेस्ट परफ़ॉर्मेंस, मज़बूत बनावट और दूसरे सुरक्षा फीचर्स भी मायने रखते हैं। मारुति ऑल्टो K10 भारत की सबसे सस्ती कारों में से एक है। इसमें दमदार इंजन और काफी अच्छे फीचर्स वाला केबिन मिलता है। इसकी कीमत ऐसी है कि पिछले कुछ सालों में हैचबैक कारों की बिक्री में गिरावट के बावजूद, ऑल्टो K10 मार्केट में एक बहुत ही काम की कार बनी हुई है।
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मारुति Alto K10 में 1.0-लीटर, 3-सिलेंडर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन देती है, जो 5-स्पीड मैनुअल या 5-स्पीड ऑटोमेटेड मैनुअल ट्रांसमिशन (AMT) के साथ आता है। भले ही यह इंजन सिर्फ़ 69hp की पावर और 91Nm का टॉर्क देता है, लेकिन Alto K10 का इंजन काफी फुर्तीला लगता है, खासकर मैनुअल ट्रांसमिशन के साथ, जिससे कार तेज़ी से रफ़्तार पकड़ती है। इंजन रेव रेंज के ऊपरी हिस्से में सबसे ज़्यादा दमदार लगता है, जहाँ इसकी आवाज़ भी थोड़ी तेज़ हो जाती है। हालाँकि, ज़्यादा रेव्स पर भी इंजन की आवाज़ कभी भी कर्कश या ज़ोरदार नहीं लगती। शहर में गाड़ी चलाते समय, ट्रैफ़िक के साथ चलने के लिए एक्सीलरेटर पैडल को बस हल्का सा दबाना ही काफ़ी होता है। हालाँकि, रुक-रुक कर चलने वाले ट्रैफ़िक में कम रफ़्तार पर झटके महसूस होते हैं।
2010 में लॉन्च होने के बाद से, और इनपुट लागत व महंगाई बढ़ने के बावजूद, Alto K10 भारत की सबसे सस्ती कारों में से एक बनी हुई है; इसकी शुरुआती कीमत 3.70 लाख रुपये है। न सिर्फ़ Alto K10 की शुरुआती कीमत बाज़ार में सबसे कम है, बल्कि इसे चलाने का खर्च भी कम है। ऐसा मुख्य रूप से इसकी बेहतरीन फ़्यूल इफ़िशिएंसी (माइलेज) की वजह से है; मारुति का दावा है कि यह 24kpl से ज़्यादा है। इसके पार्ट्स और सर्विस का खर्च भी काफ़ी कम है, जिससे सालों तक Alto K10 का रखरखाव करना आसान रहता है।
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इसके कॉम्पैक्ट साइज़ की वजह से न सिर्फ़ शहर की तंग गलियों में इसे चलाना आसान है, बल्कि इसे छोटी जगहों पर पार्क करना भी आसान है, जिसे नए ड्राइवर ज़रूर पसंद करेंगे। इसका सस्पेंशन सिस्टम भी मज़बूत है और Alto K10 को ऐसा बनाता है कि यह बिना किसी परेशानी के मुश्किल रास्तों पर भी चल सके। केबिन के अंदर इस्तेमाल किए गए मटीरियल की क्वालिटी भी काफ़ी अच्छी है और यह लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद भी खराब नहीं होती।
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