Pitru Paksha में जन्मे बच्चे होते हैं बेहद भाग्यशाली, मिलता है पूर्वजों का विशेष आशीर्वाद
हमारे आसपास कई ऐसे लोग होते हैं, जिनका जन्म पितृपक्ष के समय हुआ होता है। हिंदू धर्म में पितृपक्ष का समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। क्योंकि पितृपक्ष की अवधि पूरी तरह से पितरों को समर्पित होती है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों का तर्पण करते हैं और पितरों की आत्माशांति के लिए श्राद्धकर्म भी किए जाते हैं। ऐसे में जब भी किसी बच्चे का जन्म पितृपक्ष की अवधि में होता है, तो उसके जीवन और स्वभाव को लेकर मन में कई तरह से सवाल आते हैं।
अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि पितृपक्ष में जन्म लेने वाले बच्चे क्या अशुभ माने जाते हैं। क्या इस दौरान जन्म लेने वाले बच्चे के जीवन पर कोई विशेष प्रभाव पड़ता है या फिर यह उसने जीवन के लिए शुभ संकेत होता है।
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ऐसे होते हैं पितृपक्ष में जन्मे लोग
ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक पितृपक्ष में जन्मे बच्चे काफी भाग्यशाली माने जाते हैं। माना जाता है कि इन बच्चों पर पितरों की विशेष कृपा रहती है। पितरों का आशीर्वाद मिलने की वजह से यह जातक अपने जीवन में अलग पहचान बनाने में सफल रहते हैं।
इन लोगों में परिस्थितियों को समझने और भविष्य को लेकर सही अंदाजा लगाने की क्षमता अच्छी मानी जाती है। वहीं पितृपक्ष में जन्म बच्चे अपने परिवार के लिए बेहद शुभ माने जाते हैं। यह परिवार का नाम रोशन करने के अलावा जीवन में मान-सम्मान हासिल कर सकते हैं।
पितृपक्ष में जन्में बच्चों का स्वभाव
पितृपक्ष में जन्मे बच्चों की कुंडली में चंद्रमा की स्थिति कुछ कमजोर हो सकती है। जिस कारण इनको कभी-कभी भावनात्मक उतार-चढ़ाव या मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन इन लोगों के अंदर रचनात्मकता की कोई कमी नहीं होती है।
यह बच्चे अपनी प्रतिभा के दम पर अलग पहचान बनाते हैं और इनमें सही समय पर निर्णय लेने की क्षमता अच्छी होती है। सामान्य रूप से यह सकारात्मक सोच रखने वाले होते हैं और मुश्किल से भी मुश्किल परिस्थितियों में रास्ता ढूंढ लेते हैं। ऐसे जातक कम उम्र में ही अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर सफलता हासिल कर सकते हैं। वहीं आकर्षक स्वभाव की वजह से इनको परिवार और आसपास के लोगों का खूब प्यार मिलता है।
Shardiya Navratri 2026: 11 अक्तूबर को घटस्थापना, मां दुर्गा पूजा के लिए नोट करें जरूरी Samagri List
इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्तूबर 2026 से हो रही है। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवरात्रि के समय देवी मां पृथ्वी पर आती हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं।
मां दुर्गा के आगमन की खुशी में देशभर में पूजा-पंडाल सजाए जाते हैं और भव्य तरीके से मां की पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शारदीय नवरात्रि के दौरान देवी मां पूजा शुद्ध पूजा सामग्री के साथ विधिवत रुप से की जाती है। आइए आपको बताते हैं नवरात्रि की पूजा के लिए किन-किन पूजा सामग्रियों की आवश्यकता होती है।
नवरात्रि पूजा सामग्री
- लोटा, जल, गंगाजल, मौली, सुपारी, दूर्वा और जटा नारियल रख लें।
- लाल रंग की नई चुनरी और वस्त्र लें। नथ, गजरा, मांग टीका, कान की बालियां, बिंदी और सिंदूर जैसे श्रृंगार सामग्री भी रखें।
- फूल-माला, पान, सूखा नारियल और साफ-साबुत चावल का इस्तेमाल करें।
- पीतल का दीया, रुई की बत्ती और तिल का तेल या घी पहले से रख लें।
- कपूर और धूप-बत्ती भी पूजा सामग्री में शामिल करें।
- कंघी, शीशा, चोटी, लाल चूड़ियां, बिछिया, इत्र, महावर, पायल, गले की माला और मेहंदी भी रख सकते हैं।
- दान देने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार चीजें रख सकते हैं।
- मिट्टी, मिट्टी का पात्र और उसका ढक्कन भी पूजा की आवश्यक सामग्री में शामिल करें।
- बताशे, फल और मिठाई रखें। अपनी श्रद्धा के अनुसार माता को भोग अर्पित करें।
- कलावा और रबर बैंड भी साथ में रख लें।
शारदीय नवरात्रि 2026 कैलेंडर
11 अक्तूबर 2026-नवरात्रि का पहला दिन - मां शैलपुत्री पूजा, घटस्थापना
12 अक्तूबर 2026 -नवरात्रि का दूसरा दिन - मां ब्रह्मचारिणी पूजा
13 अक्तूबर 2026 - नवरात्रि का तीसरा दिन - मां चंद्रघंटा पूजा
14 अक्तूबर 2026- नवरात्रि का चौथा दिन - मां कूष्मांडा पूजा
15 अक्तूबर 2026 - नवरात्रि का पांचवां दिन - मां स्कंदमाता पूजा
16 अक्तूबर 2026 - नवरात्रि का छठा दिन - षष्ठी पूजा, मां कात्यायनी पूजा
17 अक्तूबर 2026- नवरात्रि का सातवां दिन - सप्तमी पूजा, मां कालरात्रि पूजा
18 अक्तूबर 2026 - नवरात्रि का आठवां दिन - अष्टमी पूजा
19 अक्तूबर 2026 - नवरात्रि का नौवां दिन - नवमी पूजा
घट स्थापना का शुभ मुहूर्त
शारदीय नवरात्रि के पहले दिन 11 अक्तूबर 2026 को घट स्थापना यानी कलश का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 19 मिनट से लेकर 10 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।
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