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Research: सावधान! विशेषज्ञों को मिले 2 नए म्यूटेंट वायरस, महामारी फैलाने की बताई क्षमता, बन सकता है बड़ा खतरा

Research: दुनिया के जाने-माने वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जानवरों में फैलने वाले दो कम-ज्ञात वायरस भविष्य में इंसानों के लिए बड़ी महामारी का कारण बन सकते हैं. ये वायरस हैं इन्फ्लुएंजा डी और कैनाइन कोरोना वायरस.

आने वाले समय में इन नए वायरस से खतरा

यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका में सर्दियों के मौसम में फ्लू का कहर जारी है. अक्टूबर से अब तक वहां करीब 2 करोड़ लोग फ्लू से बीमार हो चुके हैं और 11 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं. लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि असली खतरा आने वाले समय में इन नए वायरस से हो सकता है.

ऐसा है इन्फ्लुएंजा डी 

वैज्ञानिकों के मुताबिक, इन्फ्लुएंजा डी वायरस मुख्य रूप से गायों में पाया जाता है. यह तेजी से अपना रूप बदलता है और कई जानवरों में फैल चुका है. चौंकाने वाली बात यह है कि पशुओं के साथ काम करने वाले कई लोगों के शरीर में इसके एंटीबॉडी मिले हैं, जिससे पता चलता है कि इंसान इसके संपर्क में आ चुके हैं.

इस वायरस के मामले इंसानों में भी मिले

दूसरा वायरस कैनाइन कोरोना वायरस है, जो कुत्तों में तेजी से फैलता है. यह SARS-CoV-2 से अलग है, लेकिन कुछ मामलों में इंसानों में भी पाया गया है. अमेरिका, मलेशिया, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में इसके संक्रमण के सबूत मिल चुके हैं. 

 क्या कहता है शोध

फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के पर्यावरण और वैश्विक स्वास्थ्य विभाग में शोध प्रोफेसर डॉ. जॉन लेडनिकी का कहना है कि इन दोनों वायरस पर निगरानी बेहद कमजोर है. अगर ये वायरस इंसान से इंसान में फैलने की क्षमता विकसित कर लेते हैं, तो महामारी का खतरा बढ़ सकता है, क्योंकि लोगों में इनके खिलाफ कोई प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता नहीं है. CDC समर्थित एक शोध में कहा गया है कि अगर समय रहते जांच, निगरानी और वैक्सीन पर काम नहीं हुआ, तो ये वायरस चुपचाप बड़ा खतरा बन सकते हैं.

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जम्मू-कश्मीर में विकास की रफ्तार तेज, पीओके बना ‘राजनीतिक ब्लैक होल’

वॉशिंगटन, 6 फरवरी (आईएएनएस)। अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिली विशेष स्थिति समाप्त किए जाने के बाद क्षेत्र के विकास का रास्ता खुला, जहां भारत ने विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा तैयार किया और समावेशी शासन को बढ़ावा दिया। वहीं, नियंत्रण रेखा (एलओसी) के उस पार पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले इलाके महंगाई, दमन और राजनीतिक जड़ता में फंसे हुए हैं।

शुक्रवार को आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में दिख रहा विकास का परिदृश्य पिछले 70 वर्षों से चले आ रहे पाकिस्तानी दुष्प्रचार का करारा जवाब है।

यूरेशिया रिव्यू की रिपोर्ट के अनुसार, एलओसी के दोनों ओर का फर्क साफ नजर आता है। एक ओर जम्मू-कश्मीर वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ते हुए अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी कर रहा है और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य व्यवस्था खड़ी कर रहा है। दूसरी ओर पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) एक “राजनीतिक ब्लैक होल” बना हुआ है, जहां पाकिस्तान में जबरन विलय पर सवाल उठाना भी दंडनीय अपराध माना जाता है।

रिपोर्ट में कहा गया, “वर्ष 2019 भारत के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ था। अनुच्छेद 370 का हटाया जाना केवल एक कानूनी बदलाव नहीं था, बल्कि उस दीवार को गिराना था, जिसने लंबे समय तक जम्मू-कश्मीर के लोगों को भारतीय प्रगति की धड़कन से अलग-थलग रखा। आज श्रीनगर के चहल-पहल भरे बाजारों और जम्मू के औद्योगिक केंद्रों में पुनर्जागरण की कहानी दिखती है। इसके उलट एलओसी के पार पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में हालात शोषण, बढ़ते असंतोष और गिरती अर्थव्यवस्था के हैं।”

रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया कि 2024 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव, जिनमें 63 प्रतिशत मतदान हुआ, एक निर्णायक कसौटी साबित हुए। इसमें जनता ने स्पष्ट रूप से “बंदूक के बजाय मतपत्र” को चुना।

रिपोर्ट के मुताबिक, “यह सिर्फ एक चुनाव नहीं था, बल्कि उस पाकिस्तान प्रायोजित नैरेटिव का सार्वजनिक अंत था, जिसमें कहा जाता रहा कि ‘कश्मीरी भारतीय लोकतंत्र को खारिज करते हैं।’ महिलाएं, युवा और पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी जैसे हाशिए पर रहे समुदाय, जिन्हें अनुच्छेद 370 के तहत 70 वर्षों तक मतदान का अधिकार नहीं मिला था, पहली बार समान नागरिक के रूप में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सके।”

अनुच्छेद 370 हटने के बाद की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक, रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय उग्रवाद में तेज गिरावट है। विभिन्न रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा गया कि सीमा पार से फंडिंग के चलते कभी साप्ताहिक रूप से होने वाला पत्थरबाजी का चलन अब शून्य पर आ गया है।

रिपोर्ट में कहा गया, “हालांकि पाकिस्तान समर्थित ‘हाइब्रिड आतंकी’ अप्रैल 2025 के पहलगाम जैसे दुखद घटनाक्रमों के जरिए हताश कोशिशें करते रहे हैं, लेकिन स्थानीय युवाओं की आतंकी संगठनों में भर्ती ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। कश्मीरी युवा अब बंदूक नहीं, बल्कि लैपटॉप उठा रहे हैं।”

रिपोर्ट के अनुसार, श्रीनगर में स्टार्टअप इनक्यूबेटर और जम्मू के औद्योगिक क्षेत्र अब भविष्य की नई लड़ाई के मैदान हैं। पाकिस्तान की कट्टरपंथी एजेंडे को इस कदर खारिज किया जा चुका है कि दूरदराज के गांवों में भी लोग विदेशी घुसपैठियों की पहचान में सुरक्षा बलों का सहयोग कर रहे हैं। इसी शांति का नतीजा है कि 2024 में जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों की संख्या 2.3 करोड़ से अधिक पहुंच गई।

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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