WPL के फाइनल में अब तक कैसा रहा दिल्ली कैपिटल्स का सफर, जानिए कब-कब हाथ से निकली ट्रॉफी
RCB vs DC Final : महिला प्रीमियर लीग 2026 का फाइनल मैच रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और दिल्ली कैपिटल्स के बीच खेला जाएगा. आरसीबी ने टेबल टॉप करके फाइनल में एंट्री मारी है. वहीं दिल्ली कैपिटल्स ने एलिमिनेटर मैच में गुजरात जायंट्स को हराकर WPL 2026 के फाइनल में अपनी जगह पक्की की है. अब इन दोनों टीमों के बीच महिला प्रीमियर लीग 2026 का फाइनल मैच 5 फरवरी को खेला जाएगा.
दिल्ली कैपिटल्स चौथी बार फाइनल में दिखाएंगी जलवा
ये दोनों टीमों वडोदरा के कोटंबी स्टेडियम में एक दूसरे के साथ भिड़ने वाली है. दिल्ली कैपिटल्स की कप्तानी जेमिमा रोड्रिग्स बतौर कप्तान पहली बार टूर्नामेंट के फाइनल में उतरने वाली हैं लेकिन उन्होंने बतौर खिलाड़ी तीन फाइनल खेले हैं. क्योंकि दिल्ली कैपिटल्स ने अब तक 2023, 2024, 2025 के फाइनल में जगह बनाई है. टीम ने इन तीनों सीजन टेबल टॉप कर फाइनल में एंट्री की थी.
And then there were 2⃣ ????
— Women's Premier League (WPL) (@wplt20) February 3, 2026
Cannot wait for the 2026 #TATAWPL Final @RCBTweets ???? @DelhiCapitals ❤️????#ClaimTheCrown | #RCBvDC | #Final pic.twitter.com/LpsHd585Xh
आरसीबी के अपने दूसरे फाइनल में फिर से जीतना चाहेगी खिताब
अब जेमिमा चौथा बार फाइनल में उतरने वाली हैं. जबकि आरसीबी की कप्तानी स्मृति मंधाना अपना दूसरा फाइनल खेलने वाली हैं. उन्होंने 2024 में पहला फाइनल खेला था, जहां दिल्ली को हराकर खिताब अपने नाम किया था. अब दिल्ली के पास आरसीबी से उस हार का बदला लेने का मौका होगा. उससे पहले दिल्ली के फाइनल बॉन्ड पर एक नजर डालते हैं और अब तक उसका फाइनल में प्रदर्शन कैसा रहा जानते हैं.
दिल्ली कैपिटल्स का फाइनल का सफर
दिल्ली कैपिटल्स की टीम ने सबसे पहले साल 2023 में फाइनल में जगह बनाई थी. ये सीजन का पहला संस्करण था, जहां मेग लेनिंग की कप्तानी में दिल्ली कैपिटल्स ने मुंबई इंडियंस से मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में फाइनल मैच खेला था. इस मैच में दिल्ली ने पहले खेलते हुए 20 ओवर में 9 विकेट पर 131 रन बनाए. मुंबई इंडियंस ने इस लक्ष्य को 19.3 ओवर में 3 विकेट पर 134 रन बनाकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली.
दिल्ली की टीम ने दूसरी बार 2024 में फाइनल में जगह बनाई, जहां उसकी टक्कर स्मृति मंधाना की आरसीबी से हुई. दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में डीसी पहले खेलते हुए 18.3 ओवर में 113 पर ढेर हो गई. आरसीबी ने इस लक्ष्य को 19.3 ओवर में 2 विकेट खोकर 115 रन बनाकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली.
Catches that win big matches ????
— Women's Premier League (WPL) (@wplt20) February 4, 2026
Awe-inspiring partnership ????
The maiden #TATAWPL title dream ????
???? @DelhiCapitals' fantastic effort in the #Eliminator summed up by Sneh Rana and Shafali Verma???? - By @RajalArora #ClaimTheCrown | #GGvDC | @TheShafaliVerma | @SnehRana15 pic.twitter.com/iQ8aoeXolK
दिल्ली कैपिटल्स तीसरी बार फाइनल में 2025 में पहुंची, जहां एक बार फिर दिल्ली और मुंबई इंडियंस के बीच मैच हुआ. इस बार फिर मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में फाइनल मैच खेला गया. मुंबई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 7 विकेट के नुकसान से 149 रन बनाए हैं. इस लक्ष्य का पीछा करते हुए डीसी 20 ओवर में 9 विकेट के नुकसान पर 141 रन ही बना पाई और 8 रनों से हार गई.
दिल्ली कैपिटल्स तीन बार फाइनल में पहुंची और तीनों बार उसका ट्रॉफी जीतने का सपना टूट गया. अब चौथी बार डीसी फाइनल में है, वो इस बार नई कप्तान जेमिमा की कप्तानी में ट्रॉफी अपने नाम करना चाहेगी.
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Explainer: मणिपुर में 'तायकोंडो किक' से राजनीतिक कमबैक, बिरेन का 'राउंड' खत्म; खेमचंद सिंह आज लेंगे CM की शपथ
Manipur new CM: मणिपुर पूर्वोत्तर भारत का एक छोटा सा राज्य है. लेकिन इन दिनों ये बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ा है. लगभग एक साल तक चले प्रेसिडेंट रूल के बाद अब यहां युमनाम खेमचंद सिंह नए मुख्यमंत्री पद बनने जा रहे हैं. उम्मीद है कि अब राज्य में राजनीतिक स्थिरता आएगी. बता दें मणिपुर की जटिल सामाजिक-जातीय संरचना देश की बड़ी तस्वीर को प्रभावित करती है. आइए आपको मणिपुर की राजनीति को समझने की कोशिश करते हैं. इस खबर में आपको राज्य के इतिहास से लेकर वर्तमान नेताओं तक और मणिपुर क्यों देश के लिए अहम है इस बारे में डिटेल में बताने की कोशिश करते हैं.
मणिपुर की राजनीतिक जड़ें, इतिहास पर एक नजर
मणिपुर की कहानी सदियों पुरानी है. पहले यह एक शक्तिशाली राज्य था, जिसने अपने पड़ोसी क्षेत्रों से संघर्ष किया और अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान बनाई. फिर 19वीं सदी में ब्रिटिश साम्राज्य ने इसे अपने कंट्रोल में ले लिया. लेकिन 1947 में भारत की आजादी के बाद यह एक चुनौतीपूर्ण दौर से गुजरा. इसके बाद 1949 में महाराजा बोधचंद्र सिंह ने भारत के साथ विलय समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसके बाद मणिपुर को यूनियन टेरिटरी का दर्जा दिया गया. 1972 में इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिला लेकिन इस प्रक्रिया में स्थानीय लोगों में असंतोष की जड़ें गहरी होती गई, दरअसल, कुछ लोग विलय के खिलाफ थे.
#WATCH | Manipur | Independent MLA from Keishamthong, Nishikant Singh Sapam says,"...A Manipuri Kuki lady, Nemcha Kipgen, has been made the Deputy CM...Let's hope Manipur will prosper." pic.twitter.com/1h0UNI6HLa
— ANI (@ANI) February 4, 2026
देश की राजनीति में मणिपुर क्यों इतना महत्वपूर्ण है?
देश की राजनीति में मणिपुर काफी महत्वपूर्ण है. जानकारी के अनुसार राज्य की आबादी मुख्य रूप से 3 समुदायों में बंटी हुई है. पहली मीटेई जो यहां बहुसंख्यक करीब 53% हैं. दूसरे कुकी जो पहाड़ी इलाकों में रहते हैं) और तीसरे नागा जो राज्य के उत्तर और पूर्वी हिस्सों में बसे हुए हैं. यह विभाजन राजनीति को प्रभावित करता है. घाटी वाले इलाके आर्थिक रूप से मजबूत हैं जबकि पहाड़ी क्षेत्र के लोग अक्सर संसाधनों की कमी से जूझते आए हैं. बता दें 1930-40 के दशक में यहां महिलाओं की अगुवाई में 'नूपी लाल' आंदोलन जैसे विद्रोह हुए तो से विद्रोह चावल की कीमतों के खिलाफ शुरू हुए थे जिन्होंने बाद में राजनीतिक सुधारों की मांग का रंग ले लिया. आजादी के बाद कांग्रेस और फिर बीजेपी जैसी राष्ट्रीय पार्टियां यहां मजबूत हुईं लेकिन स्थानीय मुद्दे जैसे स्वायत्तता की मांग और जातीय संघर्ष हमेशा राज्य की राजनीति में हावी रहे.
वायलेंस से प्रेसिडेंट रूल तक, हाल की उथल-पुथल की जानें पूरी कहानी
पिछले कुछ सालों में मणिपुर की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है. 2022 में यहां बीजेपी ने चुनाव जीते और एन. बिरेन सिंह दूसरी बार मुख्यमंत्री बने. लेकिन 2023 से मीटेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़क उठी जिसकी वजहें भूमि अधिकार ट्राइबल स्टेटस और ड्रग ट्रेड से जुड़ी रहीं. इस हिंसा में सैकड़ों लोग मारे गए, हजारों विस्थापित हुए और राज्य में अस्थिरता फैल गई. 2025 में बिरेन सिंह ने इस्तीफा दे दिया जिसके बाद यहां फरवरी में प्रेसिडेंट रूल लगा दिया गया. यह दौर मणिपुर के लिए कठिन रहा इस बीच यहां सुरक्षा बलों ने बफर जोन बनाए रखे लेकिन समुदायों के बीच अविश्वास भी गहराता गया. अब एक साल बाद बीजेपी-नीत एनडीए सरकार बन रही है जो जातीय संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है.
कौन हैं युमनाम खेमचंद सिंह? जो बनने जा रहे नए सीएम
मणिपुर की राजनीति में नेता अक्सर जातीय प्रतिनिधित्व पर आधारित रहे हैं जो राज्य की एकता और विभाजन दोनों को दर्शाते हैं. अब युमनाम खेमचंद सिंह यहां के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. बता दें 62 साल के खेमचंद मीटेई समुदाय से हैं और सिंगजामेई से 2 बार विधायक चुने जा चुके हैं. वह 2017-2022 तक विधानसभा स्पीकर रहे फिर बिरेन सिंह सरकार में मंत्री भी बने. जानकारी के अनुसार वह तायक्वोंडो के टीचर हैं और हाल ही में कुकी राहत कैंपों का दौरे कर वह मीडिया की सुर्खियां में छा गए थे. बीजेपी में वह एक संतुलित चेहरा माने जाते हैं जिन्होंने बिरेन सिंह के खिलाफ असंतोष जाहिर किया था.
मणिपुर पर क्यों पड़ोसी राज्यों की नजर?
मणिपुर सिर्फ एक छोटा राज्य नहीं बल्कि भारत की पूर्वोत्तर नीति का केंद्र भी है. दरअसल, राज्य की सीमा म्यांमार से लगी हुई हैं, जिससे यहां से ड्रग तस्करी, हथियारों की स्मगलिंग और उग्रवादी गतिविधियां देश की सुरक्षा के लिए हमेशा चुनौती रही हैं. 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के तहत मणिपुर एशियाई बाजारों से जुड़ने का गेटवे है लेकिन जातीय संघर्ष इसे बाधित करते हैं. ड्रग ट्रेड ने राजनीति को भी प्रभावित किया है जहां कुछ ग्रुप्स इससे जुड़े हैं. राष्ट्रीय स्तर पर मणिपुर की अस्थिरता पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों को प्रभावित कर सकती है और केंद्र सरकार के लिए यह एक टेस्ट केस है कि कैसे जातीय विविधता को संभाला जाए. अगर यहां शांति बनी,तो यह देश की एकता का प्रतीक बनेगा वरना यह अलगाववाद की आग को भड़का सकता है.
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