HDFC Bank Share Price: 7 कारोबारी सेशन में 10% टूटा शेयर, जानिए क्यों गिर रहा स्टॉक और आगे क्या उम्मीद
HDFC Bank Share Price: देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक एचडीएफसी के शेयरों में लगातार 7 कारोबारी सेशन से गिरावट देखने को मिल रही। इस दौरान बैंक का शेयर करीब 10 फीसदी तक टूटकर 741 रुपये के आसपास पहुंच गया, जो इसके 52 हफ्तों के निचले स्तर के करीब है।
जून तिमाही के नतीजों के बाद निवेशक बैंक की कमाई और मार्जिन को लेकर नए सिरे से आकलन कर रहे। हालांकि बैंक ने मुनाफे और लोन ग्रोथ के मोर्चे पर स्थिर प्रदर्शन किया है। लेकिन उम्मीद से धीमी नेट इंटरेस्ट इनकम ग्रोथ और नेट इंटरेस्ट मार्जिन में सुधार नहीं होने से शेयर पर दबाव बना हुआ है।
क्यों एचडीएफसी बैंक का शेयर गिर रहा?
जून तिमाही में बैंक का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स 5 फीसदी बढ़कर 19060 करोड़ रुपये रहा। वहीं बैंक के एडवांस यानी लोन में 15.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके बावजूद एनआईआई की ग्रोथ करीब 7 फीसदी रही, जो बाजार की उम्मीद से कम थी। बैंक का एनआईएम भी 3.26 फीसदी पर स्थिर रहा। बाजार के जानकारों का मानना है कि यही आंकड़ा निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता बन गया।
जून तिमाही के नतीजे से गिरा एचडीएफसी बैंक
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एचडीएफसी बैंक के शेयर में लगातार सात दिनों की गिरावट को बाजार की ओर से जून तिमाही के नतीजों पर दिया गया फैसला माना जा सकता। उनके अनुसार, यह गिरावट बैंक के कारोबार की गुणवत्ता को लेकर नहीं, बल्कि कमाई में सुधार की टाइमिंग को लेकर है। मर्जर के बाद निवेशकों को उम्मीद थी कि बैंक के प्रॉफिट मार्जिन में तेजी से सुधार होगा। लेकिन एनआईएम का 3.26 फीसदी पर स्थिर रहना बताता है कि यह प्रोसेस उम्मीद से ज्यादा समय ले रही है।
एचडीएफसी बैंक के शेयर पर दबाव की प्रमुख वजहें-
- एनआईआई ग्रोथ उम्मीद से कम रहना।
- एनआईएम में सुधार नहीं होना।
- मर्जर के बाद मार्जिन विस्तार में देरी।
- निवेशकों की कमाई में तेज सुधार की उम्मीद पूरी न होना।
- शेयर का 5-दिन से लेकर 200-दिन के प्रमुख मूविंग एवरेज से नीचे कारोबार करना।
यह गिरावट पूरे बैंकिंग सेक्टर में कमजोरी का संकेत नहीं है। आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक समेत अन्य बड़े प्राइवेट बैंकों का प्रदर्शन बेहतर रहा है। इसलिए एचडीएफसी बैंक का कमजोर प्रदर्शन एक अलग स्टॉक से जुड़ा मामला है। हालांकि बैंक का डिपॉजिट बेस और मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क अब भी इसकी बड़ी ताकत हैं।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा गिरावट को संभावित खरीदारी के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन नई खरीदारी से पहले कुछ संकेतों का इंतजार करना बेहतर होगा। इनमें दूसरी तिमाही में एनआईएम में साफ सुधार या शेयर की कीमत में मजबूत बेस बनना शामिल है।
जब तक इनमें से कोई संकेत नहीं मिलता, शेयर में गिरावट का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता। हालांकि मौजूदा स्तरों पर लंबी अवधि के निवेशकों के लिए रिस्क-रिवॉर्ड पहले की तुलना में आकर्षक होता दिख रहा।
(प्रियंका कुमारी)
Health Insurance Claim Rejection: इन 5 गलतियों की वजह से खारिज हो सकता आपका हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम
Health Insurance Claim Rejection: हेल्थ इंश्योरेंस खरीदना सिर्फ पहला कदम है। असली परीक्षा तब होती है, जब इलाज के लिए पॉलिसी का इस्तेमाल करने और क्लेम लेने की जरूरत पड़ती। कई बार पॉलिसी होने के बावजूद क्लेम का भुगतान नहीं हो पाता। इसकी वजह हमेशा यह नहीं होती कि बीमा कंपनी भुगतान नहीं करना चाहती।
कई मामलों में इलाज पॉलिसी की शर्तों के तहत कवर नहीं होता या पॉलिसी खरीदते समय जरूरी जानकारी सही तरीके से नहीं दी गई होती। ऐसे में कुछ सामान्य गलतियों से बचकर क्लेम रिजेक्शन की आशंका कम की जा सकती।
मेडिकल हिस्ट्री छिपाना
क्लेम रिजेक्ट होने की सबसे बड़ी वजहों में से एक मेडिकल हिस्ट्री की सही जानकारी नहीं देना। कुछ लोग प्रीमियम बढ़ने या पॉलिसी न मिलने के डर से अपनी पुरानी बीमारी या इलाज की जानकारी छिपा लेते। कई बार लोग यह भी सोचते हैं कि कोई बीमारी इतनी अहम नहीं है कि उसका जिक्र किया जाए। लेकिन बाद में बीमा कंपनी को प्री-एग्जिस्टिंग डिजीज या पुराने इलाज की जानकारी मिलने पर क्लेम खारिज हो सकता। इसलिए पॉलिसी खरीदते समय अपनी मेडिकल हिस्ट्री की सही जानकारी देना हमेशा बेहतर।
वेटिंग पीरियड पूरा होने से पहले क्लेम करना
हेल्थ इंश्योरेंस में कई बीमारियों और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के लिए वेटिंग पीरियड होता। पॉलिसी एक्टिव होने के बावजूद हर बीमारी का इलाज तुरंत कवर नहीं होता। अगर वेटिंग पीरियड पूरा होने से पहले संबंधित बीमारी के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है, तो क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।
पॉलिसी में शामिल न होने वाले इलाज का खर्च
हर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में कुछ एक्सक्लूजन होते हैं। इनमें पॉलिसी के अनुसार कॉस्मेटिक सर्जरी, एक्सपेरिमेंटल ट्रीटमेंट, फर्टिलिटी से जुड़े कुछ इलाज और कुछ गैर-चिकित्सीय खर्च शामिल हो सकते हैं। इसलिए पॉलिसी की एक्सक्लूजन लिस्ट पहले ही पढ़ना जरूरी है।
दस्तावेजों में गलती या कमी
अधूरे क्लेम फॉर्म, गलत जानकारी या जरूरी दस्तावेज समय पर जमा न करने से भी परेशानी हो सकती है। डिस्चार्ज समरी, अस्पताल के बिल, डॉक्टर की पर्ची और डायग्नोस्टिक रिपोर्ट जैसे दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए।
नेटवर्क अस्पताल और प्री-ऑथराइजेशन की अनदेखी
कैशलेस इलाज के लिए अस्पताल का बीमा कंपनी के नेटवर्क में होना जरूरी हो सकता। कुछ प्रक्रियाओं के लिए इलाज से पहले बीमा कंपनी की मंजूरी भी जरूरी होती है। इन शर्तों को पूरा नहीं करने पर कैशलेस क्लेम में दिक्कत आ सकती है।
अगर क्लेम रिजेक्ट हो जाए और आपको लगे कि फैसला गलत है, तो बीमा कंपनी को लिखित में शिकायत दें और पॉलिसी की शर्तों की दोबारा जांच करें। समाधान न मिलने पर कंपनी के ग्रिवांस रिड्रेसल सेल से संपर्क किया जा सकता है।
हेल्थ इंश्योरेंस का फायदा तभी सही तरीके से मिलता है, जब पॉलिसी की शर्तों को पहले से समझा जाए, मेडिकल जानकारी ईमानदारी से दी जाए और जरूरी दस्तावेज व्यवस्थित रखे जाएं।
(प्रियंका कुमारी)
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