अफगानिस्तान ने चीन तक बनाई सड़क, भारत के लिए चिंता:121 किमी का वाखान कॉरिडोर चीन के लिए सीधा रास्ता, लद्दाख के पास बढ़ेगा असर
अफगानिस्तान ने उत्तर-पूर्वी बदख्शां प्रांत में वाखान कॉरिडोर के जरिए चीन के शिनजियांग तक 121 किलोमीटर लंबी सड़क बना ली है। करीब 55 लाख डॉलर की लागत से बनी इस सड़क का उद्घाटन भी हो गया है। यह सड़क अफगानिस्तान और चीन के बीच पहला सीधा जमीनी रास्ता है। तालिबान सरकार इस सड़क के जरिए अपने प्राकृतिक संसाधनों और सोने की खदानों को चीन के बाजार तक पहुंचाना चाहती है। इससे उसे दूसरे देशों और विदेशी कंपनियों पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। पाकिस्तान के साथ तनाव के बीच इस रास्ते को रणनीतिक तौर पर भी अहम माना जा रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी से मुलाकात के दौरान कहा था कि भारत की नजर वाखान में हो रही गतिविधियों पर है। चीन के लिए खनिज-कनेक्टिविटी का रास्ता चीन के लिए वाखान कॉरिडोर शिनजियांग की सुरक्षा और व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण है। चीन ने इसी साल इस इलाके में नया प्रशासनिक कॉरिडोर भी बनाया है। इस रास्ते से चीन को अफगानिस्तान के सोने और दूसरे खनिजों तक आसानी से पहुंच मिल सकती है। साथ ही ईरान और मध्य पूर्व के बाजारों तक भी जमीनी रास्ता मिल सकता है। भारत के लिए चिंता का विषय क्यों वाखान कॉरिडोर भारत के दावे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान के पास है। ऐसे में इस इलाके में चीन की बढ़ती मौजूदगी भारत के लिए चिंता की बात मानी जा रही है। यह क्षेत्र लद्दाख के भी करीब है। इससे भारत को उत्तरी सीमा पर निगरानी और सुरक्षा बढ़ानी पड़ सकती है। भारत को रणनीतिक मौजूदगी बढ़ानी होगी रक्षा विशेषज्ञ एनसी बिपिंद्रा के मुताबिक, वाखान में चीन और मध्य एशिया के हित जुड़े हुए हैं। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव और इस इलाके में चीन की बढ़ती मौजूदगी से वाखान का महत्व बढ़ गया है। उनके मुताबिक, भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया के देशों के साथ संपर्क बढ़ाकर अपनी कूटनीतिक और राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करनी चाहिए। ---------------------------------- यह खबर भी पढ़ें… भारत ने पाक-चीन सीमा आयोग को खारिज किया:कहा- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा; पाकिस्तान अवैध कब्जा छोड़े भारत ने इस्लामाबाद में शुरू किए गए पाकिस्तान-चीन सीमा आयोग को खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत का अभिन्न हिस्सा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान और चीन के बीच कोई सीमा मौजूद नहीं है। मंत्रालय के मुताबिक, यह आयोग बिना किसी कानूनी आधार के बनाया गया है। पूरी खबर पढ़ें…
2026 के फिजिक्स नोबेल का ऐलान आज:मेटामटेरियल्स, ग्राफीन और क्वांटम तकनीक के वैज्ञानिक दावेदार; 11.5 करोड़ रुपए मिलेंगे
2026 के फिजिक्स नोबेल पुरस्कार की घोषणा आज होगी। स्वीडन की रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज भौतिकी में अहम काम करने वाले वैज्ञानिकों के नाम बताएगी। यह पुरस्कार ऐसी खोज के लिए दिया जाता है, जिसने फिजिक्स को समझने या विज्ञान-तकनीक को आगे बढ़ाने में बड़ी मदद की हो। इस साल मेटामटेरियल्स, ग्राफीन और क्वांटम तकनीक पर काम करने वाले वैज्ञानिक चर्चा में हैं। इनमें जॉन पेंड्री, निकॉला स्पैल्डिन, पाब्लो जारिलो-हरेरो और अलेक्सी किताएव जैसे नाम शामिल हैं। हालांकि, नोबेल कमेटी ने संभावित विजेताओं की कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की है। नोबेल विजेताओं को दिसंबर में स्वीडन के स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा। उन्हें मेडल, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि मिलेगी। 2026 में नोबेल पुरस्कार की राशि करीब 11.5 करोड़ रुपए है। एक से ज्यादा वैज्ञानिकों को पुरस्कार मिलने पर रकम उनके बीच बांटी जाएगी। फिजिक्स नोबेल के लिए 4 क्षेत्रों के वैज्ञानिकों के नाम चर्चा में इस साल फिजिक्स नोबेल के लिए चार अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले वैज्ञानिकों के नाम चर्चा में हैं। इनमें मेटामटेरियल्स, ग्राफीन, क्वांटम कंप्यूटिंग और बेहद सटीक घड़ियों पर काम करने वाले वैज्ञानिक शामिल हैं। 1. मेटामटेरियल्स के लिए जॉन पेंड्री जॉन पेंड्री ब्रिटेन के इंपीरियल कॉलेज लंदन के भौतिक विज्ञानी हैं। उनका नाम मेटामटेरियल्स पर काम के लिए चर्चा में है। ये ऐसी कृत्रिम सामग्री होती हैं, जिन्हें खास गुणों के साथ बनाया जाता है। पेंड्री के काम से रोशनी को मोड़ने और नियंत्रित करने की तकनीक को समझने में मदद मिली। इससे ऐसी तकनीक की संभावना सामने आई, जिसमें किसी वस्तु को छिपाने जैसा प्रभाव पैदा किया जा सकता है। इस क्षेत्र में डेविड स्मिथ और फेडेरिको कैपासो के नाम भी चर्चा में हैं। 2.ग्राफीन की परतें घुमाने की तकनीक के लिए तीन नाम की चर्चा पाब्लो जारिलो-हरेरो, एलन मैकडोनाल्ड और ईवा अंद्रेई का नाम ट्विस्ट्रोनिक्स पर काम के लिए चर्चा में है। इसमें ग्राफीन जैसी बेहद पतली सामग्री की दो परतों को थोड़ा घुमाया जाता है। इससे सामग्री के गुण बदल सकते हैं। कुछ स्थितियों में इसमें सुपरकंडक्टिविटी जैसे गुण भी दिखाई दे सकते हैं। इन तीनों को 2026 का कावली नैनोसाइंस पुरस्कार भी मिला है। 3. क्वांटम कंप्यूटिंग के काम के लिए तीन वैज्ञानिक चर्चा में अलेक्सी किताएव, जॉन प्रेस्किल और पीटर शोर के नाम क्वांटम कंप्यूटिंग से जुड़े काम के लिए चर्चा में हैं। क्वांटम कंप्यूटर बहुत संवेदनशील होते हैं। छोटी-सी गड़बड़ी भी उनके नतीजे को बदल सकती है। इन वैज्ञानिकों के काम ने क्वांटम जानकारी को गलतियों से बचाने और ज्यादा भरोसेमंद क्वांटम कंप्यूटर बनाने के तरीकों को समझने में मदद की। 4. बेहद सटीक घड़ियों की तकनीक पर काम करने वाले दो वैज्ञानिक हिदेतोशी कातोरी और जून ये का नाम ऑप्टिकल लैटिस क्लॉक पर काम के लिए चर्चा में है। ये ऐसी घड़ियां हैं, जो समय को बेहद सटीक तरीके से माप सकती हैं। इनमें परमाणुओं और लेजर की मदद ली जाती है। इनका इस्तेमाल वैज्ञानिक प्रयोगों के साथ GPS और कम्युनिकेशन जैसी तकनीकों में भी हो सकता है। 2025 में इलेक्ट्रिक सर्किट से जुड़ी क्वांटम खोज के लिए मिला नोबेल 2025 का फिजिक्स नोबेल जॉन क्लार्क, मिशेल एच. डेवोरेट और जॉन एम. मार्टिनिस को दिया गया था। उन्हें ऐसी खोज के लिए सम्मानित किया गया, जिसमें क्वांटम दुनिया के नियमों को इलेक्ट्रिक सर्किट में देखा गया। वैज्ञानिकों ने दिखाया कि क्वांटम दुनिया में होने वाली घटनाएं सिर्फ बेहद छोटी चीजों में ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक सर्किट में भी देखी जा सकती हैं। इस खोज से क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी नई तकनीकों को समझने और आगे बढ़ाने में मदद मिली। ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… दिमागी कोशिकाओं को कंट्रोल करने की तकनीक पर मेडिसिन नोबेल:जर्मनी-अमेरिका के 3 वैज्ञानिकों की रिसर्च; डिप्रेशन और मानसिक बीमारियों को समझना आसान हुआ 2026 का मेडिसिन नोबेल जर्मनी के पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल और अमेरिका के कार्ल डाइसेरोथ को दिया गया है। इन वैज्ञानिकों ने ऑप्टोजेनेटिक्स नाम की ऐसी तकनीक विकसित करने में मदद की, जिससे रोशनी की मदद से दिमाग की अलग-अलग तंत्रिका कोशिकाओं को नियंत्रित करके उनके काम को समझा जा सकता है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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