किराये की कोख, लालच और धर्मांतरण, प्रयागराज में गरीब हिंदू लड़कियों के साथ जिहाद का सनसनीखेज मामला आया सामने
Prayagraj Jihad Case: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में से सामने आया एक चौंकाने वाला मामला. बताया जा रहा है कि यहां एक संगठित रैकेट के जरिए नाबालिग लड़कियों को किराए की कोख यानी सेरोगेसी के नाम पर लालच दिया जा रहा है और उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित किया गया है. इस पूरे मामले में एक महिला जोया का मामला सामने आया है. आइए जानते हैं पूरी बात.
15 साल की नाबालिग लड़की बनी शिकार
प्रयागराज पुलिस के अनुसार, 15 साल की एक नाबालिग लड़की से कथित तौर पर उसकी कोख किराए पर लेने की कीमत एक Iphone और 15 हजार रुपये तय की गई थी. पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान में कहा कि उसे 'एक छोटे से ऑपरेशन' के बाद 'नई जिंदगी' मिलने का भरोसा दिलाया गया था. पीड़िता ने बताया कि ये सब उसने एक महिला के कहने पर किया था. उसने आरोप लगाया कि आरोपी महिला ने उसे धार्मिक आजादी और भविष्य में निकाह जैसे वादों के जरिए आकर्षित किया था.
जांच में सामने आए कई पहलू
इस सनसनी खेज मामले की जांच में कई पहलू सामने आए हैं. यह भी पाया गया कि बीते एक साल में 20 से 25 साल की लड़कियों को इसी तरह शिकार बनाया गया होगा. फिलहाल, पुलिस इस पूरे नेटवर्क को समझने के लिए तीन प्रमुख एंगलों पर जांच कर रही हैं- पहला, अब तक कितनी नाबालिग लड़कियां इस कथित रैकेट का शिकार बनीं हुई है? दूसरा, क्या इसके पीछे कोई सेक्स रैकेट भी सक्रिय है? और तीसरा, क्या लड़कियों को धर्मांतरण के लिए ब्रेनवॉश किया गया है?
15 जनवरी को लापता हुई थी पीड़िता
पीड़िता जोया की मां ने बताया कि उनकी बेटी 15 जनवरी को अचानक लापता हो गई थी. परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है. इसके बाद यह पूरा घटनाक्रम इलाके में उजागर हुआ है. पुलिस का कहना है कि सभी आरोपों की तथ्यात्मक जांच की जा रही है और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी. हालांकि, अभी तक किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया है.
पुलिस आरोपी महिला को ट्रेस करने में जुटी हुई है. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर तुरंत पुलिस को जानकारी दें.
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कोरियन गेम का आखिरी टास्क और सीक्रेट डायरी, फोरेंसिक जांच में खुलेगा गाजियाबाद की तीन बहनों के सुसाइड का राज
Ghaziabad Suicide: गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी में मंगलवार रात करीब दो बजे तीन नाबालिग बहनों ने नौवीं मंजिल से कूदकर खुदकुशी कर ली. तीनों बहनों के शवों का पोस्टमार्ट करने के बाद परिवार ने अंतिम संस्कार कर दिया है. बेटियों के अंतिम संस्कार के बाद पूरा परिवार घर में कैद हो गया है. वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया है तीनों बहनों के सिर से लेकर पसलियों और पैरों में कई फ्रैक्चर हुए थे. लेकिन तीनों ने किस वजह से एक साथ कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली, इसका सटीक पता अभी तक नहीं चला है. पुलिस अभी भी जांच में जुटी हुई है.
शुरुआती जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें कोरियन कल्चर से बहुत प्रभावित थीं और ऑनलाइन कोरियन लवर गेम खेलती थीं. जो एक टास्क-बेस्ड गेम है. इसके साथ ही तीनों बहनों का एक सुसाइड नोट और आठ पन्नों की एक डायरी भी मिली है. जिसमें उनके कोरियन कल्चर और कोरियन लड़कों को पसंद करने की बात का खुलासा हुआ है. जिसका परिवार ने विरोध किया और उनका मोबाइल छीन लिया. ये सब बातें पुलिस और मीडिया रिपोर्ट में सामने आई हैं, लेकिन पूरी सच्चाई अभी भी आना बाकी है. ऐसे में तीनों बहनों की मौत की सच्चाई अब फॉरेंसिक जांच के बाद ही सामने आएगी.
मोबाइल में कैद है 'आखिरी टास्क' का राज
जांच में सामने आया है कि तीनों बहनों ऑनलाइन कोरियन गेम खेलती थी, टास्क बेस्ड इस गेम में कुल 50 टास्क थे. ऐसा माना जा रहा है कि 50वें और आखिरी टास्क को पूरा करने के लिए ही तीनों बहनों ने 9वीं मंजिल से छलांग लगा दी. जिसमें उनकी जान चली गई. हालांकि पूरी सच्चाई उनके मोबाइल में कैद है कि आखिर वो कौन सा कोरियन गेम था जो उसे खेलने वाले को खतरनाक टास्क देता था. जिसमें किसी की भी जान खतरे में पड़ जाए. बच्चियों के पिता चेतन कुमार का कहना है कि तीनों बच्चियां काफी समय से यह गेम खेल रही थीं और मंगलवार की शाम इसका 50वां यानी आखिरी टास्क था. इसी टास्क को पूरा करने के लिए उन्होंने मौत का रास्ता चुन लिया.
छलांग लगाने के लिए दो स्टेप वाली सीढ़ी का किया इस्तेमाल
तीनों बहनों ने 9वीं मंजिल की बालकनी से कूदने के लिए दो स्टेप वाली सीढ़ी की मदद ली. जिससे वे रेलिंग के ऊपर जा सकें. पुलिस जांच में पता चला है कि 14 साल की प्राची इस गेम की लीडर थी और वहीं कमांड देती थी. तीनों बहनों में इतना लगाव था कि वे हर काम एक साथ करती थीं. इसके साथ ही पुलिस को मौके से एक पन्ने का सुसाइड भी बरामद किया. जिसमें उन्होंने लिखा, मम्मी-पापा सॉरी. डीसीपी निमिष पाटिल और एसीपी अतुल कुमार ने बच्चियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं. अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आखिर बच्चियों को ये गेम कैसे मिला और किसने उन्हें इसे खेलने के लिए उकसाया.
आठ पन्नों की डायरी में लिखी अपनी पसंद
इसके साथ ही तीनों बहनों ने खुदकुशी करने से पहले आठ पन्नों की एक छोटी डायरी भी छोड़ी. जिसमें उन्होंने अपने माता-पिता से माफी मांगी और गेमिंग से जुड़ी अपनी गतिविधियों के बारे में बताया. बच्चियों ने अपने माता-पिता से डायरी को पूरा पढ़ने का भी आग्रह किया. उन्होंने जोर देकर कहा कि डायरी में जो लिखा है, वह सच है. उन्होंने डायरी में लिखा, "इस डायरी में जो कुछ भी लिखा है वो सब पढ़ लो क्योंकि ये सब सच है. अभी पढ़ो. सॉरी, पापा. इसके बाद एक बड़ा रोने वाला इमोजी भी बनाया.
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परिवार ने लगाया था मोबाइल पर प्रतिबंध
इसके अलावा, बच्चियों के कमरे की एक दीवार पर, उनमें से एक ने लिखा था, "मैं बहुत, बहुत अकेली हूं, मेरा जीवन बहुत, बहुत अकेला है." बच्चियों ने डायरी में लिखा, "हम कोरियन नहीं छोड़ सकते. कोरियन ही हमारा जीवन है. आप हमें आज़ाद नहीं कर सकते. हम अपनी जान दे रहे हैं." प्रारंभिक जांच से यह भी पता चलता है कि बच्चियां पिछले दो साल से स्कूल नहीं जा रही थीं. पुलिस उपायुक्त निमिश पाटिल ने बताया कि वे कथित तौर पर खराब शैक्षणिक प्रदर्शन और आर्थिक समस्याओं के कारण घर पर ही रह रही थीं. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से परिवार ने उनके मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगा रखा था. उन्होंने आगे कहा कि तिहरे आत्महत्या के पीछे का सटीक कारण जानने के लिए अभी भी जांच की जा रही है.
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