विराट कोहली और रोहित शर्मा मौजूदा दौर के सबसे बड़े भारतीय क्रिकेट सुपरस्टार हैं। भले ही उनका करियर अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहा हो, लेकिन लोकप्रियता, सम्मान और फैन फॉलोइंग के मामले में फिलहाल कोई उनके आसपास भी नहीं दिखता। गौरतलब है कि भारतीय क्रिकेट में कुछ ही नाम ऐसे रहे हैं जो पीढ़ियों तक चर्चा में बने रहे, जिनमें सचिन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली और रोहित शर्मा शामिल हैं।
इसी बीच एक दुर्लभ बातचीत के दौरान जब एमएस धोनी मंच पर आए, तो यह सवाल उनसे भी टल नहीं सका। शुरुआत में धोनी ने सवाल को अनसुना करने की कोशिश की, लेकिन होस्ट जतिन सप्रू के दोहराने पर उन्होंने अपनी राय रखी।
धोनी ने साफ शब्दों में कहा कि उम्र को किसी भी खिलाड़ी के लिए बाधा नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, चयन का असली पैमाना फिटनेस और प्रदर्शन होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई खिलाड़ी लगातार अच्छा कर रहा है और खेलने की इच्छा रखता है, तो उसे सिर्फ उम्र के आधार पर बाहर करने का कोई मतलब नहीं बनता।
मौजूद जानकारी के अनुसार, रोहित शर्मा और विराट कोहली की उम्र फिलहाल 38 वर्ष है और 2027 विश्व कप तक वे क्रमशः 39 और 40 वर्ष के हो जाएंगे। हालांकि, दोनों ने टी20 और टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेकर सिर्फ वनडे प्रारूप पर ध्यान केंद्रित किया है, जिससे उनके कार्यभार और फिटनेस को लेकर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन हालिया आंकड़े इन आशंकाओं को कमजोर करते हैं। कोहली ने अपने पिछले कुछ वनडे मुकाबलों में लगातार रन बनाए हैं, जबकि रोहित भी प्रभावी प्रदर्शन करते नजर आए हैं।
धोनी ने अनुभव के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अनुभव किसी युवा खिलाड़ी को तुरंत नहीं मिल सकता। उनके मुताबिक, अगर प्रदर्शन लगातार अच्छा है तो उम्र अपने आप अप्रासंगिक हो जाती है, और अगर प्रदर्शन नहीं है तो युवा होना भी कोई गारंटी नहीं देता।
इस बयान के साथ धोनी ने चयन को लेकर चल रही बहस को एक नई दिशा दी है, जहां फैसला भावनाओं या उम्र पर नहीं, बल्कि मैदान पर दिखने वाले प्रदर्शन पर होना चाहिए।
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मैदान पर अपने शांत फैसलों के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अब साफ संकेत दे दिए हैं कि वे रिटायरमेंट के बाद कमेंट्री बॉक्स में नजर नहीं आने वाले हैं। बता दें कि धोनी ने 2020 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया था और इसके बाद से वह सार्वजनिक क्रिकेट चर्चाओं से काफी हद तक दूर रहे हैं।
एक यूट्यूब बातचीत में स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टर जतिन सप्रू से बात करते हुए धोनी ने कहा कि कमेंट्री करना जितना बाहर से आसान लगता है, असल में उतना ही कठिन है। उनके मुताबिक, खेल का वर्णन करते हुए कब व्यक्तिगत आलोचना की सीमा पार हो जाए, यह समझना बेहद नाजुक संतुलन है। गौरतलब है कि धोनी का मानना है कि हार के पीछे कारणों को इस तरह रखना एक कला है, जिससे किसी खिलाड़ी को ठेस न पहुंचे।
मौजूद जानकारी के अनुसार, धोनी ने यह भी स्वीकार किया कि आंकड़ों के मामले में उनकी पकड़ मजबूत नहीं रही है। उन्होंने कहा कि कई कमेंटेटर ऐसे होते हैं जो न सिर्फ भारतीय खिलाड़ियों बल्कि अलग-अलग दौर के हर खिलाड़ी के आंकड़े तुरंत याद कर लेते हैं, जबकि वे खुद अपने आंकड़ों पर भी सोच में पड़ जाते हैं।
बातचीत के दौरान धोनी से यह भी पूछा गया कि क्या वे क्रिकेट या जीवन से जुड़े फैसलों में सलाह लेते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि वे खुद को एक अच्छा श्रोता मानते हैं और बोलने से ज्यादा सुनना पसंद करते हैं। उनका मानना है कि हर बातचीत से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है और जरूरी नहीं कि हर बार सीधे सलाह मांगी जाए।
दिलचस्प अंदाज में धोनी ने यह भी बताया कि उन्हें फोन पर बात करना आज भी असहज लगता है। उन्होंने कहा कि आमने-सामने बातचीत उन्हें ज्यादा सहज लगती है क्योंकि सामने वाले के चेहरे के भाव समझ में आते हैं। मोबाइल फोन को लेकर मजाकिया लहजे में उन्होंने कहा कि पहले फोन मालिक के फायदे के लिए होता था, अब यह दूसरों के फायदे का साधन बन गया है।
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