सावधान! प्लैटिनम की आड़ में 'सोने के काले खेल' पर सरकार का सर्जिकल स्ट्राइक, आयात के नियम बदले
अगर आप प्लैटिनम आभूषणों के आयात या व्यापार से जुड़े हैं, तो सरकार की यह नई चेतावनी आपके लिए बेहद जरूरी है। देश के खजाने को चूना लगाने और सोने की तस्करी के लिए प्लैटिनम का 'कवच' इस्तेमाल करने वालों पर केंद्र सरकार ने बड़ा प्रहार किया है। अब तक 'मुक्त' श्रेणी में रहने वाले प्लैटिनम उत्पादों के आयात पर बृहस्पतिवार को तत्काल प्रभाव से पाबंदी लगा दी गई है। यह कदम उस "खतरनाक मिलावट" को रोकने के लिए उठाया गया है, जहाँ प्लैटिनम के बर्तनों और गहनों के भीतर सोना छिपाकर अवैध रूप से देश में लाया जा रहा था। सरकार की इस सख्ती का सीधा संदेश है-धातुओं के नाम पर धांधली अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना में कहा, “आईटीसी एचएस कोड 71141920 के अंतर्गत आने वाली वस्तुओं की आयात नीति को ‘मुक्त’ से बदलकर ‘अंकुश’ की श्रेणी में डाल दिया गया है।” इस एचएस कोड में प्लैटिनम से बने आभूषण एवं अन्य उत्पाद शामिल हैं। उद्योग से जुड़े एक विशेषज्ञ के मुताबिक, पहले प्लैटिनम मिश्रधातु (अलॉय) के रूप में सोने का आयात हो रहा था, जिसे सरकार ने पहले ही बंद कर दिया था। इसके बाद प्लैटिनम के उत्पादों में सोना मिलाकर आयात किए जाने का चलन सामने आया। उसे देखते हुए सरकार ने यह नया कदम उठाया है।
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आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में कीमती धातुओं या कीमती धातु से मढ़ी वस्तुओं का आयात बढ़कर 97.5 लाख डॉलर हो गया, जो 2023-24 की तुलना में लगभग दोगुना है। हालांकि, अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया है कि भारतीय मूल की वस्तुएं अगर प्रदर्शनियों, निर्यात संवर्धन दौरों, अस्वीकृत या लौटाई गई खेप, अथवा मरम्मत के लिए भेजी गई हों तो उनके दोबारा आयात की अनुमति दी जाएगी।
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सरकार ने पिछले वर्ष 99 प्रतिशत से कम शुद्धता वाली प्लैटिनम मिश्रधातु के आयात पर भी प्रतिबंध लगाया था, ताकि सोने और प्लैटिनम पर लागू शुल्क में अंतर का दुरुपयोग कर किए जा रहे अवैध आयात को रोका जा सके।
निवेश के नियमों में ढील: SEBI का REITs और InvITs को लिक्विड म्यूचुअल फंड में निवेश का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव
बाजार नियामक सेबी ने बृहस्पतिवार को रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट) और बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट (इनविट) के लिए ‘लिक्विड’ म्यूचुअल फंड योजनाओं में निवेश का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। मौजूदा पात्रता मानदंड निवेश विकल्पों को सीमित करते हैं। लिक्विड म्यूचुअल फंड एक प्रकार की निश्चित आय वाली (बॉन्ड) म्यूचुअल फंड योजना है जो बहुत ही अल्पकालिक मुद्रा बाजार निवेश उत्पादों में निवेश करता है। ये बचत खातों की तुलना में उच्च नकदी, पूंजी की सुरक्षा और बेहतर रिटर्न प्रदान करते हैं।
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वर्तमान में, ऐसे निवेश उच्च क्रेडिट जोखिम मूल्य और शीर्ष जोखिम वर्गीकरण वाली ‘लिक्विड’ योजनाओं तक ही सीमित हैं। ये प्रस्ताव रीट और इनविट में व्यापार करने में सुगमता लाने के लिए सेबी के प्रयासों का हिस्सा हैं। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कहा कि वह उचित सुरक्षा उपायों को बनाए रखते हुए रीट और इनविट के लिए अधिक निवेश मजबूती प्रदान करने को लेकर बदलावों पर गौर कर रहा है।
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सेबी ने अपने परामर्श पत्र में यह भी प्रस्ताव दिया है कि रियायती समझौतों की समाप्ति या निरस्तीकरण के बाद भी इनविट को विशेष उद्देश्यीय इकाइयों (एसपीपवी) में निवेश जारी रखने की अनुमति दी जाए। इसमें इस बात को स्वीकार किया गया कि वैधानिक, संविदात्मक, कर या मुकदमेबाजी संबंधी दायित्वों को पूरा करने के लिए ऐसी संस्थाओं का परिचालन में बनाये रखना आवश्यक हो सकता है।
सेबी ने इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए एसपीवी की परिमें संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इसमें एक निश्चित निकास या पुनर्निवेश समयसीमा और इनविटेशनल इन्वेस्टमेंट (इनविटेशनल इन्वेस्टमेंट) और एसपीवी दोनों स्तरों पर बेहतर खुलासे जैसी शर्तें शामिल हैं। नियामक ने इन प्रस्तावों पर 26 फरवरी तक संबंधित पक्षों से टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।
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