U19 World Cup 2026: U19 वर्ल्ड कप जीती टीम इंडिया, जश्न में डूबा खिलाड़ियों का परिवार; देखें VIDEO
U19 World Cup 2026: भारत ने फाइनल में इंग्लैंड को हराकर छठी बार अंडर-19 विश्व कप अपने नाम कर लिया. हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए मुकाबले में भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी की और 50 ओवर में 9 विकेट पर 411 रन बनाए. इस विशाल स्कोर में 14 साल के वैभव सूर्यवंशी की सबसे बड़ी भूमिका रही. उन्होंने सिर्फ 80 गेंदों में 175 रन ठोक दिए, जिसमें 15 चौके और 15 छक्के शामिल थ.। कप्तान आयुष मात्रे ने भी 53 रनों की अहम पारी खेली.
412 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम 40.2 ओवर में 311 रन पर ऑलआउट हो गई और भारत ने मैच 100 रन से जीत लिया. जीत के बाद देशभर में जश्न छा गया. खिलाड़ियों के घरों पर लोगों ने मिठाइयां बांटीं और पटाखे फोड़े. यह जीत दिखाती है कि भारतीय क्रिकेट लगातार दुनिया में अपना दबदबा बनाए हुए है.
Research: सावधान! विशेषज्ञों को मिले 2 नए म्यूटेंट वायरस, महामारी फैलाने की बताई क्षमता, बन सकता है बड़ा खतरा
Research: दुनिया के जाने-माने वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जानवरों में फैलने वाले दो कम-ज्ञात वायरस भविष्य में इंसानों के लिए बड़ी महामारी का कारण बन सकते हैं. ये वायरस हैं इन्फ्लुएंजा डी और कैनाइन कोरोना वायरस.
आने वाले समय में इन नए वायरस से खतरा
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका में सर्दियों के मौसम में फ्लू का कहर जारी है. अक्टूबर से अब तक वहां करीब 2 करोड़ लोग फ्लू से बीमार हो चुके हैं और 11 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं. लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि असली खतरा आने वाले समय में इन नए वायरस से हो सकता है.
ऐसा है इन्फ्लुएंजा डी
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इन्फ्लुएंजा डी वायरस मुख्य रूप से गायों में पाया जाता है. यह तेजी से अपना रूप बदलता है और कई जानवरों में फैल चुका है. चौंकाने वाली बात यह है कि पशुओं के साथ काम करने वाले कई लोगों के शरीर में इसके एंटीबॉडी मिले हैं, जिससे पता चलता है कि इंसान इसके संपर्क में आ चुके हैं.
इस वायरस के मामले इंसानों में भी मिले
दूसरा वायरस कैनाइन कोरोना वायरस है, जो कुत्तों में तेजी से फैलता है. यह SARS-CoV-2 से अलग है, लेकिन कुछ मामलों में इंसानों में भी पाया गया है. अमेरिका, मलेशिया, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में इसके संक्रमण के सबूत मिल चुके हैं.
क्या कहता है शोध
फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के पर्यावरण और वैश्विक स्वास्थ्य विभाग में शोध प्रोफेसर डॉ. जॉन लेडनिकी का कहना है कि इन दोनों वायरस पर निगरानी बेहद कमजोर है. अगर ये वायरस इंसान से इंसान में फैलने की क्षमता विकसित कर लेते हैं, तो महामारी का खतरा बढ़ सकता है, क्योंकि लोगों में इनके खिलाफ कोई प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता नहीं है. CDC समर्थित एक शोध में कहा गया है कि अगर समय रहते जांच, निगरानी और वैक्सीन पर काम नहीं हुआ, तो ये वायरस चुपचाप बड़ा खतरा बन सकते हैं.
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