Advocate General विवाद में बहिष्कार पर Meghalaya High Court सख्त, स्वतः संज्ञान लिया
मेघालय हाई कोर्ट ने दो बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और एग्जीक्यूटिव सदस्यों को आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया है। यह नोटिस एडवोकेट जनरल अमित कुमार को हटाने की मांग को लेकर न्यायिक कामकाज के बहिष्कार के उस आह्वान पर जारी किया गया है, जिसे कोर्ट ने "पूरी तरह से अस्वीकार्य" बताया है। कोर्ट ने कहा कि इस बहिष्कार से न्याय-प्रशासन में बाधा आई और बागमारा को छोड़कर बाकी जगहों पर अदालतों में मुक़दमेबाज़ों का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई नहीं था। चीफ़ जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस एच एस थांगखियू की डिवीज़न बेंच ने गुरुवार को इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया। बेंच ने शिलांग बार एसोसिएशन और मेघालय हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्यों से कारण बताने को कहा कि उनके ख़िलाफ़ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए, और उन्हें 13 अक्टूबर को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया।
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इन दोनों एसोसिएशन ने वकीलों से 1 अक्टूबर से काम से दूर रहने का आह्वान किया था, जब तक कि सरकार राज्य के मुख्य कानूनी अधिकारी कुमार को हटा नहीं देती। यह मांग 3 अगस्त को हाई कोर्ट की कार्यवाही के दौरान उनके द्वारा कथित तौर पर की गई टिप्पणियों के बाद की गई थी; ये टिप्पणियां महिला वकीलों की सुरक्षा और एक महिला लॉ इंटर्न की सुरक्षा के बारे में थीं, जिसके साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई थी। हाई कोर्ट के अनुसार, एडवोकेट जनरल को हटाने की मांग के आधार पर न्यायिक कामकाज से दूर रहने को सही नहीं ठहराया जा सकता। बेंच ने कहा कि वकील ऐसे मकसद पूरे करने के लिए अदालतों का इस्तेमाल नहीं कर सकते। 'एक्स-कैप्टन हरीश उप्पल बनाम भारत संघ' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए, बेंच ने फिर से कहा कि वकीलों को हड़ताल करने या अदालती कार्यवाही का बहिष्कार करने (जिसमें टोकन हड़ताल भी शामिल है) का कोई अधिकार नहीं है।
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कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि अगर वकीलों ने तुरंत न्यायिक कामकाज शुरू नहीं किया, तो दूसरे ज़िला बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को अवमानना का नोटिस जारी किया जा सकता है। हालांकि, इसमें बागमारा बार एसोसिएशन को शामिल नहीं किया गया, जिसने बहिष्कार का समर्थन करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया को भी प्रतिवादी बनाया और मेघालय बार काउंसिल के चेयरमैन को 13 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और काम से दूर रहने वाले वकीलों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में कोर्ट को जानकारी देने का निर्देश दिया। पूरी कार्यवाही इस बात पर केंद्रित है कि बहिष्कार से अदालतों के कामकाज और कानूनी प्रतिनिधित्व तक पहुंच पर असर पड़ा।
Stock Market में कैसे लौटी बहार? सेंसेक्स में 800 अंकों की उछाल, इन 3 वजहों से आई तेजी
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को जोरदार वापसी देखने को मिली। सेंसेक्स में 800 से अधिक अंकों का उछाल दर्ज किया गया, वहीं निफ्टी भी 22,500 के स्तर के करीब पहुंच गया। गुरुवार की भारी गिरावट के बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर बिकवाली का शिकार हुए शेयरों में खरीदारी की, जिससे बाजार में यह तेजी आई। खास बात यह रही कि अमेरिकी सरकार द्वारा प्रमुख टेक कंपनियों पर ग्रीन-कार्ड नियमों को लेकर लगाई गई पाबंदियों के बावजूद आईटी शेयरों में शानदार तेजी देखने को मिली। बाजार में यह रिकवरी काफी हैरान करने वाली रही, क्योंकि गुरुवार की तेज बिकवाली के बाद निवेशकों को आईटी सेक्टर पर और दबाव बढ़ने की आशंका थी। दरअसल, अमेरिकी सरकार ने टीसीएस (TCS), इंफोसिस (Infosys), विप्रो (Wipro) और एचसीएलटेक (HCLTech) जैसी दिग्गज कंपनियों को पर्म (PERM - Permanent Labour Certification) प्रोग्राम से निलंबित कर दिया है, जो एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का एक अहम चरण माना जाता है। हालांकि, US परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) प्रोग्राम के सीमित इस्तेमाल के बारे में कंपनियों की सफाई, TCS के हालिया तिमाही नतीजे और हालिया गिरावट के बाद सस्ती खरीदारी ने मार्केट के सेंटीमेंट को बेहतर बनाने में मदद की। सुबह 10:11 बजे, BSE सेंसेक्स 804.11 अंक या 1.12% की बढ़त के साथ 72,397.35 पर ट्रेड कर रहा था। इंडेक्स 71,776.67 पर खुला और शुरुआती कारोबार में 72,371.94 के हाई लेवल तक पहुंचा। निफ्टी 50 सुबह 10:13 बजे 22,314.95 पर खुलने के बाद 264.15 अंक या 1.19% बढ़कर 22,495.95 पर पहुंच गया। यह तेज़ी व्यापक थी, जिसमें सभी प्रमुख ब्रॉड-मार्केट इंडेक्स ऊपर कारोबार कर रहे थे। निफ्टी 100 में 1.16%, निफ्टी 200 में 1.21% और निफ्टी 500 में 1.12% की बढ़त हुई। निफ्टी मिडकैप 50 और निफ्टी मिडकैप 100 क्रमशः 1.35% और 1.39% चढ़े, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.64% की बढ़त हुई।
IT शेयरों ने रिकवरी की अगुवाई की
सबसे बड़ी बढ़त IT शेयरों से मिली, जो US ग्रीन-कार्ड प्रतिबंधों और टेक्नोलॉजी पर खर्च के आउटलुक को लेकर चिंताओं के बीच दबाव में थे। शुरुआती कारोबार में निफ्टी IT इंडेक्स 3.02% बढ़कर 28,574.85 पर पहुंच गया और मार्केट की हालिया स्थिति में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला सेक्टर इंडेक्स बन गया। TCS के शेयरों में 4.98% की तेज़ी आई, जबकि Infosys में 3.07%, Wipro में 3.23% और Tech Mahindra में 2.13% की बढ़त हुई। Coforge 2.82%, Persistent Systems 2.66%, Mphasis 3.13% और HCLTech 1.95% ऊपर चढ़े। यह तेज़ी इसलिए अहम है क्योंकि अमेरिकी सरकार द्वारा कई टेक्नोलॉजी कंपनियों को PERM प्रोग्राम से सस्पेंड करने के बाद IT शेयरों पर और दबाव पड़ने की आशंका थी। हालांकि, कंपनियों ने यह साफ़ करना शुरू कर दिया है कि वे इस प्रोग्राम पर कितना निर्भर हैं, जिससे इन्वेस्टर्स को सिर्फ़ हेडलाइन पर प्रतिक्रिया देने के बजाय तुरंत पड़ने वाले असर का आकलन करने में मदद मिल रही है। TCS ने शुक्रवार को स्टॉक एक्सचेंजों को बताया कि पिछले दो सालों में उसके PERM एप्लीकेशन की संख्या सिंगल डिजिट में रही है। कंपनी ने कहा कि उसे उम्मीद नहीं है कि इस रोक से उसकी वर्कफोर्स स्ट्रैटेजी या कस्टमर एंगेजमेंट पर कोई असर पड़ेगा। कंपनी ने अगले पांच सालों में US में 15,000 और लोगों को नौकरी पर रखने की अपनी योजना को भी दोहराया और इस बात पर ज़ोर दिया कि उसकी वर्कफोर्स स्ट्रैटेजी लोकल टैलेंट को नौकरी पर रखने पर आधारित है। माइक्रोसॉफ्ट ने भी अपने H-1B वीज़ा एप्लीकेशन के बारे में सफाई दी है। हालांकि, H-1B वीज़ा प्रोग्राम और PERM ग्रीन-कार्ड प्रोसेस अलग-अलग हैं, और US की कार्रवाई खास तौर पर परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन एप्लीकेशन से जुड़ी है।
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गिरावट के बाद 'बार्गेन बाइंग'
शुक्रवार को आई तेज़ी के पीछे एक और अहम वजह 'बार्गेन बाइंग' है। गुरुवार को सेंसेक्स 1,045.46 अंक या 1.44% गिरकर 71,593.24 पर बंद हुआ। निफ्टी 371.25 अंक या 1.64% गिरकर 22,231.80 पर बंद हुआ। इस भारी गिरावट से कई शेयर बिकवाली से पहले के मुकाबले सस्ते हो गए, जिससे उन निवेशकों के लिए मौके बने जो ऐसी कंपनियों के शेयर खरीदना चाहते हैं जिनमें उन्हें लंबे समय में ग्रोथ की संभावना दिखती है। इसे आम तौर पर 'बार्गेन बाइंग' या 'बाइंग द डिप' कहा जाता है। जब कम समय में बाज़ार में तेज़ी से गिरावट आती है, तो कुछ निवेशक कम कीमत पर शेयर खरीदने के लिए आगे आते हैं। उन्हें उम्मीद होती है कि भले ही निकट भविष्य में बाज़ार का मूड कमज़ोर रहे, लेकिन शेयरों का वैल्यूएशन ज़्यादा आकर्षक हो सकता है। इस खरीदारी से बाज़ार में वापसी (रिबाउंड) हो सकती है क्योंकि नई मांग से शेयरों की कीमतों को सहारा मिलता है। इससे 'शॉर्ट कवरिंग' भी हो सकती है, जिसमें जिन ट्रेडर्स ने कीमतों में गिरावट पर दांव लगाया था, वे अपनी पोजीशन बंद करने के लिए शेयर खरीदते हैं, जिससे कीमतों में और तेज़ी आती है।
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TCS के Q2 नतीजों से एक और बढ़ावा मिला
गुरुवार को घोषित TCS के सितंबर तिमाही के नतीजों ने भी IT शेयरों के प्रति सकारात्मक माहौल बनाने में मदद की है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के लिए 13,884 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफ़िट दर्ज किया, जो एक साल पहले के 12,075 करोड़ रुपये से लगभग 15% ज़्यादा है। रेवेन्यू सालाना आधार पर 11.2% बढ़कर 73,188 करोड़ रुपये हो गया। इसका सालाना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रेवेन्यू तिमाही-दर-तिमाही आधार पर लगभग 20% बढ़कर 3.1 बिलियन डॉलर हो गया, जो जुलाई-सितंबर तिमाही में 2.6 बिलियन डॉलर था। AI रेवेन्यू अब कंपनी के कुल रेवेन्यू का 10% से ज़्यादा हो गया है। TCS ने तिमाही के लिए 9.6 बिलियन डॉलर की कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू भी बताई, जिससे निवेशकों को बिज़नेस की रफ़्तार का एक और संकेत मिला। AI परफॉर्मेंस IT कंपनियों में निवेश के नज़रिए से एक अहम हिस्सा बन गई है, क्योंकि क्लाइंट तेज़ी से ऑटोमेशन और AI-आधारित सेवाओं को अपना रहे हैं।
कच्चे तेल से थोड़ी राहत, लेकिन जोखिम अब भी बरकरार
शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई, जिससे हालिया उछाल के बाद बाजारों को कुछ राहत मिली।सत्र के शुरुआती बाजार आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड 1.31% गिरकर 102.91 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1.14% फिसलकर 90.45 डॉलर पर रहा।हालांकि, ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने रहना भारत के आयात बिल, महंगाई और कॉरपोरेट लागत को लेकर चिंताओं को बनाए रखे हुए है। तेल की कीमतों में लगातार तेजी भारतीय रुपये पर दबाव डाल सकती है और ब्याज दरों के परिदृश्य को भी जटिल बना सकती है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली भी एक बड़ी चिंता बनी हुई है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड (Geojit Investments Limited) के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी. के. विजयकुमार के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती भारतीय बाजार पर लगातार दबाव बनाए हुए हैं।
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