Hyderabad में कैंपस खोलेगा US का CU Denver, UGC से मिला आशय पत्र
नयी दिल्ली, सात अक्टूबर कोलोराडो डेनवर विश्वविद्यालय (सीयू डेनवर) ने कहा है कि उसे भारत के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से हैदराबाद में विश्वविद्यालय एक नया परिसर स्थापित करने के लिए एक आशय पत्र मिला है। इसके साथ ही यह भारत में डिग्री प्रदान करने के लिए परिसर स्थापित करने की अनुमति पाने वाला पहला सरकारी अमेरिकी विश्वविद्यालय बन गया है। पिछले साल, शिकागो में स्थित ‘इलिनॉय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ भारत में अपना परिसर स्थापित करने वाला पहला अमेरिकी विश्वविद्यालय बना था।
यह एक निजी विश्वविद्यालय है, जिसने मुंबई में अपना परिसर स्थापित किया है और सितंबर में छात्रों के अपने पहले बैच का स्वागत किया। सीयू डेनवर का भारत में परिसर तेलंगाना का पहला विदेशी विश्वविद्यालय परिसर भी होगा। सीयू डेनवर के कुलाधिपति केनेथ टी. क्रिस्टेंसन के अनुसार, उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा तक अधिक से अधिक लोगों की पहुंच सुनिश्चित करना लंबे समय से विश्वविद्यालय का लक्ष्य रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘हैदराबाद में हमारी योजनाएं इसी प्रतिबद्धता पर आधारित हैं। साथ ही, भारत के उन छात्रों के साथ हमारे लंबे समय से जारी संबंध भी इसका आधार हैं, जो दशकों से सीयू डेनवर से जुड़े रहे हैं।’’ विश्वविद्यालय द्वारा जारी एक बयान में उन्होंने कहा, ‘‘अब हमारे पास इस संबंध को और आगे बढ़ाने तथा भारत के छात्रों तक अपने विशिष्ट अनुभव पहुंचाने का मौका है। इसमें उच्च शैक्षणिक मानकों वाली पढ़ाई और करियर के अनुरूप शिक्षा का अनुभव शामिल होगा, जो छात्रों को सार्थक करियर बनाने और अपने समुदायों में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए तैयार करेगा।’’ वैश्विक शिक्षा कंपनी एमेरिटस भारत में विश्वविद्यालय की रणनीतिक संयुक्त उद्यम साझेदार है और यह विश्वविद्यालय के साथ मिलकर काम कर रही है।
Political Drama के बाद फिर BSP में वापस कैसे लौटे Akash Anand? क्या है Mayawati का 2027 वाला प्लान?
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की अध्यक्ष मायावती ने सोमवार (5 अक्टूबर, 2026) को आकाश आनंद को पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक फिर से नियुक्त करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला पार्टी और आंदोलन के हित में लिया गया है। मायावती ने 'X' पर लिखा कि काफ़ी सोच-विचार के बाद, पार्टी और आंदोलन के हित में यह फ़ैसला लिया गया है कि आकाश आनंद को एक बार फिर BSP का राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया जाए और उन्हें पार्टी में दोबारा काम करने का मौका दिया जाए।
ज़्यादा सक्रिय होने की उम्मीद
जैसे-जैसे BSP 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रही है, पर्दे के पीछे आनंद के उत्तर प्रदेश की राजनीति में और ज़्यादा सक्रिय होने की उम्मीद है। उनकी नई भूमिका का पहला इम्तिहान 9 अक्टूबर को लखनऊ में डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जयंती पर होने वाली BSP की बड़ी रैली में हो सकता है। उम्मीद है कि आनंद इस कार्यक्रम में मंच साझा नहीं करेंगे, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि वह लखनऊ में संगठन से जुड़े इंतज़ामों और पर्दे के पीछे की रणनीति बनाने में शामिल हो सकते हैं। आने वाले हफ़्तों में उनकी राजनीतिक गतिविधियां भी ज़्यादा साफ़ तौर पर दिखाई देने की उम्मीद है। 1 नवंबर को आनंद के अयोध्या के एक विधानसभा क्षेत्र में जनसभा को संबोधित करने की संभावना है, जहां BSP जितेंद्र सिंह बबलू को अपना उम्मीदवार घोषित कर सकती है।
कैसे हुई वापसी
आनंद की यह वापसी तीसरी बार है जब उन्हें BSP से हटाए जाने के बाद अहम भूमिका में वापस लाया गया है। मायावती ने सोमवार को उन्हें फिर से बहाल कर दिया; इससे कुछ दिन पहले ही उन्होंने मायावती से सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगी थी और उनके नेतृत्व में काम करने का एक और मौका मांगा था। मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय समन्वयक के पद पर बहाल करते हुए कहा कि यह फ़ैसला पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित में लिया गया है। BSP के अंदर की गतिविधियों की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, इस सुलह के पीछे लखनऊ में मायावती के घर पर उनके और आनंद के बीच हुई एक लंबी बैठक थी। यह बैठक आनंद के राजनीतिक भविष्य को लेकर हफ़्तों तक बनी अनिश्चितता के बाद हुई।
ससुर अशोक सिद्धार्थ की रिटायरमेंट
इस पारिवारिक राजनीतिक ड्रामे में उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ भी शामिल हो गए थे, जो BSP के पूर्व राज्यसभा सदस्य और पार्टी के सीनियर पदाधिकारी थे। मायावती ने आकाश की पार्टी में संभावित वापसी के लिए सिद्धार्थ के राजनीति से रिटायरमेंट को एक शर्त बनाया था। इसके बाद सिद्धार्थ ने रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया, लेकिन फिर भी मायावती ने 10 सितंबर को आकाश को पार्टी से निकाल दिया। उस समय उन्होंने कहा था कि आकाश का व्यवहार और उनके पारिवारिक संबंध चिंता का विषय बन गए थे। बाद में आनंद ने मायावती से सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगी। उन्होंने मायावती को अपना राजनीतिक गुरु और "बुआ माँ" बताया और कहा कि BSP उनके लिए सिर्फ़ एक राजनीतिक संगठन नहीं, बल्कि उनका परिवार है। उन्होंने पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई और पार्टी की सेवा करने का एक और मौका मांगा।
उत्तर प्रदेश चुनाव में भूमिका
वापसी के बाद लखनऊ में हुई बैठक में, आनंद का स्वागत BSP के वरिष्ठ नेताओं ने किया, जिनमें सतीश चंद्र मिश्रा और उत्तर प्रदेश यूनिट के प्रमुख विश्वनाथ पाल शामिल थे; उन्होंने पार्टी की नीली टोपी पहनाकर उनका स्वागत किया। मायावती ने आकाश आनंद को संगठन में एक अहम पद पर वापस ला दिया है और संकेत दिया है कि उनके अलग होने की संभावना कम है। ऐसे में आने वाले हफ़्तों में यह साफ़ हो जाएगा कि उत्तर प्रदेश चुनावों के लिए BSP की तैयारियों में आकाश आनंद की क्या भूमिका रहती है। 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव पहला ऐसा मौका होगा जब बीएसपी प्रमुख मायावती अपने भतीजों आकाश आनंद और ईशान आनंद के साथ मिलकर पार्टी के चुनाव प्रचार की कमान संभालेंगी। परिवार ने पहले कभी किसी चुनाव में एक साथ प्रचार नहीं किया है। आकाश आनंद को 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान बीएसपी के स्टार प्रचारकों में से एक के तौर पर उतारा गया था, लेकिन राज्य में वोटिंग के तीसरे चरण के बाद, 7 मई को मायावती ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया। इसके साथ ही उनका चुनाव प्रचार भी खत्म हो गया।
यवाओं पर होगा जोर
मायावती ने देश और यूपी में Gen-Z और Gen-Alpha के हालिया विरोध प्रदर्शनों का खुलकर समर्थन किया है और युवाओं को अपनी पार्टी से जोड़ने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में, पार्टी के युवा संपर्क अभियानों में 'आनंद-ब्रदर्स' अहम भूमिका निभा सकते हैं। आकाश ने 10 अगस्त को हाथरस से यूपी चुनावों के लिए अपना अभियान शुरू किया था और 25 अगस्त को गौतम बुद्ध नगर के जेवर में एक और बैठक को संबोधित किया था, लेकिन 10 सितंबर को उन्हें अचानक पार्टी से हटा दिया गया था। अब, जब मायावती ने उन्हें पार्टी में उनकी अहम भूमिका पर फिर से नियुक्त किया है, तो राज्य में जनसभाओं के लिए उनका नया कार्यक्रम तैयार हो सकता है।
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