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Ghooskhor Pandat Film Controversy: क्या Brahmin Vote पर है Mayawati की नजर? 'घूसखोर पंडित' पर बैन की मांग के पीछे UP Politics का गेम!

हाल ही में बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती के एक तीखे बयान ने सियासी हलकों के साथ-साथ फिल्म जगत में भी हलचल मचा दी है। उन्होंने फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ पर ब्राह्मण समाज का अपमान करने का आरोप लगाते हुए इसे प्रतिबंधित करने की मांग की है। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर भारतीय सिनेमा में जाति आधारित प्रस्तुति और उसकी राजनीतिक अहमियत को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

फिल्म के एक दृश्य पर आपत्ति, बढ़ा राजनीतिक तापमान

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मायावती की नाराजगी फिल्म के एक खास दृश्य को लेकर है, जिसे वह ब्राह्मण समुदाय को नकारात्मक रूप में दिखाने वाला मानती हैं। ‘घूसखोर पंडित’ को सामाजिक बुराइयों और भ्रष्टाचार पर व्यंग्यात्मक फिल्म के तौर पर पेश किया गया है, लेकिन इसके कथित कंटेंट को लेकर कई राजनीतिक दलों ने आपत्ति जताई है। मायावती द्वारा फिल्म पर बैन की मांग यह दिखाती है कि भारत में सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक पहचान और राजनीतिक विमर्श का भी अहम हिस्सा बन चुका है।

जाति राजनीति की संवेदनशीलता फिर उजागर

मायावती की कड़ी प्रतिक्रिया इस बात को रेखांकित करती है कि भारत में जाति से जुड़े मुद्दे कितने संवेदनशील हैं। किसी भी समुदाय के खिलाफ अपमानजनक चित्रण का आरोप तेज विरोध और राजनीतिक दबाव को जन्म दे सकता है। उनका यह रुख केवल ब्राह्मण समाज की छवि बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उस राजनीतिक सोच को भी दर्शाता है, जिसके तहत वह मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर सभी समुदायों के चित्रण को जवाबदेह बनाने की बात करती रही हैं।

फिल्मकारों की जिम्मेदारी पर सवाल

यह विवाद फिल्म निर्माताओं की भूमिका और जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े करता है। व्यंग्य और कटाक्ष सामाजिक सच्चाइयों को सामने लाने का सशक्त माध्यम हो सकते हैं, लेकिन यदि इन्हें संतुलन के बिना प्रस्तुत किया जाए तो गलतफहमी और विरोध की स्थिति बन सकती है। भारतीय सिनेमा का इतिहास बताता है कि जाति जैसे विषयों पर बनी फिल्मों ने कभी समाज को आईना दिखाया है, तो कभी विरोध प्रदर्शन और सेंसरशिप की मांग को जन्म दिया है।

सोशल मीडिया के दौर में बढ़ी चुनौतियां

‘घूसखोर पंडित’ को लेकर उठा विवाद आज के डिजिटल युग की एक और सच्चाई को उजागर करता है। सोशल मीडिया के चलते जनभावनाएं तेजी से आकार लेती हैं और राजनीतिक बयान तुरंत बहस का रूप ले लेते हैं। मायावती की त्वरित प्रतिक्रिया और उसके बाद छिड़ी चर्चा यह संकेत देती है कि आने वाले समय में फिल्मों के कंटेंट पर राजनीतिक और सामाजिक नजर और सख्त हो सकती है।

राजनीतिक रणनीति का भी हिस्सा

मायावती का यह कदम केवल एक फिल्म विरोध तक सीमित नहीं माना जा रहा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह उनके व्यापक राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा भी हो सकता है। इस मुद्दे को उठाकर वह अपने समर्थक वर्ग को एकजुट करने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाताओं के बीच भी अपनी पकड़ मजबूत करने का संदेश देती नजर आती हैं। इसके जरिए वह यह भी जताना चाहती हैं कि किसी भी समुदाय को, चाहे उसका सामाजिक इतिहास कुछ भी रहा हो, उपहास का पात्र नहीं बनाया जाना चाहिए।

कुल मिलाकर, ‘घूसखोर पंडित’ पर प्रतिबंध की मांग ने यह साफ कर दिया है कि भारत में सिनेमा, जाति और राजनीति एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। जहां एक ओर रचनात्मक स्वतंत्रता का सवाल है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक जिम्मेदारी और भावनाओं का सम्मान भी उतना ही जरूरी है। यह मामला फिल्मकारों और नेताओं—दोनों के लिए एक संकेत है कि विविधताओं से भरे भारतीय समाज में संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है।

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वैभव का अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में हाईएस्ट स्कोर:एक पारी में सबसे ज्यादा छक्के लगाए; 55 बॉल पर सेकंड फास्टेस्ट सेंचुरी भी लगाई

14 साल के वैभव सूर्यवंशी ने अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में रिकॉर्ड की झड़ी लगा दी। जिम्बाब्वे के हरारे क्रिकेट ग्रााउंड में इंग्लैंड के खिलाफ खिताबी मुकाबले में भारतीय ओपनर ने 80 गेंदों पर 175 रन की पारी खेली। वैभव ने 80 गेंदों की पारी में 15 चौके और 15 छक्के जमाए। उनकी बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने 50 ओवर में 411 रन बनाए। स्टोरी में जानते हैं कि वैभव ने अंडरर-19 वर्ल्डकप फाइनल के कौन-कौन से रिकॉर्ड ध्वस्त किए। सूर्यवंशी फाइनल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बैटर वैभव अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। वैभव ने इंग्लैंड के खिलाफ 175 रन की पारी खेली। इससे पहले यह रिकॉर्ड भारत के ही उन्मुक्त चंद के नाम था, जिन्होंने 2012 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नाबाद 111 रन बनाए थे। तीसरे नंबर पर ऑस्ट्रेलिया के ब्रेट विलियम्स हैं। उन्होंने 1988 में पाकिस्तान के खिलाफ 108 रन बनाए थे। सूर्यवंशी ने एक पारी में सबसे ज्यादा छक्के लगाए वैभव अंडर-19 वर्ल्ड कप की एक पारी में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने पारी में 15 छक्के लगाए। इससे पहले यह रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के माइकल हिल के नाम था, जिन्होंने 2008 में नामीबिया के खिलाफ 12 छक्के लगाए थे, जबकि क्रेग सिमंस ने 2002 में केन्या के खिलाफ 11 छक्के लगाए थे। दूसरा सबसे तेज शतक वैभव अंडर-19 वर्ल्ड कप में सबसे तेज शतक लगाने वाले दूसरे बैटर बने। उन्होंने 55 बॉल पर सेंचुरी लगाई। ऑस्ट्रेलिया के विल मलाइजचुक इस लिस्ट में टॉप पर हैं। उन्होंने इसी वर्ल्ड कप में जापान के खिलाफ महज 51 गेंदों में शतक ठोक दिया था। सूर्यवंशी ने इस वर्ल्ड कप में 30 छक्के लगाए अंडर-19 वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड अब वैभव सूर्यवंशी के नाम दर्ज हो गया है। वैभव ने इस वर्ल्ड कप में 30 छक्के जड़े हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड डेवाल्ड ब्रेविस के नाम था, जिन्होंने 2022 अंडर-19 वर्ल्ड कप में 18 छक्के लगाए थे। भारत ने अंडर-19 वर्ल्ड का सबसे बड़ा स्कोर बनाया भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल में 411 रन बनाए। यह अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल का सबसे बड़ा स्कोर है। पिछला रिकॉर्ड 253 रन का था, जोकि ऑस्ट्रेलिया ने भारत के खिलाफ 2024 में बनाया था। ------------------------ मैच से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… भारत ने इंग्लैंड को 412 का टारगेट दिया:अंडर-19 वर्ल्डकप फाइनल का सबसे बड़ा स्कोर भारत ने अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में इंग्लैंड को 412 रन का टारगेट दिया है। टीम ने हरारे स्पोर्ट्स क्लब में टॉस जीतकर बैटिंग चुनी। इंडिया ने 50 ओवर में 9 विकेट पर 411 रन बनाए। कनिष्क चौहान 37 रन बनाकर नाबाद लौटे। वैभव सूर्यवंशी 80 बॉल पर 175 रन बनाकर आउट हुए। उन्होंने 218.75 की स्ट्राइक रेट से बैटिंग करते हुए 15 चौके और 15 छक्के लगाए। कप्तान आयुष म्हात्रे (53 रन) ने अर्धशतक लगाया। अभिज्ञान कुंडू ने 40, वेदांत त्रिवेदी ने 32 और विहान मल्होत्रा ने 30 रन बनाए। जेम्स मीटो ने 3 विकेट झटके। सेबेस्टियन मॉर्गन और एलेक्स ग्रीन को 2-2 विकेट मिले। पूरी खबर…

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