Jodhpur में Tarang Shakti 2026: वैश्विक एविएटर्स के साथ IAF Sarang का शानदार प्रदर्शन
भारतीय वायु सेना का मल्टीनेशनल एयर कॉम्बैट अभ्यास 'तरंग शक्ति 2026', 'पावर इन पार्टनरशिप' (साझेदारी में ताकत) थीम के साथ 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक एयर फ़ोर्स स्टेशन जोधपुर में चल रहा है। ANI से बात करते हुए, सारंग डिस्प्ले टीम के सदस्य स्क्वाड्रन लीडर गौतम त्यागी ने कहा कि तरंग शक्ति 2026 में हिस्सा लेना एक सम्मान और दुनिया भर के एविएटर्स और प्रोफेशनल्स के साथ आसमान साझा करने का एक मौका है। त्यागी ने कहा मैं सारंग डिस्प्ले टीम का सदस्य हूँ। तरंग शक्ति 2026 में हिस्सा लेना हमारे लिए बहुत सम्मान की बात है। इससे भी बड़ी बात यह है कि हमें दुनिया के बेहतरीन एविएटर्स और प्रोफेशनल्स के साथ आसमान साझा करने का मौका मिल रहा है। उन्होंने कहा कि टीम का मकसद विचारों के आदान-प्रदान और इंटरऑपरेबिलिटी के ज़रिए हिस्सा लेने वाले देशों के साथ जानकारी साझा करना और भरोसा बनाना है।
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उन्होंने ANI से कहा हमारा मकसद विचारों के आदान-प्रदान और इंटरऑपरेबिलिटी के ज़रिए हिस्सा लेने वाले देशों के साथ जानकारी साझा करना और भरोसा बनाना है। साथ ही, हम अच्छा प्रदर्शन करने और अपनी स्वदेशी क्षमता दिखाने की कोशिश करते हैं। सारंग डिस्प्ले टीम के कमांडिंग ऑफिसर और टीम लीडर, IAF ग्रुप कैप्टन अभिजीत कुमार ने कहा कि यह टीम भारतीय वायु सेना के प्रोफ़ेशनलिज़्म और एविएशन इंडस्ट्री में भारत की तरक्की को दिखाकर भारतीय वायु सेना के "ब्रांड एंबेसडर" के तौर पर काम करती है। ANI से बात करते हुए कुमार ने कहा हम खुद को भारतीय वायु सेना का ब्रांड एंबेसडर कहते हैं। हम पूरे भारत और दुनिया भर में प्रदर्शन करते हैं, जिसमें भारतीय वायु सेना का प्रोफ़ेशनलिज़्म और एविएशन इंडस्ट्री में भारत की तरक्की दिखाई जाती है, साथ ही युवाओं को करियर के तौर पर डिफेंस फ़ोर्स में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाता है।
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उन्होंने कहा कि सारंग टीम 2003 में तब बनाई गई थी जब देश में बने ALH हेलीकॉप्टर भारतीय वायु सेना में शामिल किए जा रहे थे। उन्होंने कहा यह टीम 2003 में बनी थी, जब देश में बने ALH हेलीकॉप्टर भारतीय वायु सेना में शामिल किए जा रहे थे। औपचारिक रूप से शामिल करने से पहले इन हेलीकॉप्टरों की क्षमताओं को परखने के लिए एक मूल्यांकन उड़ान (इवैल्यूएशन फ़्लाइट) आयोजित की गई थी। कुमार ने बताया कि बाद में यह विचार आया कि इस यूनिट को हेलीकॉप्टरों के प्रदर्शन करने और उनकी क्षमताओं को दिखाने का काम भी सौंपा जाए।
Polavaram Project पर रोक का आदेश स्थायी तौर पर हटे, Chandrababu Naidu ने केंद्र से की मांग
नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बृहस्पतिवार को पोलावरम परियोजना के संबंध में जारी ‘काम रोकने’ के आदेश को स्थायी रूप से वापस लेने की मांग की और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय से ओडिशा तथा छत्तीसगढ़ के साथ समन्वय कर लंबित जनसुनवाई की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, नायडू ने तीनों राज्यों के व्यापक हित में मुद्दे का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की अध्यक्षता में आंध्र प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाने का भी सुझाव दिया। बयान में कहा गया कि हालांकि ‘काम रोकने’ का आदेश फिलहाल स्थगित है, नायडू ने इसे स्थायी रूप से वापस लेने और तीनों मुख्यमंत्रियों से जनसुनवाई की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया।
नायडू ने यहां केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल से मुलाकात के दौरान ये सुझाव दिए। बैठक में मुख्यमंत्री ने पोलावरम परियोजना की प्रगति और हाल में 30,000 करोड़ रुपये की लागत से शुरू किए गए जल जीवन मिशन-अमरजीवी जलधारा के कार्यों का ब्योरा साझा किया। बयान के अनुसार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पोलावरम परियोजना के तहत ओडिशा और छत्तीसगढ़ में बनाए जाने वाले सुरक्षात्मक तटबंधों के लिए लंबित जनसुनवाई के संबंध में ‘काम रोकने’ का आदेश जारी किया था।
नायडू ने कहा कि तीनों राज्यों के व्यापक हित में आपसी सहयोग, समन्वय और देने-लेने की भावना से इस मुद्दे का सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि पोलावरम का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और लक्ष्य है कि परियोजना को पूरा कर 2027 के मध्य में होने वाले अगले गोदावरी पुष्करम तक इसे राष्ट्र को समर्पित कर दिया जाए। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से परियोजना के लिए धनराशि समय पर जारी करना सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया।
बयान के अनुसार, नायडू ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि पोलावरम में 41.15 मीटर के स्तर तक पानी रोकने के लिए जरूरी पुनर्वास और पुनर्स्थापन कार्यों में तेजी लाई जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विस्थापित परिवारों की समस्याओं के समाधान और राहत एवं पुनर्वास कार्यों को पूरा करने को परियोजना के निर्माण के समान प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से पोलावरम परियोजना के लिए धन की कमी नहीं होने देने का आग्रह किया।
दोनों नेताओं ने परियोजना में 45.72 मीटर के स्तर तक पानी रोकने के लिए आवश्यक उपायों और कार्यों पर भी चर्चा की। नायडू ने कहा कि गोदावरी का हजारों टीएमसी बाढ़ का पानी व्यर्थ बहकर समुद्र में चला जाता है और उन्होंने पट्टीसीमा परियोजना के जरिए इस पानी को मोड़ने तथा उसका उपयोग करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पोलावरम को एक प्रमुख पर्यटन और आध्यात्मिक गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रोद्दतूर में हाल में शुरू किए गए जल जीवन मिशन-अमरजीवी जलधारा के कार्यों का जिक्र करते हुए नायडू ने कहा कि आंध्र प्रदेश में करीब 95 लाख ग्रामीण परिवार हैं, जिनमें से 62 लाख परिवारों को पहले ही नल से जल की सुविधा मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि हाल में 27 लाख और ग्रामीण परिवारों को पेयजल कनेक्शन उपलब्ध कराने के कार्यों का शिलान्यास किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इन कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और केंद्रीय मंत्री से कार्यों की प्रगति के अनुरूप धनराशि जल्द जारी करने का आग्रह किया।
बैठक के दौरान नायडू ने दक्षिणी राज्यों में नदियों को आपस में जोड़ने से होने वाले लाभों पर भी चर्चा की।
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