Responsive Scrollable Menu

कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी ने टाली बड़ी हवाई त्रासदी

आसमान में उड़ता हुआ विमान सामान्यतः यात्रियों के लिए सुरक्षित यात्रा और मंजिल तक पहुंचने का भरोसा लेकर चलता है। विमान के भीतर बैठे लोग यह कल्पना भी नहीं करते कि कुछ ही क्षणों में वही यात्रा जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष में बदल सकती है। 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रहे एक विमान में कुछ ऐसा ही हुआ। उड़ान के दौरान ऐसी भयावह स्थिति पैदा हुई, जिसमें विमान में सवार लोगों की जान पर गंभीर खतरा मंडराने लगा। उस समय भारतीय विमान चालक कैप्टन स्मित मच्छार ने जिस साहस, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया, उसकी चर्चा भारत ही नहीं, दुनिया के अनेक हिस्सों में हो रही है।

दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान संख्या एफजेड1073 में लगभग 174 यात्री सवार थे। विमान बोइंग 737 मैक्स 8 था। उड़ान के दौरान विमान में कार्यरत सह-पायलट ने कथित तौर पर कैप्टन स्मित मच्छार पर चाकू से हमला किया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हमले के बाद विमान की स्थिति अचानक गंभीर हो गई और वह कुछ ही क्षणों में लगभग 14000 फुट नीचे चला गया। इस घटना ने विमान में मौजूद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को भारी संकट में डाल दिया।

सबसे कठिन स्थिति यह थी कि जिस व्यक्ति के हाथ में विमान की सुरक्षित उड़ान की जिम्मेदारी थी, उसी पर हमला कर दिया गया था। कैप्टन मच्छार गंभीर रूप से घायल हो गए, लेकिन उन्होंने अपना धैर्य नहीं खोया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उन्होंने घायल अवस्था में भी विमान के नियंत्रण और यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। उन्होंने कक्ष का दरवाजा खोलने में सफलता प्राप्त की, जिसके बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने मिलकर हमलावर को काबू करने में मदद की। विमान में मौजूद दो अन्य विमान चालकों ने भी स्थिति संभालने में सहायता की। अंततः विमान को सऊदी अरब के तबूक हवाई अड्डे पर आपात स्थिति में उतारा गया।

इसे भी पढ़ें: नीरजा भनोट से स्मित मच्छार तक, हिन्दुओं की शूरवीरता की कायल दुनिया

इस पूरी घटना का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि संकट के उस क्षण में कैप्टन मच्छार ने केवल अपने जीवन की चिंता नहीं की। उनके सामने विमान में बैठे सैकड़ों लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी। एक विमान चालक के लिए सामान्य परिस्थितियों में भी निर्णय लेना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, लेकिन जब स्वयं चालक घायल हो, विमान असामान्य स्थिति में हो और कुछ ही क्षणों में बड़ा हादसा हो सकता हो, तब निर्णय लेने की क्षमता की वास्तविक परीक्षा होती है। कैप्टन मच्छार ने इसी परीक्षा में असाधारण धैर्य दिखाया।

घटना के बाद कैप्टन मच्छार को तबूक के अस्पताल में भर्ती कराया गया। भारतीय अधिकारियों के अनुसार वह गंभीर रूप से घायल हुए थे, लेकिन उनका उपचार किया जा रहा था और उनकी स्थिति सुरक्षित बताई गई। उनकी बहादुरी की प्रशंसा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी की। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कैप्टन मच्छार के साहस की सराहना करते हुए उन्हें सच्चा नायक बताया।

कैप्टन स्मित मच्छार का विमानन क्षेत्र में लंबा अनुभव भी इस घटना के संदर्भ में उल्लेखनीय है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह मुंबई के घाटकोपर क्षेत्र से हैं और इससे पहले स्पाइसजेट में कार्य कर चुके हैं। जून 2022 में वह फ्लाईदुबई से जुड़े थे। उनके पास बोइंग 737 विमानों को उड़ाने का लगभग 9750 घंटे का अनुभव बताया गया है। इतने लंबे अनुभव ने निश्चित रूप से उन्हें कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की व्यावसायिक क्षमता प्रदान की होगी, लेकिन केवल अनुभव से उस क्षण का साहस नहीं समझाया जा सकता। घायल होने के बावजूद यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना उनके कर्तव्यबोध को भी सामने लाता है।

इस घटना की एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि यात्रियों ने भी संकट के समय असाधारण सहयोग किया। विमान के भीतर उत्पन्न खतरे को केवल चालक दल ने ही नहीं संभाला, बल्कि यात्रियों ने भी हमलावर को काबू करने में मदद की। इससे पता चलता है कि आपात स्थिति में सामूहिक सहयोग कितना महत्वपूर्ण हो सकता है। एक व्यक्ति की बहादुरी ने रास्ता बनाया, लेकिन उसके बाद कई लोगों के सहयोग ने स्थिति को नियंत्रण में लाने में भूमिका निभाई। इस घटना को केवल एक व्यक्ति की कहानी मानना पूरी तस्वीर को छोटा कर देना होगा। यह साहस, प्रशिक्षण, जिम्मेदारी और सामूहिक सहयोग की कहानी भी है।

घटना के बाद विमान सुरक्षित रूप से तबूक पहुंचा और यात्रियों को आगे उनकी मंजिल तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई। उपलब्ध समाचारों के अनुसार सभी यात्री सुरक्षित रहे। जिस स्थिति में विमान हजारों फुट नीचे आ गया था, उसमें सुरक्षित अवतरण अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। विमान की आपात स्थिति और उसके बाद हुई घटनाओं की जांच संबंधित अधिकारियों द्वारा की जा रही है। इसलिए सह-पायलट की वास्तविक मंशा, हमले का कारण और घटना के पीछे की पूरी परिस्थितियों के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

कैप्टन मच्छार की बहादुरी को लेकर भारत में भी भावनात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। उत्तर प्रदेश के कुंडा क्षेत्र से विधायक रघुराज प्रताप सिंह, जिन्हें राजा भैया के नाम से भी जाना जाता है, ने उनकी बहादुरी की प्रशंसा करते हुए एक महत्वपूर्ण सुझाव रखा। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे बहादुर विमान चालक को सम्मानपूर्वक भारतीय सेना में विमान चालक के पद पर नियुक्त किया जाए तो यह गर्व की बात होगी। उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व से इस विषय पर विचार करने का आग्रह किया। यह फिलहाल एक राजनीतिक नेता द्वारा किया गया सुझाव है, कोई सरकारी नियुक्ति या निर्णय नहीं।

राजा भैया की इस मांग ने एक अलग बहस को भी जन्म दिया है। भारतीय सेना में नियुक्तियां निर्धारित नियमों, पात्रताओं और प्रक्रियाओं के अनुसार होती हैं। किसी व्यक्ति की असाधारण बहादुरी निश्चित रूप से सम्मान का विषय हो सकती है, लेकिन किसी विशिष्ट पद पर नियुक्ति का निर्णय संबंधित नियमों और संस्थागत प्रक्रियाओं के अनुसार ही किया जा सकता है। इसलिए राजा भैया की मांग को एक सम्मानजनक सुझाव के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि किसी घोषित सरकारी फैसले के रूप में।

कैप्टन मच्छार की कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि किसी पेशे की असली परीक्षा तब होती है, जब सामान्य परिस्थितियां अचानक असामान्य हो जाएं। विमान चालक के लिए यात्रियों की सुरक्षा केवल नौकरी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक नैतिक दायित्व भी है। कैप्टन मच्छार ने जिस परिस्थिति में अपना संयम बनाए रखा, उसमें उनके सामने अपने जीवन का खतरा भी था और विमान में सवार लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी। ऐसे समय में भय स्वाभाविक है, लेकिन भय के बावजूद जिम्मेदारी निभाना ही साहस का वास्तविक अर्थ है।

इस घटना के संदर्भ में कैप्टन मच्छार के कुछ पुराने विचार भी उल्लेखनीय हैं। विमानन क्षेत्र से जुड़ी एक रिपोर्ट में उनके पूर्व कथनों का उल्लेख किया गया है, जिनमें उन्होंने यात्रियों के सुरक्षित विमान से बाहर निकलने को अपनी प्राथमिकता बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि कठिन परिस्थितियों में यात्रियों से संवाद बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है। आज जब उनकी अपनी उड़ान में असाधारण संकट आया, तब उनके व्यवहार में भी यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की वही भावना दिखाई दी।

आकाश में घटित यह घटना कई सवाल भी छोड़ गई है। विमान में चालक दल की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए? यदि चालक दल के किसी सदस्य से ही अचानक खतरा उत्पन्न हो जाए तो ऐसी परिस्थिति से निपटने के लिए क्या अतिरिक्त व्यवस्थाएं होनी चाहिए? आपातकालीन प्रशिक्षण में ऐसी घटनाओं को किस तरह शामिल किया जाना चाहिए? इन प्रश्नों का उत्तर संबंधित विमानन संस्थाओं और जांच एजेंसियों को देना होगा। घटना की जांच से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर विमानन सुरक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जा सकते हैं।

फिलहाल सबसे बड़ी बात यह है कि एक बेहद कठिन परिस्थिति में विमान सुरक्षित रूप से जमीन पर पहुंचा और उसमें सवार यात्रियों की जान बच गई। कैप्टन स्मित मच्छार स्वयं घायल हुए, लेकिन उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटने के बजाय संकट का सामना किया। यही कारण है कि उनकी बहादुरी की चर्चा सीमाओं से परे हो रही है। भारत के प्रधानमंत्री से लेकर इजरायल के प्रधानमंत्री तक ने उनके साहस की सार्वजनिक रूप से सराहना की है।

कैप्टन स्मित मच्छार की कहानी केवल एक विमान दुर्घटना को टालने की कहानी नहीं है। यह उस मानवीय साहस की कहानी है, जिसमें व्यक्ति अपने सामने उपस्थित खतरे के बावजूद दूसरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। यह कहानी विमान चालकों, सुरक्षा कर्मियों, चिकित्सकों, सैनिकों और उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा का विषय बन सकती है, जिनके काम में दूसरों के जीवन की जिम्मेदारी जुड़ी होती है।

किसी भी बहादुरी का सबसे बड़ा पुरस्कार लोगों का सुरक्षित घर लौटना होता है। कैप्टन मच्छार के लिए भी शायद यही सबसे महत्वपूर्ण बात होगी कि जिस विमान की जिम्मेदारी उनके हाथों में थी, उसके यात्री सुरक्षित अपनी मंजिल तक पहुंचे। सम्मान, प्रशंसा और पुरस्कार बाद की बातें हैं। संकट की घड़ी में कर्तव्य से पीछे न हटना ही उनकी कहानी का सबसे मजबूत पक्ष है। घायल शरीर के बावजूद जिम्मेदारी निभाने वाले इस विमान चालक ने यह दिखाया कि साहस केवल युद्धभूमि में ही नहीं, बल्कि जीवन के किसी भी मोर्चे पर सामने आ सकता है। आकाश में कुछ क्षणों तक चली इस असाधारण घटना ने एक बात स्पष्ट कर दी कि संकट कितना भी बड़ा क्यों न हो, धैर्य, प्रशिक्षण, कर्तव्यबोध और सामूहिक सहयोग मिलकर बड़ी से बड़ी त्रासदी को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

Continue reading on the app

समुद्र में चीन रहा चाल, जवाब देने को भारत भी तैयार! South China Sea के Antelope Reef पर China बना रहा Military Airstrip, India ने भी शुरू की जवाबी तैयारी!

दक्षिण चीन सागर में विस्तारवाद की दिशा में आगे बढ़ते हुए चीन अब समुद्र के बीच अपनी सैन्य ताकत का ऐसा किला खड़ा करने में जुटा हुआ है, जो आने वाले दिनों में पूरे हिंद-प्रशांत के सामरिक समीकरण को हिला सकता है। ताजा उपग्रह तस्वीरों से हुए खुलासे से पता चला है कि विवादित पैरासेल द्वीपसमूह के एंटीलोप रीफ पर चीन तेजी से रनवे और विशाल सैन्य ढांचे का निर्माण कर रहा है। इस कदम ने उसके इरादों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, यह निर्माण पूरा होने के बाद यहां से लड़ाकू विमानों, निगरानी विमानों और अन्य सैन्य संसाधनों के संचालन की क्षमता विकसित की जा सकती है। यानी चीन समुद्र के बीच एक और ऐसा ठिकाना तैयार कर रहा है, जहां से वह अपने प्रतिद्वंद्वियों की गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर अपनी सैन्य शक्ति को तेजी से आगे बढ़ाने की स्थिति में होगा। साफ है कि बीजिंग दक्षिण चीन सागर को सिर्फ अपने प्रभाव का क्षेत्र नहीं, बल्कि सैन्य शक्ति के विस्तार का विशाल मंच बनाने की रणनीति पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह रनवे 2027 के मध्य तक परिचालन में आ सकता है।

तस्वीरों में मिट्टी समतल करने, बजरी और कंक्रीट डालने तथा भारी निर्माण मशीनों की गतिविधियां साफ दिखाई देती हैं। एक लदा हुआ बजरा नवनिर्मित घाट की ओर जाता हुआ भी देखा गया है। चीन ने आधिकारिक तौर पर इसे सैन्य अड्डा नहीं माना है और सरकारी माध्यमों ने इसे मौसम पूर्वानुमान, समुद्री वैज्ञानिक अनुसंधान तथा अन्य नागरिक उद्देश्यों से जोड़ने की कोशिश की है। लेकिन जिस पैमाने पर निर्माण हो रहा है, वह इस परियोजना के संभावित सामरिक उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

इसे भी पढ़ें: 4 साल में पहली बार एक सुर में बोले रूस और यूक्रेन, दोनों को पसंद आया मोदी का प्रस्ताव

एंटीलोप रीफ क्यों इतना महत्वपूर्ण है?

हम आपको बता दें कि एंटीलोप रीफ कोई सामान्य समुद्री निर्माण परियोजना नहीं है। यह पैरासेल द्वीपसमूह में स्थित है, जिस पर चीन के साथ वियतनाम और ताइवान भी दावा करते हैं। चीन ने 1974 में दक्षिण वियतनाम की सेनाओं को पैरासेल क्षेत्र से हटाकर वहां अपना नियंत्रण स्थापित किया था और तब से इस क्षेत्र पर उसका कब्जा बना हुआ है। यदि यहां सैन्य श्रेणी का रनवे और पूरा अड्डा तैयार हो जाता है तो चीन के युद्धक विमानों, निगरानी विमानों और नौसैनिक शक्ति की पहुंच दक्षिण चीन सागर के उत्तरी हिस्से में काफी बढ़ सकती है। इससे चीन को अपने परमाणु-सक्षम पनडुब्बी बेड़े वाले हैनान द्वीप के आसपास के समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा और निगरानी मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है।

हम आपको बता दें कि चीन पहले ही स्प्रैटली द्वीपसमूह में फिएरी क्रॉस, मिसचीफ और सुबी रीफ पर बड़े रनवे, बंदरगाह, निगरानी और वायु रक्षा सुविधाएं विकसित कर चुका है। अब पैरासेल क्षेत्र में निर्माण उस व्यापक रणनीति का अगला चरण दिखाई देता है, जिसमें बीजिंग समुद्र के भीतर अपनी स्थायी सैन्य पहुंच और निगरानी का जाल मजबूत कर रहा है। तस्वीर यहीं खत्म नहीं होती। एंटीलोप रीफ के निकट यागोंग द्वीप पर भी नई संरचनाएं दिखाई दी हैं। अगस्त में सामने आई उपग्रह तस्वीरों के आधार पर कुछ विश्लेषकों ने वहां संभावित रडार या प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली जैसी संरचनाओं की संभावना जताई थी, हालांकि उनके वास्तविक उपयोग की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

इसी बीच ताइवान को अमेरिका से नए एफ-16वी ब्लॉक 70 लड़ाकू विमानों की पहली दो इकाइयां मिल गई हैं। ये 2019 में किए गए करीब 8 अरब डॉलर के 66 विमानों के सौदे का हिस्सा हैं। ताइवान के पास पहले से 139 पुराने एफ-16 विमानों को एफ-16वी मानक तक उन्नत किया जा चुका है; नई खेप पूरी होने पर उसका एफ-16 बेड़ा 200 से अधिक विमानों का हो जाएगा। इन विमानों में आधुनिक सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्कैन किए जाने वाले रडार और उन्नत युद्ध प्रणालियां हैं। ताइवान के लिए इनका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि उसे चीन की वायुसेना की नियमित गतिविधियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि पूरी खेप की आपूर्ति में देरी हुई है और ताइवान को आगे की डिलीवरी का इंतजार है। इस प्रकार एक तरफ चीन दक्षिण चीन सागर में अपने ठिकाने मजबूत कर रहा है, तो दूसरी तरफ ताइवान अपनी वायु रक्षा क्षमता बढ़ा रहा है। यह हिंद-प्रशांत में तेजी से कठोर होते सैन्य संतुलन का स्पष्ट संकेत है।

दूसरी ओर, भारत से हजारों किलोमीटर दूर दक्षिण चीन सागर में बन रहा चीनी अड्डा देखने में भले ही क्षेत्रीय विवाद लगे, लेकिन इसका सामरिक प्रभाव सीधे भारतीय समुद्री हितों तक पहुंचता है। कारण है मलक्का जलडमरूमध्य। दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर को जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग एशिया की ऊर्जा और व्यापार व्यवस्था की महत्वपूर्ण धुरी है। अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह इसकी पश्चिमी दिशा के बेहद करीब स्थित है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, मलक्का क्षेत्र भारतीय समुद्री सुरक्षा और व्यापार के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। यही वह बिंदु है जहां चीन की दक्षिण चीन सागर रणनीति और भारत की समुद्री सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ती हैं। यदि चीन दक्षिण चीन सागर में एयरफील्ड, निगरानी केंद्र, बंदरगाह और नौसैनिक सुविधाओं की श्रृंखला बनाता है, तो संकट की स्थिति में उसके विमानों और युद्धपोतों की परिचालन पहुंच दक्षिण-पूर्व एशिया और मलक्का की दिशा में बढ़ सकती है। भारत के लिए इसका सीधा अर्थ है कि अंडमान-निकोबार अब केवल द्वीपसमूह नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत की सामरिक अग्रिम चौकी हैं।

भारत ने इसी दिशा में अपनी तैयारी तेज की है। जनवरी 2026 में कार निकोबार वायुसेना स्टेशन के उन्नत रनवे का उद्घाटन किया गया। अधिकारियों के अनुसार इससे मलक्का जलडमरूमध्य की दिशा में भारत की निगरानी और त्वरित हवाई संचालन क्षमता मजबूत होती है। ग्रेट निकोबार में प्रस्तावित विशाल परियोजना भी इसी व्यापक रणनीतिक संदर्भ में महत्वपूर्ण है। इसमें अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, हवाई अड्डा, ऊर्जा संयंत्र और अन्य आधारभूत सुविधाएं शामिल हैं। मोदी सरकार इसे समुद्री व्यापार के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक जरूरतों से भी जोड़ रही है।

बहरहाल, चीन समुद्र में धीरे-धीरे नहीं, बल्कि ईंट, कंक्रीट, रनवे, रडार और बंदरगाहों के जरिए अपना सामरिक भूगोल बदल रहा है। भारत के लिए जवाब केवल हथियारों की संख्या बढ़ाना नहीं हो सकता। उसे अंडमान-निकोबार में हवाई और नौसैनिक आधारभूत ढांचे, समुद्री निगरानी, लंबी दूरी की मारक क्षमता, पनडुब्बी रोधी युद्धक क्षमता, मानवरहित प्रणालियों और समुद्री क्षेत्र जागरूकता को एकीकृत करना होगा।

एंटीलोप रीफ का निर्माण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताता है कि चीन भविष्य के युद्ध को केवल महाद्वीपीय सीमा पर नहीं, बल्कि समुद्री गलियारों, द्वीपों और दूरदराज के सैन्य अड्डों पर भी आकार दे रहा है। भारत के लिए सबसे बड़ा सबक यही है कि दक्षिण चीन सागर की हर नई चीनी चौकी को केवल बीजिंग और उसके पड़ोसियों का विवाद मानना रणनीतिक भूल होगी। भारत की पूर्वी समुद्री सीमा, मलक्का और अंडमान-निकोबार अब एक ही व्यापक सामरिक तस्वीर के हिस्से हैं।

-नीरज कुमार दुबे

Continue reading on the app

  Sports

श्रेयस अय्यर की शतकीय पारी से बने कई बड़े रिकॉर्ड, आंकड़ों में देखिए भारत की ऐतिहासिक जीत

Shreyas Iyer Slams His Maiden T20I Century: भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने लखनऊ में खेले गए पहले टी20 मुकाबले में वेस्टइंडीज के खिलाफ बल्ले से ऐसा कोहराम मचाया कि क्रिकेट जगत दंग रह गया. वेस्टइंडीज की ओर से रखे गए 172 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम के लिए यह मुकाबला ऐतिहासिक बन गया, जब कप्तान अय्यर ने अपने टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला और बेहद यादगार शतक ठोक दिया. मैदान के चारों तरफ शॉट लगाने की अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए इस सीनियर बल्लेबाज ने कैरेबियाई गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दीं. अय्यर की इस शानदार पारी की बदौलत भारत ने पांच मैचों की सीरीज में 1-0 की शानदार बढ़त हासिल कर ली.अय्यर ने इस दौरान कई रिकॉर्ड बनाए. Wed, 7 Oct 2026 05:01:03 +0530

  Videos
See all

Gyanesh Kumar: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक जारी रहेगी लड़ाई, बोले देवेंद्र यादव #gyaneshkumar#shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-07T00:43:39+00:00

Saudi Pakistan Deal : सऊदी-पाकिस्तान में हो गई बड़ी डील? | Saudi Arabia | Pakistan | World News | #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-07T00:45:23+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers