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कंगाल पाकिस्तान! ड्रोन हमले रोकने के लिए चौकियों पर लगाए मछली पकड़ने वाले जाल

Pakistan News: आतंक को पालने में पाकिस्तान इतना मदहोश हो गया है कि अपने देश की रक्षा करने के लिए जरूरी संसाधन तक नहीं जुटा पा रहा है. आतंक को फंडिंग करते करते पाकिस्तान ने अपनी ही सेना को बदहाली में धकेल दिया है. पाकिस्तान की कंगाल सेना का एक बार फिर पर्दाफाश हुआ है.  

अल जजीरा रिपोर्ट के अनुसार,  उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में ड्रोन हमलों से बचने के लिए पुलिस ने अजीबोगरीब तरीका अपनाया है. ड्रोन हमलों से बचने के लिए हंगू पुलिस ने चौकी की छत और बाहरी दीवारों के बीच कई मीटर ऊपर मछली पकड़ने वाले जाल लगा दिए हैं. इससे चौकी के ऊपर एक तरह की सुरक्षा परत बन गई है. पुलिस ने यह जाल करीब दो महीने पहले लगाया था और खान के मुताबिक, इसके बाद से सरकी पियाला चौकी पर कोई ड्रोन हमला नहीं हुआ है.

क्यों उठाया ये कदम?

हंगू जिले की सरकी पियाला पुलिस चौकी पर कुछ समय पहले विस्फोटकों से लदे ड्रोन से हमला हुआ था. इस दौरान पुलिस इंस्पेक्टर फैयाज खान और उनके साथी अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर छिप गए थे. 16 अप्रैल को हुए इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने ली थी. करीब सात घंटे तक चली मुठभेड़ में एक बख्तरबंद वाहन का चालक मारा गया, जबकि एक पुलिसकर्मी घायल हो गया. 40 वर्षीय इंस्पेक्टर फैयाज खान ने बताया कि उस समय हालात बेहद डरावने थे और उन्हें यह तक पता नहीं था कि वे जिंदा घर लौट पाएंगे या नहीं.

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4 लाख पाकिस्तानी रुपये खर्चा

हांगू जिले के पुलिस अधिकारी तारिक हबीब ने बताया कि एक सामान्य पुलिस चौकी को इस तरह के जाल से ढकने में करीब 4 लाख पाकिस्तानी रुपये (लगभग 1,435 डॉलर) का खर्च आता है. हबीब ने बताया कि ड्रोन और क्वाडकॉप्टर हमलों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए पुलिस ने संवेदनशील पुलिस स्टेशनों और चौकियों पर जाल लगाने का काम शुरू कर दिया है. जिले की कई और पुलिस चौकियों पर भी ऐसे जाल लगाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस योजना को पूरे जिले में बढ़ाने के लिए हांगू पुलिस ने प्रांतीय सरकार से अतिरिक्त बजट मांगा है. फिलहाल सरकार इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है.

5 जिलों की चौकियों पर लगे नेट

खैबर पख्तूनख्वा पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि कोहाट, करक, बन्नू, लक्की मारवत और डेरा इस्माइल खान सहित कम से कम 5 अन्य संवेदनशील जिलों में चौकियों और पुलिस चौकियों पर ड्रोन रोधी जाल लगाए गए हैं. प्रांत के कुछ स्थानों पर स्थित सैन्य चौकियों पर भी ड्रोन रोधी जाल प्रणाली तैनात की गई है.

पुलिस को क्या है उम्मीद?

इंस्पेक्टर फैयाज खान ने बताया कि अगर कोई ड्रोन चौकी के ऊपर से उड़ता है, तो उसके जाल में फंसने की संभावना रहती है. इससे ड्रोन को रोका या निष्क्रिय किया जा सकता है. अगर ड्रोन जाल के ऊपर ही फट जाए, तब भी जमीन पर मौजूद पुलिसकर्मियों को नुकसान कम होने की उम्मीद है, क्योंकि जाल के कारण विस्फोट के कई टुकड़े हवा में ही फैल जाएंगे और सीधे नीचे तैनात जवानों तक नहीं पहुंचेंगे.

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अब पकड़ी जाएगी दवाओं की ओवरचार्जिंग! 1 नवंबर से QR कोड बताएगा अस्पताल ने कितने में खरीदी दवा

उत्तर प्रदेश के अस्पतालों की फार्मेसियों में दवाओं की मनमानी कीमत वसूली जाने की शिकायतों के बीच खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने एक बड़ा फैसला लिया है. अब मरीजों को यह जानने का पूरा अधिकार होगा कि अस्पताल ने जो दवा उन्हें बेची, वह असल में कितने में खरीदी गई थी. इससे मरीज ठगे जानें से बच सकेंगे और दवाएं एक तय कीमत से अधिक नहीं बेंची जा सकेंगी. यह नई व्यवस्था 1 नवंबर 2026 से लागू होने जा रही है.

यह फैसला अचानक क्यों लिया गया?

दरअसल, हाल ही में FSDA की अपनी जांच में हुआ एक चौंकाने वाला खुलासा है. दरअसल, विभाग ने प्रदेश के 214 अस्पतालों की फार्मेसियों से आंकड़े जुटाकर 130 दवाओं का विश्लेषण किया. जिसमें 36 दवाओं की MRP उनकी खरीद कीमत से 10 गुने से भी ज्यादा पाई गई. इतना ही नहीं कुछ मामलों में तो यह अंतर 67 गुना तक दर्ज हुआ. जांच रिपोर्ट के मुताबिक सबसे चौंकाने वाला मामला पॉलिमिक्सिन-बी इंजेक्शन का रहा, जिसे फार्मेसी ने महज 74.09 रुपये में खरीदा था, लेकिन उसकी MRP 4,980.94 रुपये तय कर दी गई थी.

विभाग के मुताबिक यह गड़बड़ी कहां हो रही थी?

FSDA के अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में दवा निर्माता, मार्केटिंग कंपनियां और स्टॉकिस्ट अस्पतालों को MRP से काफी कम दर पर दवाएं उपलब्ध करा रहे थे. लेकिन असली सवाल यह था कि इस छूट का फायदा आखिर मरीजों तक पहुंच भी रहा था या नहीं. अब जांच में ये साफ हुआ कि ज्यादातर मामलों में यह राहत मरीज तक पहुंचने की बजाय अस्पताल या फार्मेसी के मुनाफे में तब्दील हो रही थी.

नई व्यवस्था में मरीजों को क्या जानकारी मिलेगी?

अब अस्पताल परिसर में या भर्ती मरीजों के लिए संचालित फार्मेसियों को अपनी वेबसाइट पर हर दवा की पूरी जानकारी देनी होगी. इसमें दवा बनाने वाली कंपनी का नाम, ब्रांड, जेनरिक नाम के साथ-साथ 'प्राइस टू रिटेल' यानी वह कीमत जिस पर फार्मेसी ने दवा खरीदी और 'प्राइस टू कंज्यूमर' यानी वह कीमत जिस पर मरीज को दवा बेची गई दोनों सार्वजनिक करनी होंगी. बता दें ये नया नियम सिर्फ दवाओं तक ही सीमित नहीं है. बल्कि मेडिकल डिवाइस और न्यूट्रास्युटिकल्स पर भी यह लागू होगा.

मरीज यह जानकारी कैसे देख पाएंगे?

इसके लिए हर फार्मेसी काउंटर पर वेबसाइट का लिंक और एक QR कोड प्रमुखता से लगाना अनिवार्य होगा. मरीज या उनके परिजन बस अपने मोबाइल से यह QR कोड स्कैन करेंगे और तुरंत उन्हें दवा की खरीद और बिक्री कीमत की पूरी जानकारी स्क्रीन पर दिख जाएगी.

सिर्फ दवा की कीमत ही बताई जाएगी या कुछ और भी?

सिर्फ कीमत तक बात सीमित नहीं है. यूपीएफएसडीए के निर्देश के मुताबिक हर रिटेल फार्मेसी को अपनी पब्लिक वेबसाइट पर फार्मेसी का नाम, लाइसेंस नंबर, लाइसेंसधारक का नाम और परिसर का पूरा पता भी देना होगा. इसके अलावा फार्मेसी या अस्पताल में काम करने वाले फार्मासिस्ट का नाम, उसका पंजीकरण नंबर और फोटो भी वेबसाइट पर उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा.

स्टॉक की जानकारी को लेकर क्या नियम बनाया गया है?

फार्मेसियों को अपनी वेबसाइट पर स्टॉक की जानकारी हर सप्ताह अपडेट करनी होगी. इससे मरीजों को यह भी पता चल सकेगा कि किसी जरूरी दवा की उपलब्धता संबंधित फार्मेसी में है या नहीं, जिससे इलाज के दौरान होने वाली परेशानी कुछ हद तक कम हो सकेगी.

नवरात्रि के मद्देनजर व्यापारियों को क्या राहत दी गई है?

इसी बैठक में व्यापारियों के हित में भी एक अहम फैसला लिया गया है. त्योहारी सीजन और बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए नए थोक दवा विक्रय लाइसेंस जारी करने पर लगी रोक को 11 अक्टूबर 2026 से हटाने का फैसला किया गया है, ताकि नवरात्रि के दौरान दवा आपूर्ति में किसी तरह की रुकावट न आए.

क्या इस नियम का पालन न करने पर कोई कार्रवाई भी होगी?

FSDA की जांच पहले ही कई बड़ी गड़बड़ियां उजागर कर चुकी है, ऐसे में विभाग के इस कदम से साफ है कि आने वाले समय में नियम तोड़ने वाली फार्मेसियों पर भी सख्ती बढ़ने की पूरी संभावना है. इससे मरीजों को फायदा होगा, अब तक मरीज सिर्फ पैकेट पर छपी MRP देखकर भुगतान करते थे, जबकि असल खरीद कीमत और बिक्री कीमत के बीच का भारी अंतर पूरी तरह छिपा रहता था.

Explainer: सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी तो Form-6 में कैसे हुआ बदलाव? SC और चुनाव आयोग में किस बात पर विवाद?

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लियोनेल मेसी ने अपना आखिरी इंटरनेशनल फुटबॉल गेम 6 अक्टूबर को खेला। बेनिन के खिलाफ अर्जंटीना की टीम मैदान पर उतरी, जो मेसी का विदाई मैच था।  Wed, 07 Oct 2026 07:40:33 +0530

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