हवा में उगेगा आलू, मिट्टी और पानी का भी नहीं करना इस्तेमाल; वैज्ञानिकों ने ईजाद की नई तकनीक
Aeroponics Potato: मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय (RVSKVV) ने आलू की खेती में एक नई क्रांति ला दी है.दरअसल, विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एरोपोनिक्स (aeroponics) तकनीक विकसित की है, जिसके तहत आलू की फसल को पूरी तरह हवा में उगाया जा रहा है.
बिना मिट्टी के और बस न्यूनतम पानी का किया गया इस्तेमाल...
जानकारी के अनुसार इस विधि में पौधों की जड़ों को हवा में लटकाकर पोषक तत्वों से युक्त महीन धुंध (मिस्ट) का छिड़काव किया जाता है.इससे पौधे तेजी से बढ़ते हैं और इनमें कोई कीड़ा भी नहीं लगता.ये आलू उच्च गुणवत्ता वाले होते हैं.वैज्ञानकों के अनुसार इस तकनीक से मिनी-ट्यूबर (छोटे आलू) प्राप्त होते हैं.ये मिनी-ट्यूबर बाद में पॉलीहाउस या खेत में रोपित किए जा सकते हैं, जिससे किसानों को वायरस-फ्री बीज मिलता है और उत्पादन में काफी वृद्धि होगी.
#WATCH | Gwalior, Madhya Pradesh: Rajmata Vijayaraje Scindia Agriculture University has developed a technique to grow potatoes in the air using an aeroponics unit. (05.02) pic.twitter.com/50dTf9DSa2
— ANI (@ANI) February 6, 2026
ये तकनीक उस क्षेत्र के लिए फायदेमंद, जहां मिट्टी की गुणवत्ता खराब है या पानी कम
बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी केंद्र में यह तकनीक पहले से लागू है और अब इसे अन्य स्थानों जैसे इंदौर और सीहोर में भी विस्तार दिया जा रहा है.विशेषज्ञों का कहना है कि एरोपोनिक्स से आलू की पैदावार पारंपरिक तरीके से 8-10 गुना तक अधिक हो सकती है साथ ही पानी की बचत भी होती है.यह तकनीक खासकर उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी है जहां मिट्टी की गुणवत्ता खराब है या पानी की कमी रहती है.यह नवाचार न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश में टिकाऊ कृषि और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.विश्वविद्यालय के शोधकर्ता अब किसानों को प्रशिक्षण देकर इस तकनीक को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने की योजना बना रहे हैं।
एरोपोनिक्स से आलू उगाने के फायदे और नुकसान
एरोपोनिक्स (Aeroponics) एक आधुनिक मिट्टी-रहित खेती की तकनीक है जिसमें आलू के पौधों की जड़ें हवा में लटकी रहती हैं और पोषक तत्वों वाली महीन धुंध (मिस्ट) के जरिए पानी और खाद मिलती है.यह विधि खासकर बीज आलू (मिनी-ट्यूबर) उत्पादन के लिए बहुत प्रभावी है.इस तरह से खेती से फायदे की बात करें तो इससे पारंपरिक खेती की तुलना में प्रति पौधा 8-10 गुना तक ज्यादा मिनी-ट्यूबर मिल सकते हैं.इससे पारंपरिक खेती से 90-95% तक कम पानी लगता है क्योंकि पानी रिसाइकिल होता है और बर्बाद नहीं होता.मिट्टी न होने से मिट्टी जनित रोग और कीट लगभग खत्म हो जाते हैं.वहीं, नुकसान की बात करें तो ऐसे खेती में लागत अधिक आती है.पंप और मिस्टिंग सिस्टम चलाने के लिए लगातार बिजली खर्च होती है.
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घटते जन्मदर से घबराया चीन, महिलाओं को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए कर रहा प्रोत्साहित: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 6 फरवरी (आईएएनएस)। कभी वन चाइल्ड पॉलिसी को लेकर बेहद सख्त रहे चीन अपने रवैए में बदलाव ला रहा है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं से अपील की जा रही है कि वो ज्यादा बच्चे पैदा करें।
म्यांमार स्थित मेकांग न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार दशक में जन्म दर को महिलाओं ने नहीं, बल्कि सरकार ने तय किया है।
जहां 1979 में वन चाइल्ड पॉलिसी में जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाने का लक्ष्य रखा गया था, वहीं अब देश में महिलाओं पर अधिक बच्चे पैदा करने का दबाव डाला जाना शुरू हो गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि देश की जनसंख्या में भारी गिरावट देखी गई है।
जनवरी में जारी आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति स्पष्ट होती है। 2025 में 7.92 मिलियन शिशु जन्मे, जो 2024 के 9.54 मिलियन से 1.62 मिलियन (लगभग 17 फीसदी) कम है। जन्म दर 5.63 प्रति 1,000 व्यक्ति रह गई, जो रिकॉर्ड निचला स्तर है।
यह 1949 के बाद से सबसे कम स्तर है, जब चीन में आधुनिक जनगणना रिकॉर्ड शुरू हुए थे।
रिपोर्ट में कहा गया है, बीजिंग अभी भी बच्चों की पैदाइश को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के रूप में नहीं बल्कि आर्थिक योजना के एक साधन के रूप में देखता है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, विकास के लिए, आय बढ़ाने और देश पर दबाव कम करने के लक्ष्य के साथ, एक-बच्चा नीति ने कई महिलाओं को उनकी इच्छाओं से महरूम रखा। उन्हें जबरन गर्भपात के लिए मजबूर किया, नसबंदी कराई, और शारीरिक-मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने लोकतांत्रिक तरीके से नहीं बल्कि जोर-जबरदस्ती से लोगों को अपनी बात मानने को मजबूर किया।
इस रिपोर्ट में बेटों की चाहत का भी जिक्र है। लिखा गया है कि बेटा पाने की इच्छा ने देश के लिंगानुपात पर भी असर डाला।
चीन ने 2016 में वन चाइल्ड पॉलिसी खत्म कर दी और टू चाइल्ड पॉलिसी अपनाई। बाद में जन्म दर में गिरावट जारी रहने पर इसे थ्री-चाइल्ड पॉलिसी तक बढ़ा दिया।
रिपोर्ट में कहा गया है, चीन की नीति में बदलाव का भ्रम एक गहरी समस्या को उजागर करता है: व्यक्तिगत इच्छा को बढ़ावा देने के बजाय, सरकार ने आर्थिक मजबूरी के चलते अपनी नीति को थोपना शुरू कर दिया है।
एक तरफ सरकार जन्म दर बढ़ाने की सलाह दे रही है, तो वहीं कई जोड़ों को बढ़ती महंगाई, करियर, जिम्मेदारियों और वर्कप्लेस पर लिंग आधारित भेदभाव के चलते रिस्क लेने से बचना चाहते हैं।
खास बात यह है कि लिंग अनुपात के कारण, चीन में अब बच्चे पैदा करने वाली महिलाओं (बढ़ी उम्र के कारण) की संख्या में भी कमी आई है।
रिपोर्ट में कहा गया है, भले ही सरकार अब बच्चे पैदा करने के लिए कह रही है, महिलाएं अभी भी नीतिगत सीमाओं में फंसी हुई हैं।
--आईएएनएस
केआर/
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