'मोबाइल फोन अब सिर्फ बातचीत का माध्यम नहीं, गवर्नेंस-डिजिटल सेवाओं का महत्वपूर्ण टूल बन गया', इंडिया मोबाइल कांग्रेस के उद्घाटन पर बोले पीएम मोदी
PM Modi Inauguration of India Mobile Congress: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 का उद्घाटन किया. IMC का यह 10वां एडिशन है और इस बार यह टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम से जुड़े देश के प्रमुख आयोजनों में शामिल है. कार्यक्रम का आयोजन 7 से 10 अक्टूबर तक किया जा रहा है.
उद्घाटन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में मोबाइल फोन सिर्फ बातचीत का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह गवर्नेंस और डिजिटल सेवाओं का महत्वपूर्ण टूल बन गया है. उन्होंने कहा कि मोबाइल और डिजिटल तकनीक ने ‘डिजिटल इंडिया’ को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है. इसकी मदद से दूरदराज के गांवों में रहने वाले और गरीब परिवारों के बच्चे भी शिक्षा समेत कई जरूरी सेवाओं का लाभ उठा पा रहे हैं.
LIVE: PM Narendra Modi inaugurates the 10th edition of the India Mobile Congress (IMC) | Speech | Delhi
— ANI (@ANI) October 8, 2026
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भारतीय वायु सेना दिवस को भी किया याद
पीएम मोदी ने कहा कि आज, 8 अक्टूबर, भारत के लिए एक खास दिन है क्योंकि हम इसे भारतीय वायु सेना दिवस के रूप में मनाते हैं. मैं वायु सेना दिवस पर देशवासियों को बधाई देता हूं. कहा कि कल, सरकार के प्रमुख के तौर पर मेरे कार्यकाल के 25 साल पूरे हुए. मैं भारत के हर नागरिक और दोस्त का उनकी शुभकामनाओं के लिए आभार व्यक्त करता हूं.
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य ने बताया टारगेट
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम सिंधिया ने कहा कि इस साल की थीम दिखाती है कि हमने कितना लंबा सफर तय किया है. कहा कि मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि भारत के 'भारत 6G एलायंस' ने देश में 7,700 और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 4,400 पेटेंट हासिल किए हैं. हमारा लक्ष्य स्टैंडर्ड तय करने वाली टेबल पर अपनी जगह बनाना है. 4G के मामले में हम दुनिया से पीछे थे. 5G में हम दुनिया के साथ-साथ चले. लेकिन हमारा संकल्प है कि 6G में हम दुनिया का नेतृत्व करेंगे.
नाना पाटेकर की आवाज इतनी अलग क्यों थी? गुस्सा नहीं, ये 5 चीजें बनाती थीं उनके डायलॉग को यादगार
Nana Patekar Dialogue: नाना पाटेकर के निधन के बाद उनके डायलॉग एक बार फिर सोशल मीडिया पर गूंज रहे हैं. सवाल उठ रहा है कि आखिर उनकी आवाज और बोलने का तरीका बाकी कलाकारों से इतना अलग क्यों लगता था. फिल्म जानकारों और उनके करियर पर आई रिपोर्टों को खंगालें तो इसकी वजह सिर्फ तेज आवाज या गुस्सा नहीं, बल्कि कुछ खास आदतें और उनकी पूरी पृष्ठभूमि नजर आती है.
क्या नाना पाटेकर सिर्फ गुस्से की वजह से याद किए जाते हैं?
नाना में गुस्सा नहीं था बल्कि उनके कई यादगार किरदार तेज आवाज वाले जरूर थे, लेकिन उनके अभिनय की पहचान गुस्से से ज्यादा संवाद को बरतने के तरीके से बनी. रिपोर्टों में भी कहा गया है कि वे संवाद को सिर्फ बोलते नहीं थे, बल्कि आवाज, ठहराव, चेहरे के भाव और बॉडी लैंग्वेज के जरिए किरदार के मन की हालत सामने रखते थे.
क्या नाना शब्दों से ज्यादा खामोशी का इस्तेमाल करते थे?
यह उनकी शैली की सबसे बड़ी पहचान मानी जाती है. लाइन बोलने के बाद रुक जाना और सामने वाले को उस खामोशी में बेचैन छोड़ देना, इससे अगला शब्द कहीं ज्यादा भारी लगता था. संवाद के बीच का यही ठहराव दर्शकों को बांधे रखता था.
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