दृश्यम-3 ने 2 दिन में कमाए 177 करोड़:सलमान खान की 'सिकंदर' का रिकॉर्ड तोड़ा; 2015 में आई पहली दृश्यम को भी पीछे छोड़ा
अजय देवगन स्टारर फिल्म 'दृश्यम 3' (दृश्यम: द कंक्लूजन) ने बॉक्स ऑफिस पर मजबूत शुरुआत की है। रिलीज के शुरुआती दो दिनों में ही फिल्म ने दुनियाभर में 177 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है। इसके साथ ही यह फिल्म इस साल की टॉप 10 सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्मों की लिस्ट में शामिल हो गई है। घरेलू बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने दो दिनों में 115.50 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया है। वहीं, 'दृश्यम 3' के थिएटर्स में आने से पहले से चल रही फिल्म 'हनुमान अंश' की कमाई की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है। दूसरे दिन भारत में कमाए 53.50 करोड़ रुपए ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2 अक्टूबर को रिलीज हुई फिल्म 'दृश्यम 3' की एडवांस बुकिंग 50 करोड़ रुपए से ज्यादा की रही थी। फिल्म ने पहले दिन शुक्रवार को दुनियाभर में 93 करोड़ रुपए का कलेक्शन दर्ज किया था। दूसरे दिन शनिवार को भी फिल्म की अच्छी पकड़ बनी रही। भारत में शनिवार को फिल्म ने 53.50 करोड़ रुपए का नेट बिजनेस किया, जबकि शुक्रवार को 62 करोड़ रुपए की कमाई हुई थी। दो दिनों में फिल्म का भारत में कुल ग्रॉस कलेक्शन 138.60 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। सलमान की 'सिकंदर' और पहली 'दृश्यम' का रिकॉर्ड टूटा 'दृश्यम 3' की दो दिनों की कमाई ने कई बड़ी फिल्मों के लाइफटाइम कलेक्शन को पीछे छोड़ दिया है। फिल्म ने सलमान खान की 'सिकंदर' के 176 करोड़ रुपए के कुल कलेक्शन का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इसके साथ ही फिल्म ने साल 2015 में रिलीज हुई फ्रैंचाइजी की पहली फिल्म 'दृश्यम' के 107 करोड़ रुपए के लाइफटाइम बिजनेस को भी शनिवार सुबह पार कर लिया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में फिल्म ने अब तक 4 मिलियन डॉलर (करीब 33 करोड़ रुपए) का कारोबार किया है। फिल्म में पुरानी स्टारकास्ट के साथ नए चेहरे भी शामिल अभिषेक पाठक के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी 2 अक्टूबर के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में अजय देवगन (विजय सालगांवकर), तबू, श्रिया सरन, रजत कपूर, इशिता दत्ता, मृणाल जाधव और कमलेश सावंत अपने पुराने किरदारों में लौटे हैं। फिल्म में सौरभ शुक्ला का कैमियो रोल है। वहीं, इस तीसरे पार्ट में जयदीप अहलावत और प्रकाश राज नए किरदारों के रूप में फ्रैंचाइजी से जुड़े हैं। 'दृश्यम 3' के आने से 'हनुमान अंश' का कलेक्शन घटा सैकनिल्क की रिपोर्ट के अनुसार, 58 दिनों से सिनेमाघरों में चल रही फिल्म 'हनुमान अंश' की कमाई में गिरावट आई है। 58वें दिन फिल्म ने 1.59 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया। 9वें वीकेंड में 'दृश्यम 3' के आने से 'हनुमान अंश' की स्क्रीन और शोज प्रभावित हुए हैं। हालांकि, धीमी शुरुआत के बाद मजबूत वर्ड ऑफ माउथ से इस फिल्म ने अब तक भारत में 321.22 करोड़ रुपए का नेट और 379.39 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है।
लहर-लहर:सही नजरिया... इंसान हो या समुदाय, खुले मन से देखिए, किसी धारणा से नहीं
अक्सर लोग पूछते हैं कि नैतिकता के क्या मायने हैं? जबकि असली सवाल यह है कि नैतिकता को लेकर आपका नजरिया क्या है और उसका आधार क्या है? क्या आप किसी बात को इसलिए सही मानते हैं, क्योंकि उसमें आपका फायदा, तरक्की और भला है? या आप यह भी देख सकते हैं कि असल में सही क्या है? मान लीजिए, दो लोगों के बीच कोई विवाद है। ऐसे में अगर आप अपने आपको दोनों से थोड़ा अलग करके, एक तीसरे व्यक्ति की तरह उस स्थिति को देख सकें- न अपने पक्ष में, न सामने वाले के पक्ष में- और केवल यह तय करने की कोशिश करें कि सही क्या है, तो वहीं से नैतिकता की शुरुआत होती है। फिर वह बात आपके फायदे में हो या नुकसान में, अगर आपको लगता है कि यही सही और सच्ची बात है, तो उसे कहना और उसके साथ खड़ा होना जरूरी है। आज हम इसे बहुत बड़ा नैतिक काम मानने लगे हैं। जबकि हर व्यक्ति में इतनी क्षमता होनी चाहिए कि वह अपने हित से ऊपर उठकर सही और गलत को देख सके। स्त्री-पुरुष के संबंधों में नैतिकता की बात भी इसी संदर्भ में समझनी चाहिए। अगर आप पुरुष हैं, तो सबसे पहले यह समझिए कि स्त्री भी उतनी ही इंसान है, जितने आप हैं। ज़िंदगी पर उसका उतना ही अधिकार है, जितना आपका। आप दोनों साथ हैं तो बहुत कुछ ‘हमारा’ है- उसका भी और आपका भी। लेकिन कुछ चीजें आपकी अपनी हैं, जिन्हें आप अपने तक रखते हैं। उतना ही अधिकार उसे भी है कि कुछ चीजें उसकी अपनी हों, जिन्हें वह अपने तक रखे। आप सपने देखते हैं, अपने बारे में सोचते हैं कि मुझे क्या करना है, कहां पहुंचना है। अपने जीवन को लेकर निर्णय लेने का उतना ही अधिकार उसे भी है। देखिए, एक सूर्य है, जिसके चारों तरफ सारे ग्रह घूमते हैं- आठ या नौ प्लैनेट। कभी आठ हो जाते हैं, कभी नौ। बेचारा प्लूटो है, जिसे कभी ग्रहों में शामिल किया जाता है, कभी बाहर कर दिया जाता है। लेकिन अगर हम यह मान लें कि हम सूर्य हैं और हमारी जिंदगी में स्त्री, बच्चा, भाई या कोई भी दूसरा व्यक्ति हमारे चारों तरफ घूमने वाला प्लैनेट है, तो यह गलत सोच है। यह इंसाफ, सच्चाई और नेकी की सोच नहीं है। हमारा फर्ज है कि हम हरेक को प्लैनेट समझें और अपने को भी प्लैनेट समझें। या हरेक को सूर्य समझें और अपने को भी सूर्य समझें। यानी किसी दूसरे व्यक्ति को अपनी ज़िंदगी का सिर्फ एक हिस्सा या अपने इर्द-गिर्द घूमने वाला व्यक्ति मानने के बजाय, उसके स्वतंत्र अस्तित्व और अधिकार को भी उतना ही महत्व दें। सामाजिक नैतिकता भी यही है कि आप जो अपने बारे में सोचते हैं, वही दूसरे के बारे में भी सोचें। जो आपको दूसरों से चाहिए, उसे दूसरों को देने के लिए भी तैयार रहें। एक चीज है साम्प्रदायिकता, जिससे बड़ी विचारहीनता की बात कोई नहीं हो सकती। यह ऐसा है, जैसे कोई कहे कि पुणे में रहने वाले लोग ताश बहुत खेलते हैं, जबलपुर में रहने वाले लोग गन्ना नहीं खाते, इलाहाबाद के लोग बहुत कंजूस होते हैं और कानपुर के लोगों को पैसे का होश नहीं रहता; वे उसे गलत आदतों में खर्च कर देते हैं। यह धारणा ठीक नहीं है, क्योंकि हर शहर में हर तरह के लोग रहते हैं। किसी शहर के सभी लोगों को एक ही आदत या स्वभाव से जोड़ देना ठीक नहीं हो सकता। हर शहर में हर तरह के लोग मौजूद हैं। यही बात हर कम्युनिटी पर भी लागू होती है। जैसे किसी शहर के सभी लोगों को एक ही रंग में नहीं देखा जा सकता, वैसे ही किसी कम्युनिटी के हर व्यक्ति को भी एक ही धारणा में नहीं बांधा जा सकता। व्यक्ति को पसंद कीजिए या नापसंद कीजिए, लेकिन किसी पूरी कम्युनिटी के प्रति सामूहिक रूप से नफरत या नापसंदगी रखना उचित नहीं है। (संपादन और समन्वय- अरविंद मण्डलोई)
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