वर्ल्ड बैंक चेयरमैन ने पाकिस्तान को लताड़ा:कहा- मदद मुफ्त नहीं, भारत से सीखो, डिजिटल पेमेंट, करप्शन कैसे रोकी; जालंधर के बेटे अजय बंगा
पंजाब के जालंधर में जन्मे वर्ल्ड बैंक के चेयरमैन अजय बंगा के स्वागत में पाकिस्तान के रेड कारपेट काम नहीं आए। बंगा की यात्रा के दौरान पाकिस्तान ने उनको खुश करने के लिए गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बावजूद बंगा ने कर्ज पर पाकिस्तानी मंत्रियों की क्लास लगाई। वर्ल्ड बैंक अध्यक्ष ने कहा कि पाकिस्तान कर्ज तो ले रहा है, लेकिन ये न समझे कि ये मदद मुफ्त में की जा रही है। इस्लामाबाद में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब से मुलाकात के दौरान विश्व बैंक ने अगले 10 सालों में पाकिस्तान को 20 अरब डॉलर देने का रोडमैप तैयार किया। इसके साथ बंगा ने पाकिस्तानी मंत्रियों को कह दिया कि अपने देश में करप्शन और टैक्स चोरी को रोकें। पाकिस्तान ने सुधार नहीं किए तो आने वाले सालों में कोई कर्ज नहीं देगा। बता दें कि विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय पाल सिंह बंगा अपनी 4 दिन की पाकिस्तान यात्रा पर हैं। अंतिम दिन 3 फरवरी को बंगा अपने पुश्तैनी गांव पंजाब के खुशाब जिले में जाएंगे। 1947 के बंटवारे के बाद बंगा परिवार का पहला सदस्य अपने पैतृक गांव जा रहा है। इससे पहले उन्होंने गुरुद्वारा पंजाब साहिब में माथा टेका। किसी भारतीय की यात्रा पर इस बार पाकिस्तानी मीडिया ने कर्ज लेने के चलते कोई टिप्पणी नहीं की है। जानें अपने सख्त रुख में बंगा ने क्या कहा पाकिस्तान ने बंगा को खुश करने के लिए क्या किया बंगा की यात्रा पर पाकिस्तानी मीडिया में क्या चल रहा
पाकिस्तानी कैद से छूटे पंजाबी ने बताई टॉर्चर की कहानी:रात भर दौड़ाते, नंगा कर ठंड में बैठाते, तलवों पर रॉड मारते, जासूस बनाने पर तुले रहे
बाढ़ के पानी में बहकर गलती से पाकिस्तान पहुंचे लुधियाना के हरविंदर पाल के साथ जानवरों जैसा सलूक हुआ। उन्हें कैद में रख पाकिस्तानी रेंजर्स ने जमकर पीटा। जासूसी का आरोप कबूल करवाने के लिए पूरी रात नंगे पैर चलवाते। रुकने पर तलवों में डंडे मारते। नींद की झपकी आती तो फिर पिटाई करने लगते। पाक रेंजर्स के टॉर्चर से निकले तो पाकिस्तानी पुलिस ने पकड़ लिया। उन्होंने थाने ले जाकर पीटा। वहां की गंदगी साफ कराई। टॉर्चर की ये कहानी हरविंदर पाल ने बताई। उन्होंने बताया कि रात में नंगा कर चौकड़ी मारकर नीचे जमीन पर बैठने को कहते। हरविंदर अपने दोस्त रतनपाल के साथ 3 साल पहले बाढ़ में बहन का सामान बचाते वक्त बह गया था। हालांकि कुछ दिन पहले पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद हरविंदर की वतन वापसी हुई। जिसमें हरविंदर ने बताया कि किस तरह से जेल में यातनाएं सहने के बाद कानूनी लड़ाई भी उन्हें खुद ही लड़नी पड़ी। हरविंदरपाल ने कहा कि ढाई साल मिले टॉर्चर को वह आज भी याद करके कांप जाते हैं। मगर, अब खुशी है कि अपने परिवार के पास जिंदा वापस पहुंच पाए। हरविंदर को पाकिस्तान कैसे पहुंचे, जेल में क्या टॉर्चर हुए, कैसे छूटकर भारत पहुंचे, इसके बारे में जानने के लिए पढ़िए पूरी ग्राउंड रिपोर्ट… पहले जानिए दोनों पाकिस्तान कैसे पहुंचे जुलाई 2023 की भीषण बाढ़ के दौरान सिधवां बेट क्षेत्र के गांव परजियां बिहारीपुर निवासी हरविंदर पाल सिंह और जालंधर के खैहरा मुशतरका निवासी उनके दोस्त रतनपाल सिंह फिरोजपुर के गांव राजोके गट्टी व चांदीवाल में अपनी ममेरी बहन के पास मदद के लिए गए थे। बाढ़ से बहन के घर का सामान व पशुओं को निकाल रहे थे। बाकी लोगों को सुरक्षित निकाला और आखिर में जब भैंसों को निकाल रहे थे तो अचानक पानी का बहाव बढ़ गया और दोनों पानी में बह गए। पाकिस्तान में पकड़े जाने, यातनाओं की पूरी कहानी… अब जानिए, दोनों की रिहाई कैसे हुई? पाक अधिकारी मुकरे, पाक सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला: हरविंदर पाल ने बताया कि जब 13 महीने की सजा पूरी हुई तो उन्होंने वापस भारत आने को कहा। जिस पर पाकिस्तान के अधिकारियों ने कहा कि तुम्हारे देश के लोग यह मानने को तैयार नहीं हैं कि तुम भारत के हो। वो तुम्हें वापस नहीं लेना चाहते। पाकिस्तान में उन्हें कोई वकील नहीं मिला। भारत वापसी से पहले यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। जब उन्हें सुप्रीम कोर्ट में बुलाया गया तो जज ने कहा कि तुम्हें तुम्हारा देश वापस नहीं लेना चाहता है। हरविंदर पाल ने जज को कहा कि हमें भारत में बात करने का मौका तो दो। जज ने दिया 10 मिनट का टाइम दिया: हरविंदरपाल ने बताया कि जब उसने खुद जज से बहस की तो जज ने उसे 10 मिनट का वक्त अपने घर के लोगों से बात करने के लिए दिए। इस दौरान उसने अपने चाचा हरपाल सिंह व ससुर जीत से बात की। जज ने कहा कि अगर भारत तुम्हें वापस लेना चाहेगा तो भेज दिया जाएगा। करीब सात महीने पहले पाकिस्तान से जब हरविंदर सिंह का फोन आया तो उसके चाचा हरपाल सिंह व ससुर जीत सिंह ने डीसी लुधियाना को मांगपत्र दिया। डीसी ने तीन महीने का वक्त दिया। मांगपत्र लेने के बाद डीसी ने भारत सरकार से बात की। भारत सरकार ने पाकिस्तान को लिखा: हरविंदरपाल सिंह ने बताया कि भारत सरकार ने जब पाकिस्तान सरकार को लिखकर भेजा तो पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें छोड़ने के आदेश दिए। पाकिस्तान से 31 जनवरी को अन्य भारतीयों के साथ बाघा बॉर्डर के जरिए भारत वापस आया है। अमृतसर में मेडिकल के बाद उन्हें एक फरवरी को घर भेजा गया है। जासूसी के नाम पर लाहौर जेल में 20 भारतीय हरविंदर पाल सिंह ने बताया कि सेंट्रल जेल लाहौर की बैरक में करीब 20 से ज्यादा भारतीय कैदी बंद थे, जो कई-कई सालों से पाक जेलों में सड़ रहे हैं। उनको भी भारतीय जासूस होने के नाम पर पकड़ा गया है। उसने बताया कि कई गंभीर बीमार हैं, फिर भी जबरन काम करवाया जाता है। पिता को देख दौड़ा बेटा, पत्नी रोज अरदास करती 01 फरवरी 2026 को पत्नी सिकंदर कौर, ससुर जीत सिंह और गांव के सरपंच जसवीर सिंह उसे अपने साथ गांव परजियां बिहारीपुर वापस लेकर पहुंचे। जैसे ही युवक गांव पहुंचा, माहौल पूरी तरह भावुक हो गया। उसे देखने के लिए गांव उमड़ पड़ा। सबसे मार्मिक पल तब आया जब अपने पिता को सामने देख बेटा दौड़कर उसकी गोद में चढ़ गया। बेटा मासूमियत से बोला “पापा, आप कहां चले गए थे?”बेटे के ये शब्द सुनते ही हरविंदर समेत पूरे परिवार की आंखें नम हो गईं। गांव में हरविंदर का अपने परिवार, विशेषकर अपने बेटे के साथ भावनात्मक पुनर्मिलन हुआ। पत्नी सिकंदर कौर ने पति को सामने देख कहा- मुझे वाहेगुरु पर पूरा भरोसा था, मैं रोज गुरुद्वारा साहिब जाकर बस यही अरदास करती थी कि आप वापस लौट आएं। मुझे यकीन था, आप एक दिन जरूर आएंगे।
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