ट्रेड डील की इनसाइड स्टोरी: ट्रंप की 'बुलिंग' के आगे कैसे दीवार बनकर खड़े हुए अजीत डोभाल?
भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई ट्रेड डील को लेकर एक नई जानकारी सामने आई है. जहां एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे अपनी बड़ी जीत बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रिपोर्ट्स बता रही हैं कि भारत ने इस डील के लिए काफी कड़ा रुख अपनाया था. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2025 में भारत के एनएसए (NSA) अजीत डोभाल और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच एक प्राइवेट मीटिंग हुई थी.
इस मीटिंग में डोभाल ने सा कर दिया कि भारत किसी भी तरह की धमकियों के आगे नहीं झुकेगा. उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर सही शर्तों पर बात नहीं बनी, तो भारत व्यापार समझौते के लिए 2029 तक भी रुकने को तैयार है.
धमकियों पर भारत का कड़ा जवाब
रिपोर्ट के अनुसार, अजीत डोभाल ने अमेरिका को याद दिलाया कि भारत पहले भी कई मुश्किल हालातों का सामना कर चुका है. उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि ट्रंप और उनके अधिकारी पब्लिक में भारत की बुराई करना बंद करें. डोभाल ने साफ किया कि भारत को दबाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी. कहा जा रहा है कि इस सख्त संदेश के बाद ही ट्रंप के बोलने के अंदाज में थोड़ी नरमी आई थी.
रिश्तों में क्यों आई थी खटास?
भारत और अमेरिका के बीच तनाव तब बढ़ गया था जब मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के मामले में ट्रंप के दावों को नई दिल्ली ने सिरे से खारिज कर दिया था. इसके बाद ट्रंप के करीबियों ने पीएम मोदी पर कमेंट्स किए और भारतीय सामानों पर 50% तक टैक्स (टैरिफ) लगा दिया. इससे दोनों देशों के रिश्तों में काफी कड़वाहट आ गई थी.
डील को लेकर ट्रंप का दावा
हाल ही में ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एलान किया कि भारत के साथ ट्रेड डील फाइनल हो गई है. पीएम मोदी ने बातचीत होने की बात तो मानी, लेकिन डील में क्या-क्या तय हुआ है, इसकी पूरी जानकारी नहीं दी. कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने भी बस इतना कहा कि बातचीत पूरी हो चुकी है.
विपक्ष के सवाल और चुनावी माहौल
भारत में विपक्षी पार्टियां अब सरकार से पूछ रही हैं कि क्या इस डील के लिए भारत अमेरिकी दबाव के आगे झुक गया है? हालांकि, डोभाल और रूबियो की मीटिंग को देखकर लगता है कि भारत ने खेती और डेयरी जैसे अहम सेक्टरों पर अपनी बात मनवाई होगी. वहीं, अमेरिका में चुनाव नजदीक हैं, इसलिए ट्रंप इस डील को अपनी बड़ी कामयाबी के तौर पर पेश कर रहे हैं.
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दक्षिण सूडान: काफिले पर हमले के बाद डब्ल्यूएफपी ने बलिएट काउंटी में अभियान रोका
जुबा, 4 फरवरी (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) ने पिछले सप्ताह अपने नदी काफिले पर हुए हमले के बाद दक्षिण सूडान के बलिएट काउंटी में अपनी सभी गतिविधियां निलंबित कर दी हैं।
डब्ल्यूएफपी ने बुधवार को बताया कि 12 नावों वाला उसका काफिला, जो 1,500 मीट्रिक टन से अधिक आवश्यक खाद्य सहायता लेकर जा रहा था, 30 जनवरी से 1 फरवरी के बीच कई बार हथियारबंद युवकों के हमले का शिकार हुआ। इस काफिले में साझेदार एजेंसियों के लिए ले जाए जा रहे गैर-खाद्य सामग्री भी शामिल थीं।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, बलिएट के विभिन्न इलाकों में रात के समय स्थानीय समुदाय के कुछ लोगों ने इन सामग्रियों को लूट लिया। डब्ल्यूएफपी ने कहा कि सुरक्षित मानवीय आवाजाही को लेकर प्रशासन से सुरक्षा आश्वासन और गारंटी मिलने के बावजूद यह लूटपाट रात में हुई और काउंटी प्रशासन की ओर से कोई सुरक्षा हस्तक्षेप नहीं किया गया।
जुबा से जारी बयान में डब्ल्यूएफपी ने कहा कि इस घटना के चलते एजेंसी को बलिएट काउंटी में अपनी सभी गतिविधियां तब तक के लिए रोकनी पड़ी हैं, जब तक उसके कर्मचारियों, साझेदारों और ठेकेदारों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती।
संयुक्त राष्ट्र की इस खाद्य एजेंसी ने सरकार से लूटी गई राहत सामग्री की तत्काल बरामदगी के लिए कदम उठाने की अपील करते हुए कहा कि मानवीय कर्मियों पर हमले किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हैं। डब्ल्यूएफपी ने कहा, “हम संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे मानवीय कर्मियों की अहम भूमिका का सम्मान करें और सहायता पहुंचाने के लिए जरूरी सुविधाओं व संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।”
डब्ल्यूएफपी ने यह भी बताया कि वह जोंगलेई राज्य में हालिया घटनाओं को लेकर बेहद चिंतित है, जहां सरकारी बलों और विपक्षी समूहों के बीच सशस्त्र संघर्ष के कारण महत्वपूर्ण मानवीय ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। दिसंबर 2025 से दक्षिण सूडान पीपुल्स डिफेंस फोर्स और विपक्षी सूडान पीपुल्स लिबरेशन आर्मी-इन-ऑपोजिशन के बीच जारी लड़ाई के चलते अकोबो, आयोड, न्यिरोल और उरोर काउंटियों में गोदामों और स्वास्थ्य केंद्रों सहित कई जरूरी ढांचे नष्ट हो चुके हैं।
डब्ल्यूएफपी ने चेतावनी दी कि पहुंच में बाधाएं और मानवीय काफिलों पर खुलेआम हो रहे हमले उसकी उस क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं, जिसके जरिए वह 42 लाख से अधिक सबसे जरूरतमंद महिलाओं, पुरुषों और बच्चों तक मदद पहुंचाता है।
एजेंसी ने यह भी कहा कि जोंगलेई में लगातार बनी असुरक्षा के चलते उसे बरसात के मौसम से पहले 12,000 मीट्रिक टन खाद्य सामग्री की अग्रिम तैनाती की अपनी योजना को भी रोकना पड़ा है।
--आईएएनएस
डीएससी
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