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Explainer: ओमान में अमेरिका-ईरान की 'परमाणु' मुलाकात, क्या पिघलेगी दशकों की बर्फ?

Iran US relations: ईरान और अमेरिका के बीच रिश्ते हमेशा से एक पहेली की तरह रहे हैं. कभी दोस्ती के करीब, कभी दुश्मनी ये दोनों देश हमेशा झुलसते ही रहे हैं. आज 6 फरवरी 2026 को ओमान की राजधानी मस्कट में दोनों देशों के प्रतिनिधि मिल रहे हैं, जो 9 महीने बाद दोनों देशों के बीच पहली ऐसी बैठक है, जिसमें दोनों अपने भविष्य के रिश्तों के बारे में चर्चा करेंगे. जानकारी के अनुसार यह मुलाकात मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर केंद्रित है लेकिन इसके पीछे छिपे मुद्दे इतने गहरे हैं कि भविष्य की राह आसान नहीं लगती. आइए इन रिश्तों की जड़ों को समझते हैं, आज की बैठक के मायने जानते हैं और आगे क्या हो सकता है इस पर भी चर्चा करते हैं. 

रिश्तों की ऐतिहासिक जड़ें और अमेरिका-ईरान की दोस्ती व दुश्मनी 

ईरान और अमेरिका के संबंधों की शुरुआत 1950-60 के दशक में काफी मजबूत थी. अमेरिका ईरान के शाह मोहम्मद रेजा पहलवी का बड़ा समर्थक था जो तेल के कारोबार और कम्युनिस्ट प्रभाव रोकने में मददगार साबित होता था. लेकिन 1979 की इस्लामिक क्रांति ने सब उलट दिया. आयतोल्लाह खुमैनी के नेतृत्व में शाह को सत्ता से हटाया गया और अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर 52 अमेरिकियों को बंधक बना लिया गया . यह घटना 444 दिनों तक चली और इसने दोनों देशों के बीच गहरी दरार पैदा कर दी.

2015 में ओबामा प्रशासन ने JCPOA समझौता किया था 

1980 के दशक में इराक-ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका ने इराक का साथ दिया जिससे ईरान में अमेरिका विरोधी भावनाएं और मजबूत हुईं. 2000 के दशक में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर संदेह बढ़ा इस दौरान अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का मानना था कि ईरान गुपचुप तरीके से परमाणु हथियार बना रहा है जबकि ईरान हमेशा ही इसे शांतिपूर्ण ऊर्जा कार्यक्रम बताता रहा. 2015 में ओबामा प्रशासन ने JCPOA (जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन) समझौता किया, जिसमें ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने का वादा किया और बदले में अमेरिका ने प्रतिबंध हटाए. लेकिन 2018 में ट्रंप ने इस समझौते से अमेरिका को बाहर कर लिया और ईरान पर नए प्रतिबंध लगा दिए. बाइडेन ने इसे बहाल करने की कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली. अब ट्रंप की वापसी के साथ तनाव फिर चरम पर है.

दोनों देशों के बीच आज की मुख्य समस्याएं, क्या निकलेगा समाधान? 

दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद परमाणु कार्यक्रम पर है. ईरान का यूरेनियम संवर्द्धन (एनरिचमेंट) बड़ा मुद्दा है. अमेरिका चाहता है कि ईरान इसे पूरी तरह रोक दे या सीमित करे क्योंकि इससे हथियार बनने का खतरा है. लेकिन ईरान कहता है कि यह उसका अधिकार है और प्रतिबंध हटाने के बदले ही रियायत देगा. दूसरा मुद्दा है आर्थिक प्रतिबंध, अमेरिका के प्रतिबंधों से ईरान की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है. तेल निर्यात गिरा, मुद्रास्फीति बढ़ी, और जनता में असंतोष फैला. ईरान चाहता है कि ये प्रतिबंध हटें जबकि अमेरिका ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों पर रोक लगाना चाहता है.

आज की बैठक ने जागई उम्मीद की किरण, क्या सफल होगी बातचीत?

आज की मुलाकात ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ के बीच हो रही है. यह बैठक मूल रूप से इस्तांबुल में होनी थी, लेकिन ईरान ने ओमान को चुना है क्योंकि ओमान तटस्थ मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है. ईरान सिर्फ परमाणु और प्रतिबंधों पर बात करना चाहता है जबकि अमेरिका मिसाइल और प्रॉक्सी समूहों को भी शामिल करना चाहता है. इस बीच मिस्र, तुर्की और कतर ने एक फ्रेमवर्क सुझाया है जिसमें ईरान तीन साल तक यूरेनियम संवर्द्धन रोकने, स्टॉक ट्रांसफर करने और हथियार सप्लाई बंद करने पर विचार करे. बैठक के बाद यह तय होगा कि दोनों देशों के  रिश्तों में कोई बड़ा बदलाव आएगा या हालत पहले की तरह बने रहेंगे.
 

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क्यूबा की आशंकाओं को अमेरिका ने किया खारिज, राष्ट्रपति ट्रंप पर टिप्पणी को बताया गैरजरूरी

वाशिंगटन, 6 फरवरी (आईएएनएस)। व्हाइट हाउस ने अमेरिका-क्यूबा बातचीत को लेकर क्यूबा की तरफ से जताई गई आशंकाओं को खारिज कर दिया, और कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कूटनीति के लिए तैयार हैं और संकेत दिया कि बातचीत पहले ही शुरू हो चुकी है।

एक रिपोर्टर ने क्यूबा के नेता मिगुएल डियाज-कैनेल की टिप्पणियों का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि क्यूबा अमेरिका के साथ बातचीत बिना किसी दबाव, बिना किसी शर्त, बराबरी के आधार पर और संप्रभुता के सम्मान के साथ करेगा, जबकि उनकी सरकार ने ट्रंप के इस दावे को खारिज कर दिया कि बातचीत पहले से ही हो रही थी।

प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने हवाना को एक कड़ी चेतावनी देते हुए जवाब दिया। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि क्यूबा सरकार अपने आखिरी पड़ाव पर है और उसका देश गिरने वाला है, इसलिए उन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति के बारे में अपने बयानों में समझदारी दिखानी चाहिए।

लेविट ने फिर ट्रंप के रुख को दोहराया। उन्होंने कहा, लेकिन जैसा कि मैंने अभी दोहराया, राष्ट्रपति हमेशा कूटनीति में शामिल होने को तैयार रहते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि बातचीत अभी हो रही है। लेविट ने कहा, और मेरा मानना ​​है कि यह कुछ ऐसा है जो वास्तव में क्यूबा सरकार के साथ हो रहा है।

लेविट ने बातचीत के चैनल या एजेंडे के किसी भी विषय की पहचान नहीं बताई। उन्होंने डियाज-कैनेल की कोई शर्त नहीं की मांग पर भी कुछ नहीं कहा, सिवाय इसके कि ट्रंप कूटनीति का समर्थन करते हैं।

यह बातचीत एक व्यापक ब्रीफिंग के दौरान हुई जिसमें व्हाइट हाउस ने कई राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर बात की।

अमेरिका और क्यूबा के बीच लंबे समय से, अक्सर तनावपूर्ण संबंध रहे हैं, जो दशकों के प्रतिबंधों और बातचीत में समय-समय पर बदलावों से चिह्नित हैं। 2010 के दशक के मध्य में राजनयिक संबंध औपचारिक रूप से बहाल किए गए थे, लेकिन कई प्रतिबंध बने रहे, और अलग-अलग प्रशासनों में नीति में उतार-चढ़ाव होता रहा है।

क्यूबा के चल रहे आर्थिक तनाव और राजनीतिक दबावों ने प्रवासन से संबंधित समन्वय और सीमित राजनयिक जुड़ाव सहित द्विपक्षीय संपर्कों की गति और लहजे को बार-बार आकार दिया है।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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'एक बार हमारी बात तो सुन लो', जय शाह के सामने गिड़गिड़ा रहे पूर्व चीफ, आईसीसी के एक्शन के डर से पाकिस्तान की हालत खराब

Former PCB chief urged Jay Shah to visit Pakistan: पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के पूर्व चीफ एहसान मनी ने ICC चेयरमैन जय शाह से पाकिस्तान जाकर सरकार को 2026 टी20 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ बहिष्कार खत्म करने की अपील की है. 15 फरवरी को दोनों देशों के बीच श्रीलंका में ये मुकाबला खेला जाना है. Fri, 6 Feb 2026 11:12:27 +0530

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