कच्छ में भारतीय सेना के आई कैंप में 200 से ज्यादा मरीजों की आंखों की रोशनी वापस आई
भुज, 4 फरवरी (आईएएनएस)। गुजरात के भुज में मिलिट्री हॉस्पिटल में भारतीय सेना द्वारा आयोजित तीन दिवसीय सर्जिकल आई कैंप के बाद, पूर्व सैनिकों, उनके परिवारों और कच्छ जिले के दूरदराज के इलाकों के निवासियों सहित 200 से ज्यादा लोगों की आंखों की रोशनी वापस आ गई।
नई दिल्ली के आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) की एक स्पेशलाइज्ड ऑप्थल्मोलॉजी टीम के सहयोग से आयोजित इस पहल में 2,500 से ज्यादा मरीजों की आंखों की पूरी जांच भी की गई।
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, दक्षिणी कमान, ने कैंप का दौरा किया और लाभार्थियों और मेडिकल कर्मियों से बातचीत की।
उन्होंने कहा, ऐसी पहलें पूर्व सैनिकों और स्थानीय निवासियों दोनों के जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार करती हैं, और मेडिकल टीमों को उनके प्रोफेशनलिज्म और समर्पण के लिए सराहा।
स्पेशलिस्ट सर्जिकल टीम का नेतृत्व ब्रिगेडियर संजय कुमार मिश्रा, पीवीएसएम, एवीएसएम, एसएम, वीएसएम, कंसल्टेंट और हेड ऑफ डिपार्टमेंट (ऑप्थल्मोलॉजी) ने किया, जिनके नाम 1 लाख से ज्यादा सफल सर्जिकल प्रक्रियाओं का श्रेय है।
कैंप के दौरान की गई एडवांस्ड मोतियाबिंद सर्जरी से कच्छ के दूर-दराज के गांवों के मरीजों की आंखों की रोशनी वापस आई, जबकि व्यापक नेत्र जांच से आंखों से संबंधित अन्य बीमारियों का जल्दी पता लगाने और समय पर इलाज करने में मदद मिली।
सेना के सीमावर्ती क्षेत्रों में चल रहे आउटरीच कार्यक्रम के हिस्से के रूप में आयोजित यह कैंप रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में पूर्व सैनिकों के कल्याण और सामुदायिक स्वास्थ्य सेवा के प्रति सेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
दूरदराज की आबादी को एडवांस्ड डायग्नोस्टिक और सर्जिकल सेवाएं प्रदान करके, सेना ने दूरी और सीमित स्थानीय चिकित्सा बुनियादी ढांचे से संबंधित चुनौतियों को दूर करने में मदद की है।
लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने सीमावर्ती समुदायों के साथ मजबूत संबंध बनाने में ऐसे कार्यक्रमों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, भारतीय सेना पूर्व सैनिकों और नागरिकों दोनों का समर्थन करने के लिए केंद्रित चिकित्सा और कल्याणकारी पहल करना जारी रखेगी, जिससे इन क्षेत्रों के लोगों के साथ स्थायी बंधन मजबूत होगा।
सेवा पहले के लोकाचार में निहित, भारतीय सेना के प्रयास रक्षा कर्तव्यों से परे हैं, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती जिलों में समावेशी विकास और सुलभ स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देना है।
कच्छ सर्जिकल आई कैंप इस प्रतिबद्धता का एक उदाहरण है, जो विशेषज्ञ चिकित्सा देखभाल को उन आबादी तक पहुंचाता है जो पारंपरिक रूप से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में बाधाओं का सामना करते हैं।
--आईएएनएस
एससीएच
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ट्रेड डील की इनसाइड स्टोरी: ट्रंप की 'बुलिंग' के आगे कैसे दीवार बनकर खड़े हुए अजीत डोभाल?
भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई ट्रेड डील को लेकर एक नई जानकारी सामने आई है. जहां एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे अपनी बड़ी जीत बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रिपोर्ट्स बता रही हैं कि भारत ने इस डील के लिए काफी कड़ा रुख अपनाया था. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2025 में भारत के एनएसए (NSA) अजीत डोभाल और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच एक प्राइवेट मीटिंग हुई थी.
इस मीटिंग में डोभाल ने सा कर दिया कि भारत किसी भी तरह की धमकियों के आगे नहीं झुकेगा. उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर सही शर्तों पर बात नहीं बनी, तो भारत व्यापार समझौते के लिए 2029 तक भी रुकने को तैयार है.
धमकियों पर भारत का कड़ा जवाब
रिपोर्ट के अनुसार, अजीत डोभाल ने अमेरिका को याद दिलाया कि भारत पहले भी कई मुश्किल हालातों का सामना कर चुका है. उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि ट्रंप और उनके अधिकारी पब्लिक में भारत की बुराई करना बंद करें. डोभाल ने साफ किया कि भारत को दबाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी. कहा जा रहा है कि इस सख्त संदेश के बाद ही ट्रंप के बोलने के अंदाज में थोड़ी नरमी आई थी.
रिश्तों में क्यों आई थी खटास?
भारत और अमेरिका के बीच तनाव तब बढ़ गया था जब मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के मामले में ट्रंप के दावों को नई दिल्ली ने सिरे से खारिज कर दिया था. इसके बाद ट्रंप के करीबियों ने पीएम मोदी पर कमेंट्स किए और भारतीय सामानों पर 50% तक टैक्स (टैरिफ) लगा दिया. इससे दोनों देशों के रिश्तों में काफी कड़वाहट आ गई थी.
डील को लेकर ट्रंप का दावा
हाल ही में ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एलान किया कि भारत के साथ ट्रेड डील फाइनल हो गई है. पीएम मोदी ने बातचीत होने की बात तो मानी, लेकिन डील में क्या-क्या तय हुआ है, इसकी पूरी जानकारी नहीं दी. कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने भी बस इतना कहा कि बातचीत पूरी हो चुकी है.
विपक्ष के सवाल और चुनावी माहौल
भारत में विपक्षी पार्टियां अब सरकार से पूछ रही हैं कि क्या इस डील के लिए भारत अमेरिकी दबाव के आगे झुक गया है? हालांकि, डोभाल और रूबियो की मीटिंग को देखकर लगता है कि भारत ने खेती और डेयरी जैसे अहम सेक्टरों पर अपनी बात मनवाई होगी. वहीं, अमेरिका में चुनाव नजदीक हैं, इसलिए ट्रंप इस डील को अपनी बड़ी कामयाबी के तौर पर पेश कर रहे हैं.
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