केंद्र सरकार ने पिछले 5 सालों में 57,125 किलोमीटर नेशनल हाईवे बनाए: नितिन गडकरी
नई दिल्ली, 4 फरवरी (आईएएनएस)। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को संसद को बताया कि पिछले पांच वर्षों में सरकार ने 57,125 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण किया है। इसमें औसतन हर साल 34,215 लेन-किलोमीटर का निर्माण हुआ।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा को लिखित उत्तर में बताया कि सरकार का लक्ष्य है कि 2028-29 तक 18,000 किलोमीटर लंबी एक्सेस-कंट्रोल्ड राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे चालू हो जाएं। इसके अलावा, 2032-33 तक कुल 26,000 किलोमीटर एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए टेंडर जारी करने का लक्ष्य रखा गया है।
मंत्री ने कहा कि पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के रिंग रोड और बाइपास का विकास प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। इसके अलावा, पोर्ट कनेक्टिविटी को शिपिंग मंत्रालय की प्राथमिकता के अनुसार और औद्योगिक नोड्स से कनेक्टिविटी को नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की प्राथमिकता के अनुसार विकसित किया जा रहा है। गडकरी ने कहा कि इन विकास कार्यों से लॉजिस्टिक्स की दक्षता बढ़ेगी, जो आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।
मंत्री ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर अर्थव्यवस्था का मुख्य प्रेरक है और यह तेज आर्थिक विकास और विकास में योगदान देता है। उन्होंने बताया कि देश में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क की लंबाई मार्च 2014 में 91,287 किलोमीटर थी, जो अब बढ़कर 1,46,572 किलोमीटर हो गई है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग मुख्य रूप से लंबी दूरी की कनेक्टिविटी के लिए हैं। सालों में बढ़ी बजटीय आवंटन के कारण सड़क की गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है। ऑपरेशनल एक्सेस-कंट्रोल्ड नेशनल हाई-स्पीड कॉरिडोर एचएससीएस/एक्सप्रेसवे की लंबाई 2014 में 93 किलोमीटर थी, जो अब 3,052 किलोमीटर हो गई है।
चार लेन और उससे अधिक वाले राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) नेटवर्क की लंबाई (जिसमें एक्सेस-कंट्रोल्ड एचएससीएस/एक्सप्रेसवे शामिल हैं) 2014 में 18,371 किलोमीटर थी, जो अब बढ़कर 48,568 किलोमीटर हो गई है, यानी 2.6 गुना बढ़ी है।
इसके अलावा, 2 लेन से कम वाले एनएच का अनुपात 2014 में 30 प्रतिशत था, जो अब कुल एनएच नेटवर्क का केवल 9 प्रतिशत रह गया है। इन विकास कार्यों से देशभर के शहरी, ग्रामीण और औद्योगिक क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और पहुंच बेहतर हुई है और लॉजिस्टिक्स की दक्षता भी बढ़ी है।
आईआईटी कानपुर के अध्ययन के अनुसार, 1 लेन-किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण से प्रत्यक्ष रोजगार 4,478 व्यक्ति-दिन और अप्रत्यक्ष रोजगार 5,297 व्यक्ति-दिन उत्पन्न होता है। इसके अलावा, लंबे समय में हाईवे निर्माण का असर 7 साल की अवधि में 1 लेन-किलोमीटर पर 52,393 व्यक्ति-दिन रोजगार उत्पन्न करता है, जो क्षेत्र में बढ़ी आर्थिक गतिविधियों के कारण होता है।
--आईएएनएस
एएमटी/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
त्रिपुरा में फूलों की खेती में आई तेजी, 59000 से ज्यादा किसानों को फायदा हुआ: रतन लाल नाथ
अगरतला, 4 फरवरी (आईएएनएस)। त्रिपुरा के कृषि और किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने बुधवार को कहा कि त्रिपुरा में पिछले सात सालों में फूलों की खेती और उत्पादन में तेजी देखी गई है, जिससे राज्य भर के 59,000 से अधिक किसानों को लाभ हुआ है।
त्रिपुरा के कृषि और किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ बुधवार को वेस्ट त्रिपुरा में विवेकानंद फ्लावर गार्डन का उद्घाटन के बाद यह बयान दिया। उन्होंने फूलों की खेती (फ्लोरीकल्चर) के बढ़ते महत्व पर जोर देते हुए कहा कि फूल सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन का एक अहम हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा, “फूल हर जगह जरूरी हैं- शुभकामनाओं, धार्मिक कार्यक्रमों से लेकर सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों तक। त्रिपुरा की उपजाऊ मिट्टी और पर्याप्त वर्षा इसे फूलों की खेती के लिए अत्यंत अनुकूल बनाती है।”
मंत्री ने बताया कि पहले फूल मुख्य रूप से सजावट के लिए उगाए जाते थे, लेकिन अब यह किसानों के लिए एक लाभकारी व्यवसाय बन गया है, जिससे कई किसान सालाना लाखों रुपए कमा रहे हैं।
उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बारजला के सेनतु भौमिक सालाना लगभग 8 लाख रुपए कमाते हैं, कांचनमाला के प्रदीप सरकार लगभग 12 लाख रुपए कमाते हैं, जबकि चांदीबाड़ी के जयंत दै और बैखोड़ा के इंद्रजीत देबनाथ 8 से 9 लाख रुपए कमाते हैं।
उन्होंने कहा, “फूलों की खेती ने किसानों की आमदनी में काफी सुधार किया है। पहले गेंदा, गुलाब और रजनीगंधा ज्यादातर खुले खेतों में उगाए जाते थे।”
मंत्री ने जानकारी दी कि 2018 से पहले त्रिपुरा में फूलों की खेती 2,738 कनि (एक कनि = 0.34 एकड़) भूमि पर होती थी, जो अब पिछले सात वर्षों में बढ़कर 11,720 कनि हो गई है।
उन्होंने कहा कि फूलों की खेती में लगे किसानों की संख्या 2,190 से बढ़कर 59,100 हो गई है, जबकि उत्पादन 1,117 मीट्रिक टन से बढ़कर 2,704 मीट्रिक टन हो गया है।
मंत्री ने बताया कि पहले राज्य की फूलों की मांग का केवल 35 स्थानीय उत्पादन से पूरा होता था, जबकि अब लगभग 89 फूल राज्य में ही उगाए जाते हैं और केवल 21 बाहर से मंगाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि अब उच्च-मूल्य वाले फूल जैसे ऑर्किड, जर्बरा और एंथुरियम उगाने के लिए संरक्षित संरचनाओं का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि पहले संरक्षित संरचनाओं में खेती 225 इकाइयों में होती थी, जो अब बढ़कर 504 इकाइयों हो गई है। ऐसे खेती का हिस्सा भी 25 प्रतिशत से बढ़कर 43 प्रतिशत हो गया है, जो त्रिपुरा में फूलों की उच्च मांग को दर्शाता है।
किसानों के महत्व पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि कृषि दुनिया का सबसे सम्मानित पेशा है।
उन्होंने कहा, “ऐसे कोई नहीं हैं जो फूल और बच्चों को पसंद न करें। फूल लोगों को सकारात्मक ऊर्जा देने और जीवन को सुंदर बनाने की शक्ति रखते हैं।”
--आईएएनएस
एएमटी/डीकेपी
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