Fake Website Scam: ऑनलाइन ठगी से बचना है तो URL जरूर चेक करें, इन संकेतों से पहचानें फर्जी वेबसाइट
Fake Website Scam: आज के समय में ऑनलाइन शॉपिंग, बिजली-पानी का बिल भरना, टिकट बुक करना और बैंकिंग जैसे काम हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके। जैसे-जैसे लोग डिजिटल दुनिया पर निर्भर हो रहे हैं, वैसे-वैसे साइबर ठग भी लोगों को फंसाने के नए तरीके खोज रहे हैं। फर्जी वेबसाइट बनाना इनमें से एक आम तरीका है।
ये वेबसाइट देखने में बिल्कुल असली लग सकती। इनमें कंपनी का लोगो, रंग और वेबसाइट का डिजाइन तक असली वेबसाइट जैसा होता, लेकिन जैसे ही कोई व्यक्ति इन पर अपनी बैंकिंग डिटेल, कार्ड की जानकारी या पासवर्ड डालता, उसकी निजी और वित्तीय जानकारी साइबर अपराधियों के हाथ लग सकती।
फर्जी वेबसाइट को कैसे पहचानें?
फर्जी वेबसाइट पहचानने का सबसे पहला और आसान तरीका उसका वेब एड्रेस यानी यूआरएल चेक करना। साइबर ठग अक्सर असली वेबसाइट से मिलते-जुलते यूआरएल बनाते। इसमें किसी एक अक्षर को बदल दिया जाता, कोई अतिरिक्त अक्षर जोड़ दिया जाता या डोमेन एक्सटेंशन अलग कर दिया जाता। जल्दबाजी में लोग इन छोटे बदलावों को नजरअंदाज कर देते और यही गलती उन्हें महंगी पड़ सकती।
पैडलॉक आइकन के भरोसे नहीं रहें
कई लोगों को लगता है कि वेबसाइट के एड्रेस के पास दिखने वाला पैडलॉक आइकन यानी ताले का निशान वेबसाइट के असली होने की गारंटी है। ऐसा नहीं है। यह निशान सिर्फ यह बताता है कि वेबसाइट और आपके डिवाइस के बीच डेटा का कनेक्शन एन्क्रिप्टेड है। इससे यह साबित नहीं होता कि वेबसाइट असली है। फर्जी या फिशिंग वेबसाइट भी HTTPS और पैडलॉक का इस्तेमाल कर सकती। इसलिए वेबसाइट का सही यूआरएल जांचना ज्यादा जरूरी।
साइबर ठग लोगों को जल्दी फैसला लेने के लिए डर या लालच का सहारा भी लेते। उदाहरण के लिए, किसी मैसेज में कहा जा सकता है कि केवायसी अपडेट नहीं करने पर बैंक अकाउंट बंद हो जाएगा या किसी शॉपिंग वेबसाइट पर भारी डिस्काउंट सिर्फ कुछ मिनट के लिए उपलब्ध। ऐसे संदेशों का मकसद आपको सोचने का समय दिए बिना लिंक पर क्लिक करवाना होता।
फर्जी वेबसाइट पहचानने के लिए इन संकेतों पर ध्यान दें-
- URL में मामूली बदलाव या अजीब डोमेन नाम।
- वेबसाइट पर स्पेलिंग और ग्रामर की गलतियां।
- खराब क्वालिटी की तस्वीरें या डिजाइन।
- संपर्क की जानकारी का उपलब्ध न होना।
- वेबसाइट के कई पेज का काम न करना या अधूरा होना।
- जरूरत से ज्यादा जल्दबाजी, डर या लालच पैदा करने वाले ऑफर।
अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें
बैंकिंग या पेमेंट से जुड़े काम के लिए सोशल मीडिया, एसएमएस, व्हाट्सऐप या ईमेल में आए अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए। बैंक की वेबसाइट का पता खुद टाइप करें या आधिकारिक मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करें। किसी नई ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट से खरीदारी करने से पहले उसके रिव्यू देखें और यह भी जांचें कि कंपनी या कारोबार वास्तव में मौजूद है या नहीं।
अगर गलती से किसी फर्जी वेबसाइट पर कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी डाल दी, तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। जरूरत पड़ने पर कार्ड ब्लॉक कराएं और पासवर्ड बदल दें। अगर पैसे ट्रांसफर हो चुके हैं, तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज कराएं।
फर्जी वेबसाइट अब पहले से ज्यादा असली दिखने लगी हैं। इसलिए सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले कुछ सेकंड रुककर URL जांचें। खासकर बैंकिंग और निजी जानकारी से जुड़े मामलों में जल्दबाजी से बचना ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।
(प्रियंका कुमारी)
Health Insurance: इंश्योरेंस कवर होने पर भी पूरा इलाज खर्च क्यों नहीं मिलता? जानिए सब-लिमिट का खेल
Health Insurance: हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय ज्यादातर लोग सबसे पहले यह देखते हैं कि उन्हें कितने लाख रुपये का बीमा कवर मिल रहा और इसके लिए कितना प्रीमियम देना होगा, लेकिन सिर्फ बड़ा सम इंश्योर्ड होना ही काफी नहीं। कई बार पॉलिसी में मौजूद सब-लिमिट क्लॉज के कारण सर्जरी या अस्पताल के कुछ खर्चों का पूरा भुगतान नहीं हो पाता। ऐसे में मरीज को अपनी जेब से भी बड़ी रकम खर्च करनी पड़ सकती।
सब-लिमिट का मतलब किसी खास इलाज, बीमारी, सर्जरी या अस्पताल से जुड़े खर्च के लिए तय की गई अधिकतम भुगतान सीमा से है। यानी आपकी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का कुल कवर भले ही 10 लाख या 20 लाख रुपये हो, लेकिन किसी खास सर्जरी या इलाज के लिए बीमा कंपनी ने अलग से कम सीमा तय कर रखी तो उस खर्च पर पूरी बीमा राशि का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
सब-लिमिट क्लॉज की जानकारी होना जरूरी
मसलन, अगर आपकी पॉलिसी का सम इंश्योर्ड 10 लाख रुपये है, लेकिन किसी खास सर्जरी के लिए सब-लिमिट 2 लाख रुपये तय है और इलाज का खर्च 4 लाख रुपये आता, तो बीमा कंपनी पॉलिसी की शर्तों के मुताबिक सिर्फ 2 लाख रुपये तक का भुगतान कर सकती। बाकी रकम मरीज को खुद चुकानी पड़ सकती है।
सर्जरी के अलावा इन खर्चों पर भी हो सकती है सीमा
सब-लिमिट सिर्फ सर्जरी तक सीमित नहीं होती। कई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में अलग-अलग खर्चों पर भी सीमाएं तय हो सकती। इसलिए पॉलिसी खरीदते या रिन्यू कराते समय इन बातों की जांच जरूर करनी चाहिए-
- सर्जरी और कुछ खास प्रक्रियाओं पर सब-लिमिट
- अस्पताल के कमरे के किराए की सीमा
- ICU चार्ज पर तय सीमा
- कुछ विशेष बीमारियों के इलाज पर भुगतान की सीमा
- अस्पताल से जुड़े अन्य खर्चों पर निर्धारित लिमिट
- रूम रेंट की सीमा भी बढ़ा सकती है जेब का बोझ
रूम रेंट की सीमा भी क्लेम को प्रभावित करती
पॉलिसी में रूम रेंट की सीमा भी क्लेम की रकम को प्रभावित कर सकती। अगर बीमाधारक पॉलिसी में तय सीमा से महंगा कमरा चुनता, तो कई मामलों में सिर्फ कमरे के किराए पर ही नहीं, बल्कि अस्पताल के दूसरे संबंधित खर्चों पर भी अनुपातिक कटौती हो सकती। ऐसे में कुल अस्पताल बिल का एक बड़ा हिस्सा मरीज को अपनी जेब से देना पड़ सकता।
पॉलिसी खरीदते समय इन शर्तों को जरूर पढ़ें
अक्सर सब-लिमिट की जानकारी पॉलिसी के दस्तावेजों में साफ तौर पर दी होती है, लेकिन ग्राहक कम प्रीमियम और ज्यादा सम इंश्योर्ड पर ध्यान देने के कारण इन शर्तों को नजरअंदाज कर देते। यही वजह है कि समान सम इंश्योर्ड वाली दो हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों से मिलने वाला वास्तविक क्लेम कवर अलग-अलग हो सकता।
अगर आपकी मौजूदा पॉलिसी में बहुत ज्यादा सब-लिमिट हैं, तो रिन्यूअल के समय दूसरी पॉलिसियों की तुलना करना बेहतर हो सकता। आजकल कई हेल्थ इंश्योरेंस प्लान व्यापक कवरेज और कम प्रतिबंधों के साथ उपलब्ध हैं। हालांकि इनके लिए प्रीमियम अधिक हो सकता है। इसलिए पॉलिसी चुनते समय सिर्फ कम प्रीमियम नहीं, बल्कि जरूरत के समय मिलने वाली वास्तविक कवरेज को तरजीह देनी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: हेल्थ इंश्योरेंस के तहत सब-लिमिट से आप क्या समझते?
जवाब: इसका मतलब है टोटल सम इंश्योर्ड के तहत कुछ मेडिकल बिल के लिए तय लिमिट।
सवाल: क्या ज़्यादा सम इंश्योर्ड होने पर क्लेम के लिए पेमेंट बढ़ जाएगा?
जवाब: ज़रूरी नहीं है, क्योंकि ज़्यादा सम इंश्योर्ड होने के बावजूद सब-लिमिट और रूम लिमिट आपके क्लेम को कम कर देंगे।
सवाल: मुझे सब-लिमिट के बारे में जानकारी कहां दिखेगी?
जवाब: इंश्योरेंस की शर्तों, बेनिफिट्स और कंडीशंस में।
(प्रियंका कुमारी)
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