नगांव Lok Sabha Bypoll: BJP के देवाशीष शर्मा AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल से 75,248 वोटों से आगे
गुवाहाटी, नौ अक्टूबर असम की नगांव लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में शुक्रवार को मतगणना के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार देवाशीष शर्मा अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल से 75,248 मतों से आगे हैं। निर्वाचन आयोग ने यह जानकारी दी। निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के अनुसार, पूर्व आईएएस अधिकारी शर्मा को 1,81,017 वोट मिले, जबकि अजमल को 1,05,769 वोट मिले।
कांग्रेस उम्मीदवार शिवमोनी बोरा 29,826 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर हैं। अधिकारियों ने बताया कि कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुक्रवार सुबह आठ बजे मतगणना शुरू हुई। मतगणना की प्रक्रिया डाक मतपत्रों से शुरू हुई, जिसके बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में दर्ज मतों की गिनती की गई।
मतगणना दो केंद्रों डॉसन उच्चतर माध्यमिक स्कूल और नगांव राजकीय बाल विद्यालय में की जा रही है, जहां प्रत्येक केंद्र पर 14-14 मेज लगाई गई हैं। इस लोकसभा क्षेत्र में नगांव और मोरीगांव जिलों में फैले आठ विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। दोनों मतगणना केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
सभी उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी जुलूस को निकालने से पहले जिला प्रशासन से अनुमति लें। इस उपचुनाव में मुख्य मुकाबला शर्मा, बोरा और अजमल के बीच है। कुल 15 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।
छह अक्टूबर को हुए उपचुनाव में 76.19 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। यह उपचुनाव कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफा देने के बाद आवश्यक हो गया था। उन्होंने इस साल की शुरुआत में भाजपा के टिकट पर दिसपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी।
हालांकि, इस उपचुनाव के नतीजे से संसद में सत्ता संतुलन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। नगांव लोकसभा क्षेत्र में 19.05 लाख मतदाता हैं। इनमें 9.43 लाख महिलाएं और थर्ड जेंडर के 50 मतदाता शामिल हैं।
ये मतदाता 2,312 मतदान केंद्रों पर वोट डालने के पात्र थे।
Advocate General विवाद में बहिष्कार पर Meghalaya High Court सख्त, स्वतः संज्ञान लिया
मेघालय हाई कोर्ट ने दो बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और एग्जीक्यूटिव सदस्यों को आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया है। यह नोटिस एडवोकेट जनरल अमित कुमार को हटाने की मांग को लेकर न्यायिक कामकाज के बहिष्कार के उस आह्वान पर जारी किया गया है, जिसे कोर्ट ने "पूरी तरह से अस्वीकार्य" बताया है। कोर्ट ने कहा कि इस बहिष्कार से न्याय-प्रशासन में बाधा आई और बागमारा को छोड़कर बाकी जगहों पर अदालतों में मुक़दमेबाज़ों का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई नहीं था। चीफ़ जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस एच एस थांगखियू की डिवीज़न बेंच ने गुरुवार को इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया। बेंच ने शिलांग बार एसोसिएशन और मेघालय हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्यों से कारण बताने को कहा कि उनके ख़िलाफ़ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए, और उन्हें 13 अक्टूबर को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया।
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इन दोनों एसोसिएशन ने वकीलों से 1 अक्टूबर से काम से दूर रहने का आह्वान किया था, जब तक कि सरकार राज्य के मुख्य कानूनी अधिकारी कुमार को हटा नहीं देती। यह मांग 3 अगस्त को हाई कोर्ट की कार्यवाही के दौरान उनके द्वारा कथित तौर पर की गई टिप्पणियों के बाद की गई थी; ये टिप्पणियां महिला वकीलों की सुरक्षा और एक महिला लॉ इंटर्न की सुरक्षा के बारे में थीं, जिसके साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई थी। हाई कोर्ट के अनुसार, एडवोकेट जनरल को हटाने की मांग के आधार पर न्यायिक कामकाज से दूर रहने को सही नहीं ठहराया जा सकता। बेंच ने कहा कि वकील ऐसे मकसद पूरे करने के लिए अदालतों का इस्तेमाल नहीं कर सकते। 'एक्स-कैप्टन हरीश उप्पल बनाम भारत संघ' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए, बेंच ने फिर से कहा कि वकीलों को हड़ताल करने या अदालती कार्यवाही का बहिष्कार करने (जिसमें टोकन हड़ताल भी शामिल है) का कोई अधिकार नहीं है।
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कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि अगर वकीलों ने तुरंत न्यायिक कामकाज शुरू नहीं किया, तो दूसरे ज़िला बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को अवमानना का नोटिस जारी किया जा सकता है। हालांकि, इसमें बागमारा बार एसोसिएशन को शामिल नहीं किया गया, जिसने बहिष्कार का समर्थन करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया को भी प्रतिवादी बनाया और मेघालय बार काउंसिल के चेयरमैन को 13 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और काम से दूर रहने वाले वकीलों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में कोर्ट को जानकारी देने का निर्देश दिया। पूरी कार्यवाही इस बात पर केंद्रित है कि बहिष्कार से अदालतों के कामकाज और कानूनी प्रतिनिधित्व तक पहुंच पर असर पड़ा।
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