बांग्लादेश: पहले 'महिला विरोधी' टिप्पणियां अब अधिकारों की रक्षा का वादा, जमात चीफ क्या बदल रहे स्टैंड?
ढाका, 5 फरवरी (आईएएनएस)। महिलाओं पर विवादित बयानों को लेकर घिरे सियासी पार्टी जमात-ए-इस्लामी प्रमुख शफीकुर रहमान ने नरम रुख अख्तियार कर लिया है। अब दावा किया है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा की रक्षा करना उनकी प्राथमिकताओं में से एक होगा।
स्थानीय मीडिया ने रहमान के इस नरम रवैए को रिपोर्ट किया है। रहमान ने शनिवार शाम सोशल मीडिया पर कथित तौर पर महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने अपने पोस्ट में पब्लिक लाइफ में महिलाओं की भागीदारी की आलोचना करते हुए कामकाजी महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी की और इसे नैतिक पतन का कारण बताया था।
इन टिप्पणियों की राजनीतिक और सामाजिक हलकों ने काफी निंदा की थी।
अपनी पूर्व की पोस्ट से इतर, कुरीग्राम जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए, रहमान ने महिला मतदाताओं को भरोसा दिलाने की कोशिश की और उनकी सुरक्षा के प्रति पार्टी के दृढ़ संकल्प की बात कही।
बांग्लादेश के प्रमुख अखबार, द डेली स्टार ने रहमान के हवाले से कहा, हम आपके घरों में, सड़कों पर, काम करने की जगहों पर, और हर जगह, हर तरह से आपकी 100 प्रतिशत सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करेंगे।
उन्होंने अपने लहजे में नरमी लाते हुए सुरक्षित समाज की कल्पना पेश करते हुए कहा, जिस देश में माताएं सुरक्षित नहीं हैं, वह कभी मेरा देश नहीं हो सकता। बल्कि, मेरा देश वह होगा जहां मेरी माताओं, बहनों और बेटियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जाएगा। डरो मत, तुम लड़ते रहोगे, और दूसरों की आंखों में आंखें डालकर बात करोगे। यह बांग्लादेश लोगों का देश होगा।
रैली के दौरान, रहमान ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) पर भी परोक्ष रूप से निशाना साधा, आरोप लगाया कि उनके सोशल मीडिया अकाउंट के कथित हैकिंग के बाद एक राजनीतिक पार्टी उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रही है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस हफ्ते की शुरुआत में, बीएनपी चेयरमैन तारिक रहमान ने महिलाओं पर की गई टिप्पणियों को लेकर जमात नेता पर तगड़ा वार किया और चेतावनी दी कि ऐसे विचार देश में महिलाओं की सुरक्षा और मौलिक अधिकारों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।
बांग्लादेश के बंगाली दैनिक बोनिक बार्ता ने बीएनपी नेता के एक रैली में दिए बयान के हवाले से कहा, जो लोग देश की महिलाओं का अनादर करते हैं और उनके लिए अपशब्द का इस्तेमाल करते हैं, वे देशभक्त या लोगों के हितैषी नहीं हो सकते। एक राजनीतिक पार्टी चुनाव से पहले माताओं और बहनों को उनके घरों में कैद करना चाहती है। वे उनके रोजगार के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां करते हैं। जो लोग अपनी महिलाओं का सम्मान नहीं कर सकते, उनसे देश के लोग सुरक्षित नहीं हैं।
इस विवाद को जमात की महिला विंग की महासचिव नूरुन्निसा सिद्दिका के पहले के बयानों से और हवा मिली है, जिन्होंने कहा था कि महिलाएं पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्व पद पर नहीं रह सकतीं। उन्होंने कहा था कि पार्टी इस्लामिक सिद्धांतों का पालन करती है और यह महिलाओं को अमीर के रूप में काम करने की अनुमति नहीं देता है।
महिलाओं के नेतृत्व पर सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, पवित्र कुरान में अल्लाह ने कहा है कि पुरुष महिलाओं के संरक्षक हैं। हमने ईमान स्वीकार करते समय इसे मान लिया था। इसलिए महिलाओं का शीर्ष नेतृत्व में होना महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि महिलाओं के अधिकारों को लागू किया जा रहा है या नहीं।
--आईएएनएस
केआर/
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US-India Deal के बाद क्या रूस से तेल खरीदेगा भारत? जानें विदेश मंत्रालय ने क्या दिया जवाब
US-India Deal: वेनेजुएला और रूस से तेल खरीद को लेकर चल रही अटकलों के बीच भारत सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि देश के 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इसी को ध्यान में रखकर सभी फैसले लिए जा रहे हैं. दरअसल ट्रंप ने भारत के साथ समझौते के बाद दावा किया था कि अब भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा. जानिए इस सवाल के जवाब पर विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय का बयान, अटकलों पर विराम
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने इस मुद्दे पर पहले भी कई बार अपना पक्ष सार्वजनिक रूप से रखा है. उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर तेजी से बदलते हालात और बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए व्यावहारिक और संतुलित दृष्टिकोण अपना रहा है.
ऊर्जा स्रोतों में विविधता भारत की रणनीति
रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत की नीति का मुख्य आधार डाइवर्सिफिकेशन ऑफ एनर्जी सोर्सेज है. यानी किसी एक देश या क्षेत्र पर निर्भर रहने के बजाय भारत अलग-अलग देशों से तेल और गैस आयात करता है. इससे न केवल आपूर्ति बाधित होने का खतरा कम होता है, बल्कि कीमतों में अस्थिरता का असर भी सीमित रहता है.
Delhi | Responding to ANI's question about President Trump’s claim that India has agreed to stop buying Russian oil and shift to buying crude from the United States and possibly Venezuela, MEA Spokesperson Randhir Jaiswal says, "The government has stated publicly on several… pic.twitter.com/QSZdp9UeYL
— ANI (@ANI) February 5, 2026
वैश्विक हालात के अनुसार फैसले
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत अपने फैसले ऑब्जेक्टिव मार्केट कंडीशंस और बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल को ध्यान में रखते हुए करता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी देश के साथ ऊर्जा सहयोग को राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक जरूरतों के आधार पर देखती है.
भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जहां ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है. उद्योग, परिवहन और घरेलू जरूरतों के लिए स्थिर और किफायती ऊर्जा आपूर्ति जरूरी है. ऐसे में भारत के लिए तेल आयात से जुड़े फैसले लंबी अवधि की जरूरतों को ध्यान में रखकर किए जाते हैं.
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