'भारत एआई इम्पैक्ट समिट' ग्लोबल एआई का लाभ उठाकर लोगों के हितों में काम करने में अहम भूमिका निभाएगी : राष्ट्रपति मुर्मु
नई दिल्ली, 6 फरवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को कहा कि भारत एआई इम्पैक्ट समिट ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विशेषज्ञता और प्रौद्योगिकी का लाभ उठाकर लोगों के हित में काम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
ओडिशा के ब्लैक स्वान समिट में बोलते हुए मुर्मु ने कहा,सरकार ने भारत में एआई रिसर्च को बढ़ाने के लिए इंडिया एआई मिशन लॉन्च किया है। इस महीने सरकार नई दिल्ली में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट का आयोजन करने वाली है। इसमें करीब 100 देश भाग लेने वाले हैं।
उन्होंने आगे कहा, इस समिट का उद्देश्य एआई को केवल एक उन्नत तकनीक के रूप में देखना नहीं है, बल्कि समावेशी विकास और लोगों के लिए अवसरों तक पहुंचने का एक रणनीतिक टूल बनाना है।
सरकार द्वारा इस हफ्ते की शुरुआत में दी गई जानकारी के मुताबिक, इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में अब तक 35,000 से अधिक पंजीकरण हुए हैं। इसमें 100 से अधिक देशों के 500 से अधिक स्टार्टअप्स 500 सत्रों में हिस्सा लेंगे।
मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट, जो 16-20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में होने वाला है। यह अब तक आयोजित चार ग्लोबल एआई समिट में सबसे बड़ा होने की उम्मीद है, जो जिम्मेदार, समावेशी और प्रभाव-संचालित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आसपास बढ़ती अंतरराष्ट्रीय गति को दर्शाता है।
बयान में आगे कहा गया कि इस सम्मेलन ने विश्व भर के देशों से 35,000 से अधिक पंजीकरण के साथ अभूतपूर्व रुचि आकर्षित की है। इसमें विजन को अमल में लाने को प्राथमिकता दी जाएगी, जिसमें जमीनी स्तर पर महत्व रखने वाले परिणामों पर स्पष्ट ध्यान दिया जाएगा।
सरकारें, उद्योगपति, शोधकर्ता, सिविल सोसाइटी संगठन और अंतर्राष्ट्रीय संस्थान समिट के एजेंडा को आकार देने में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसमें 100 से अधिक देशों की भागीदारी की उम्मीद है, जिसमें 15 से 20 राष्ट्राध्यक्ष, विभिन्न देशों के 50 से अधिक मंत्री और विश्व भर की तथा भारतीय कंपनियों के 40 से अधिक सीईओ शामिल हैं। ग्लोबल एआई इकोसिस्टम के लगभग 500 प्रमुख व्यक्तियों, जिनमें नवोन्मेषक, शोधकर्ता और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी शामिल हैं, के भी इसमें शामिल होने की उम्मीद है।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
केंद्र सरकार ने पंजाब समेत तीन राज्यों के लिए जारी किए 1,133 करोड़ रुपए
नई दिल्ली, 6 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को घोषणा की कि उसने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 15वें वित्त आयोग के अनुदान के तहत मध्य प्रदेश, पंजाब और तेलंगाना में पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) और ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) को मजबूत करने के लिए 1,133 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी की है।
पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार, मध्य प्रदेश में वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अप्रतिबंधित अनुदान की दूसरी किस्त के रूप में 652.55 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं।
इस राशि से राज्य की सभी 52 पात्र जिला पंचायतों, 312 पात्र ब्लॉक पंचायतों और 23,001 पात्र ग्राम पंचायतों को लाभ मिलेगा।
इसके अतिरिक्त, मंत्रालय ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अप्रतिबंधित अनुदान की पहली किस्त के रोके गए हिस्से के रूप में 77 लाख रुपए की राशि भी 3 अतिरिक्त पात्र ब्लॉक पंचायतों और 6 ग्राम पंचायतों को जारी कर दी गई है।
केंद्र सरकार ने पंजाब के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रतिबंधित अनुदान की पहली किस्त के रूप में 222 करोड़ रुपए जारी किए।
मंत्रालय ने कहा कि इन निधियों से राज्य भर की सभी 13,262 पात्र ग्राम पंचायतों, 150 पात्र ब्लॉक पंचायतों और 22 पात्र जिला पंचायतों को सहायता मिलेगी।
तेलंगाना के लिए वित्त वर्ष 2024-25 के अप्रतिबंधित अनुदान की पहली किस्त के रूप में 256.0295 करोड़ रुपए जारी किए गए, जिससे 12,702 पात्र ग्राम पंचायतों को लाभ हुआ।
मंत्रालय ने आगे बताया कि वित्त वर्ष 2023-24 के अप्रतिबंधित अनुदान की दूसरी किस्त का रोका गया हिस्सा, यानी 233.18 लाख रुपए, 11 अतिरिक्त पात्र ग्राम पंचायतों और 40 ब्लॉक पंचायतों को जारी कर दिया गया है।
अप्रतिबंधित अनुदानों का उपयोग पंचायती राज संस्थाओं और ग्रामीण स्थानीय निकायों द्वारा वेतन और अन्य स्थापना लागतों को छोड़कर, क्षेत्र-विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए किया जाएगा।
साथ ही, बद्ध अनुदानों का उपयोग स्वच्छता और खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) स्थिति के रखरखाव जैसी बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है, जिसमें विशेष रूप से घरेलू अपशिष्ट, मानव मल और मल कीचड़ का प्रबंधन और उपचार, साथ ही पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल रीसाइक्लिंग शामिल होना चाहिए।
--आईएएनएस
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