आईएमसी 2026: एआई के दम पर स्मार्टफोन की नई रेस; शाओमी, आईकू और मोटोरोला ने दिखाया अगली पीढ़ी की तकनीक का दम
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) 2026 के दौरान स्मार्टफोन उद्योग की दिग्गज कंपनियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), अगली पीढ़ी के प्रोसेसर और फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स को लेकर अपनी रणनीति साझा की। शाओमी, आईकू और मोटोरोला के शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि स्मार्टफोन उद्योग अब एआई-संचालित अनुभवों, बेहतर कंप्यूटिंग क्षमता और प्रीमियम कैमरा तकनीकों के नए दौर में प्रवेश कर रहा है।
शाओमी के एसोसिएट डायरेक्टर (प्रोडक्ट मार्केटिंग) गौतम बत्रा ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि कंपनी का नया शाओमी 18 प्रो दुनिया का पहला स्मार्टफोन है जो नए स्नैपड्रैगन 8 एलीट जेन 6 चिपसेट से लैस है। उन्होंने कहा कि यह चिपसेट 2 नैनोमीटर आर्किटेक्चर पर आधारित है, जिससे प्रोसेसिंग क्षमता और दक्षता दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
बत्रा ने बताया कि नए चिपसेट में 5 गीगाहर्ट्ज सीपीयू क्षमता, लगभग 44 प्रतिशत तेज जीपीयू प्रदर्शन और उन्नत एआई प्रोसेसिंग की सुविधा है। इससे गेमिंग, एआई-आधारित टास्क और कंप्यूटेशनल फोटोग्राफी जैसे फीचर्स को नई ताकत मिलेगी। उन्होंने कहा कि एआई अब हर नए स्मार्टफोन के केंद्र में है और शाओमी 18 प्रो उपयोगकर्ताओं को बेहतर, तेज और अधिक स्मार्ट अनुभव प्रदान करेगा।
गौतम बत्रा ने आगे कहा, इंडिया मोबाइल कांग्रेस हर साल पहले से बड़ा और बेहतर हो रहा है। उन्होंने कहा कि अब अधिक तकनीकी कंपनियां, साझेदार, मीडिया प्रतिनिधि और उपभोक्ता इसमें हिस्सा ले रहे हैं।
6जी तकनीक पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भविष्य की तकनीकों को लेकर उद्योग में उत्साह है। हालांकि उन्होंने किसी विशेष उत्पाद योजना पर टिप्पणी करने से इनकार किया, लेकिन कहा कि जब 6जी तकनीक आम उपभोक्ताओं तक पहुंचेगी, तब शाओमी जैसे ब्रांड उसके लिए पूरी तरह तैयार होंगे।
वहीं, आईकू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) निपुण मार्या ने आईएएनएस से कहा कि कंपनी ने आईएमसी 2026 के दौरान आईकू 16 की घोषणा की है, जो क्वालकॉम के नए स्नैपड्रैगन 8 एलीट एक्सट्रीम जेन 6 प्रोसेसर से लैस होगा।
उन्होंने कहा कि आईकू हमेशा दुनिया के सबसे तेज प्रोसेसर वाले फ्लैगशिप स्मार्टफोन लॉन्च करने पर ध्यान देता रहा है और इस बार भी वही रणनीति जारी है। उन्होंने बताया कि आईकू 16 कंपनी का अब तक का सबसे संपूर्ण फ्लैगशिप स्मार्टफोन होगा और भारतीय बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण लॉन्च साबित हो सकता है।
निपुण मार्या ने कहा कि वर्तमान समय में उपभोक्ता एआई फीचर्स और एजेंटिक एआई क्षमताओं को लेकर सबसे ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चूंकि आईकू 16 दुनिया के सबसे तेज प्रोसेसर से लैस होगा, इसलिए एआई से जुड़े सभी कार्यों में यह बेहद प्रभावशाली प्रदर्शन देगा। उन्होंने बताया कि एआई स्मार्टफोन उद्योग के केंद्र में आ चुका है और भविष्य के डिवाइसेज इसी दिशा में विकसित होंगे।
उन्होंने आईएमसी 2026 को नई तकनीकों के प्रदर्शन का महत्वपूर्ण मंच बताते हुए कहा कि इस वर्ष एआई, 5जी और 6जी से जुड़े विषयों पर विशेष चर्चा देखने को मिली।
इसके अलावा, मोटोरोला के एपीएसी मार्केटिंग प्रमुख शिवम रंजन ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि कंपनी जल्द ही अपना नया फ्लैगशिप स्मार्टफोन सिग्नेचर 27 लॉन्च करने जा रही है, जो स्नैपड्रैगन 8 एलीट एक्सट्रीम जेन 6 प्लेटफॉर्म पर आधारित होगा।
उन्होंने कहा कि क्वालकॉम द्वारा इंडिया मोबाइल कांग्रेस में नए चिपसेट लॉन्च किए जाने के दौरान मोटोरोला ने अपने आगामी डिवाइस की झलक पेश की। उन्होंने बताया कि यह दुनिया के शुरुआती स्मार्टफोन्स में शामिल होगा जो इस नई पीढ़ी की तकनीक का उपयोग करेंगे।
शिवम रंजन ने आगे कहा कि एजेंटिक एआई स्मार्टफोन उद्योग का अगला बड़ा बदलाव है। उन्होंने बताया कि गूगल जेमिनी और अन्य एआई-आधारित प्लेटफॉर्म्स की मदद से स्मार्टफोन अब उपयोगकर्ताओं के इरादों को समझकर कई दैनिक कार्य अपने आप कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि एजेंटिक एआई स्मार्टफोन उपयोगकर्ता की गतिविधियों को ऑटोमेट करने और अधिक व्यक्तिगत अनुभव देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मोटोरोला के अधिकारी ने कहा कि सिग्नेचर 27 कंपनी के इतिहास का सबसे उन्नत फ्लैगशिप स्मार्टफोन होगा, जिसमें एआई फीचर्स के साथ उन्नत कैमरा सिस्टम, सोनी लिटिया 50 मेगापिक्सल सेंसर, 200 मेगापिक्सल टेलीफोटो पेरिस्कोप लेंस, छह-एंटीना कनेक्टिविटी सिस्टम और प्रीमियम डिजाइन दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक प्रोसेसर आधारित अपग्रेड नहीं है, बल्कि कैमरा, ऑडियो, डिजाइन, एआई और कनेक्टिविटी का संपूर्ण पैकेज है। उन्होंने बताया कि 50 वर्षों से मोबाइल उद्योग में मौजूद मोटोरोला के लिए यह एक नई तकनीकी छलांग है।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
अमेरिका के पीईआरएम फैसले के भारत पर जटिल और दूरगामी असर हो सकते हैं: प्रियांक खड़गे
बेंगलुरु, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के आईटी और गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने शुक्रवार को कहा कि बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों के लिए यूएस सरकार द्वारा परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (पीईआरएम) को सस्पेंड करने से भारत पर जटिल और दूरगामी असर पड़ सकते हैं।
इस कदम से पारंपरिक आईटी आउटसोर्सिंग के सामने चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं, जबकि साथ ही देश में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) और हाई-वैल्यू टेक्नोलॉजी के काम के विस्तार में तेजी आ सकती है।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियांक खड़गे ने कहा कि इस प्रोग्राम को सस्पेंड करने से (जो एच-1बी वीजा धारकों सहित उन विदेशी कर्मचारियों के लिए एक अहम कदम है जो रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड चाहते हैं) अमेरिका में भारतीय आईटी कंपनियों की ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ सकती है, कुशल कर्मचारियों को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है, और भारतीय प्रोफेशनल्स को ऑनसाइट तैनात करने में लचीलापन कम हो सकता है।
उन्होंने कहा कि इस बदलाव से भारत के लिए एक ग्लोबल टेक्नोलॉजी हब बनने के मौके भी बन सकते हैं।
खड़गे ने कहा, अगर भारतीय इंजीनियरों का अमेरिका जाना मुश्किल और महंगा हो जाता है तो ज्यादातर हाई-वैल्यू काम उन जगहों पर जा सकता है जहां टैलेंट पहले से मौजूद है।
उन्होंने कहा कि इस बदलाव से भारत में जीसीसी का विस्तार तेजी से हो सकता है और ग्लोबल कंपनियां ज्यादा रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी), इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट डेवलपमेंट का काम भारतीय शहरों में लाने के लिए प्रोत्साहित हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि इससे सीनियर टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स की घरेलू मांग भी बढ़ सकती है और ग्लोबल टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में भारत की स्थिति मजबूत हो सकती है।
खड़गे के मुताबिक, भारत के पास आईटी सर्विस देने वाले मुख्य देश की अपनी स्थापित भूमिका से आगे बढ़कर प्रोडक्ट डेवलपमेंट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डीप टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के ग्लोबल सेंटर के तौर पर उभरने का मौका है।
उन्होंने कहा कि यूएस के फैसले का असर भारतीय आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों के सामने आने वाली तत्काल चुनौतियों से कहीं ज्यादा होगा। इससे यह भी तय हो सकता है कि ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनियां अलग-अलग देशों में अपने कामकाज और खास तरह के काम को कैसे बांटती हैं।
मंत्री की बातों से इस संभावना का पता चलता है कि अमेरिका में कुशल भारतीय प्रोफेशनल्स के आने-जाने और वहां बने रहने पर लगी पाबंदियों की वजह से कंपनियां भारत में अपने टेक्नोलॉजी ऑपरेशन्स का विस्तार कर सकती हैं, क्योंकि यहां पहले से ही बड़ी संख्या में टैलेंटेड लोग मौजूद हैं।
इस सस्पेंशन से अमेरिका में बड़े पैमाने पर काम करने वाली भारतीय आईटी सर्विस कंपनियों के लिए कुछ समय के लिए चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं, लेकिन इससे भारत को ज्यादा वैल्यू वाले टेक्नोलॉजी काम लाने और ग्लोबल रिसर्च, इंजीनियरिंग और इनोवेशन में अपनी भूमिका मजबूत करने का मौका भी मिल सकता है।
--आईएएनएस
एएसएच/डीकेपी
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