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Black Sea में बुल्गारिया तट के पास ड्रोन हमले में डूबा वाणिज्यिक पोत

सोफिया (बुल्गारिया), सात अक्टूबर (एपी) बुल्गारिया के प्रधानमंत्री रुमेन रादेव ने कहा कि मंगलवार को काला सागर में उसके ‘विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र’ (ईईजेड) में हुए पहले हमले में दो वाणिज्यिक पोतों को ड्रोन से निशाना बनाया गया। बुल्गारिया के अधिकारियों ने कहा कि ड्रोन कहां से आए थे, इसकी जांच की जा रही है, लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति ने ड्रोन हमलों के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया। बुल्गारिया के प्रधानमंत्री रादेव ने इस हमले की निंदा की।

सरकार की एक आपातकालीन बैठक के बाद रादेव ने कहा, ‘‘यह बुल्गारिया के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र में एक अस्वीकार्य हमला है। यह अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री कानून का घोर उल्लंघन है।’’ उन्होंने बताया कि समुद्री और हवाई ड्रोन ने बुल्गारिया के तट से लगभग 128 किलोमीटर दूर, तड़के करीब तीन बजे जहाजों पर हमला किया। रादेव ने बताया कि टोगो के झंडे वाले जहाज ‘अल्फा वतन’ को गंभीर ढांचागत नुकसान पहुंचा और वह घटनास्थल पर ही डूब गया।

उन्होंने कहा कि चालक दल के बारे में तुरंत कोई जानकारी नहीं मिली। एक अन्य हमले के बाद पलाऊ के झंडे वाले दूसरे जहाज ‘एबल’ में आग लग गई। उन्होंने बताया कि नाटो के सदस्य देश बुल्गारिया की एक नौका ने चालक दल के सभी 18 सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाला।

रादेव ने बताया कि दो नाविकों को गंभीर चोटें आईं और उन्हें हवाई मार्ग से बंदरगाह शहर वर्ना के अस्पताल ले जाया गया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन की सेना ने उन जगहों के आस-पास कोई अभियान नहीं चलाया जहां जहाजों पर हमला हुआ था, और उन्होंने रूस की सेना पर हमले का आरोप लगाया। जेलेंस्की ने कहा, ‘‘हमने बुल्गारिया की तरफ से सभी जानकारियों की पुष्टि की।

हमारी नौसेना ने बुल्गारिया में अपने समकक्षों से संपर्क किया और यह पता चला कि यह समुद्री और हवाई ड्रोन का इस्तेमाल करके किया गया रूस का हमला था।’’ रूसी अधिकारियों की ओर से इस आरोप पर कोई तुरंत टिप्पणी नहीं आई। उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और ड्रोन हमले से जुड़े सभी सवालों के लिए बुल्गारियाई अधिकारियों से संपर्क करने को कहा।

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रूस के पास तेल टैंकर पर यूक्रेन का ड्रोन अटैक:23 भारतीय सवार थे; ब्लैक सी में तनाव से रूस का अनाज निर्यात 71% घटा

रूस के पास ब्लैक सी में मंगलवार को लाइबेरिया के झंडे वाले तेल टैंकर में आग लग गई। टैंकर पर 23 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। हमले के बाद इमरजेंसी टीमों ने सभी का रेस्कयू किया। रूस के परिवहन मंत्रालय के मुताबिक, टैंकर पर यूक्रेन की ओर से आए ड्रोन से हमला हुआ था। हमले के बाद जहाज में आग लगी और समुद्र में कच्चा तेल जलता दिखाई दिया। लगातार हमलों से ब्लैक सी का समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है। जहाज मालिक इस रूट पर जाने से बच रहे हैं और माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है। अगस्त में रूस का अनाज निर्यात 59 लाख टन से घटकर 17 लाख टन रह गया था, यानी 71% गिरावट। सितंबर में भी निर्यात करीब 50% घटकर 24.5 लाख टन रहने का अनुमान है। हमले के बाद की तस्वीरें… तेज आग के कारण बचाव दल नहीं पहुंच पा रहा था हमले से पहले मरीनट्रैफिक ने जहाज की आखिरी लोकेशन काला सागर में रूस-जॉर्जिया सीमा के पास बताई थी। रूस के परिवहन मंत्रालय के मुताबिक तेज आग की के कारण दमकलकर्मी शुरुआत में जहाज के पास नहीं पहुंच पा रहे थे। मंत्रालय ने बाद में कहा कि आग की तीव्रता घटने के बाद इमरजेंसी टीमों के पास इसे नियंत्रित करने के पर्याप्त साधन थे। जहाज यूक्रेन की प्रतिबंध सूची में था द कीव इंडिपेंडेंट के मुताबिक, यह जहाज यूक्रेन की प्रतिबंध सूची में शामिल था। इसे रूस के कथित शैडो फ्लीट का हिस्सा बताया गया था। रूस का शैडो फ्लीट उन टैंकरों और जहाजों का नेटवर्क है, जिनका इस्तेमाल रूस पश्चिमी प्रतिबंधों से बचकर तेल समेत दूसरे सामान के निर्यात में करता है। यूक्रेन ने फरवरी में जहाज पर प्रतिबंध लगाए थे। उसका कहना था कि इस नेटवर्क के जहाज रूस को जरूरी ऊर्जा आय बनाए रखने में मदद करते हैं। इसी आय से रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को फंड करता है। रूस-यूक्रेन ने ब्लैक सी में 300 जहाजों पर हमले किए रूस-यूक्रेन युद्ध में ब्लैक सी अब जंग का बड़ा मोर्चा बन गया है। पिछले करीब 2 महीने में दोनों देशों ने 300 से ज्यादा जहाजों को निशाना बनाया है। इनमें अनाज ले जाने वाले जहाज, तेल टैंकर और दूसरे मालवाहक पोत शामिल हैं। लगातार हमलों का असर दुनिया की खाद्य सप्लाई पर पड़ने का खतरा है। गेहूं और मक्का की कीमतों में तेजी आ सकती है। रूस और यूक्रेन मिलकर दुनिया के करीब 30% गेहूं निर्यात का हिस्सा रखते हैं। दोनों देशों का ज्यादातर अनाज ब्लैक सी के रास्ते दूसरे देशों तक पहुंचता है। रूस से अब 16 देश ही गेहूं खरीदते हैं रूसी गेहूं खरीदने वाले देशों की संख्या 43 से घटकर 16 रह गई है। वहीं, रूस से अनाज भेजने वाले बंदरगाहों की संख्या 47 से घटकर 10 रह गई। देश के सबसे बड़े बंदरगाह नोवोरोसिस्क से शिपमेंट 24.9 लाख टन से घटकर 10.4 लाख टन रह गया। बंदरगाहों और जहाजों पर हमले बढ़ने से अनाज का समुद्री कारोबार प्रभावित हुआ है। दोनों देशों के गोदामों में अनाज मौजूद है, लेकिन उसे खरीदार देशों तक पहुंचाने में मुश्किल आ रही है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिख रहा है। गेहूं की कीमतें पिछले एक साल में करीब 30% बढ़ चुकी हैं। यूक्रेन ने सड़क-रेल से निर्यात बढ़ाया, लेकिन सप्लाई कम ब्लैक सी का समुद्री रास्ता प्रभावित होने के बाद यूक्रेन सड़क और रेल नेटवर्क के जरिए अनाज दूसरे देशों तक भेज रहा है। हालांकि इन रास्तों की क्षमता ब्लैक सी के बंदरगाहों की तुलना में काफी कम है। डेन्यूब नदी के रास्ते भी सीमित मात्रा में अनाज भेजा जा रहा है। लेकिन जलस्तर और परिवहन क्षमता की वजह से यह विकल्प समुद्री रास्ते की पूरी भरपाई नहीं कर पा रहा है। मक्का की ग्लोबल सप्लाई पर भी असर का खतरा ब्लैक सी में बढ़ते तनाव का असर सिर्फ गेहूं पर नहीं, मक्का की सप्लाई पर भी पड़ सकता है। 2025-26 में यूक्रेन ने 2.3 करोड़ टन मक्का निर्यात किया था। यह दुनिया के कुल मक्का निर्यात का करीब 12% था। अगर मौजूदा हालात लंबे समय तक जारी रहे तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में मक्का की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। ------------------------- यह खबर भी पढ़ें… होर्मुज के पास जहाज पर हमला, 11 भारतीय जख्मी भारत ने मंगलवार को ओमान के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पनामा के झंडे वाले व्यापारिक जहाज पर हमले की निंदा की। हमले में 12 क्रू मेंबर घायल हुए, जिनमें 11 भारतीय हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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