छत्तीसगढ़ Coal Levy Scam: EOW ने MLA देवेंद्र यादव समेत 12 लोगों पर पेश किया पूरक चालान
रायपुर, पांच अक्टूबर छत्तीसगढ़ में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा/एंटी करप्शन ब्यूरो (ईओडब्ल्यू/एसीबी) ने कथित कोयला लेवी घोटाले में सोमवार को छठा पूरक चालान दाखिल किया, जिसमें कांग्रेस विधायक देवेंद्र सिंह यादव, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल और भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी जय प्रकाश मौर्य समेत 12 लोगों को आरोपी बनाया गया है। लगभग 10 हजार पन्नों का यह पूरक चालान सोमवार को विशेष न्यायालय में दाखिल किया गया। बचाव पक्ष के वकील फैसल रिजवी ने बताया कि चालान में 12 लोगों को आरोपी बनाया गया है और इनमें से ज्यादातर लोग प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोयला घोटाला मामले में पहले से आरोपी हैं।
उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किलों पर लगाए गए आरोप झूठे हैं और वे अदालत में अपना बचाव करेंगे। चालान में नामजद अन्य आरोपियों में कांग्रेस के पूर्व विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय, पार्टी नेता रामप्रताप सिंह और विनोद तिवारी, व्यवसायी सुनील कुमार अग्रवाल, पीयूष कुमार साहू, जोगिंदर सिंह, अनुराग चौरसिया, दीपेश टांक और राहुल मिश्रा शामिल हैं। ईओडब्ल्यू ने जनवरी 2024 में ईडी की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था।
ईडी इस कथित घोटाले के धनशोधन पहलू की जांच कर रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार, पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान नौकरशाहों, व्यवसायियों, राजनेताओं और बिचौलियों के एक सिंडिकेट ने राज्य में कोयला परिवहनकर्ताओं से कथित तौर पर 25 रुपये प्रति टन की अवैध लेवी वसूली थी। एजेंसियों का आरोप है कि इस सिंडिकेट में सूर्यकांत तिवारी जैसे निजी व्यक्ति तथा पिछली भूपेश बघेल सरकार के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय में उप सचिव रहीं सौम्या चौरसिया और आईएएस अधिकारी समीर विश्नोई जैसे सरकारी अधिकारी शामिल थे।
आरोप है कि इन लोगों ने कुछ राजनीतिक अधिकारियों के समर्थन से खनिज परिवहन प्रणाली में जानबूझकर बदलाव किए। चालान में कहा गया है कि आयकर विभाग द्वारा जब्त की गई हाथ से लिखी डायरियों से पता चलता है कि जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच कोयला लेवी के तौर पर लगभग 540 करोड़ रुपये एकत्र किए गए थे। ईओडब्ल्यू ने इससे पहले 22 आरोपियों के खिलाफ एक आरोप पत्र और पांच पूरक चालान दाखिल किए थे।
इन आरोपियों में आईएएस अधिकारी समीर विश्नोई, रानू साहू और सौम्या चौरसिया शामिल हैं। सोमवार को दाखिल किए गए चालान में एजेंसी ने आरोप लगाया कि सूर्यकांत तिवारी कोयला लेवी से मिलने वाली रकम को एकत्र करने, उसका हिसाब-किताब रखने और उसके इस्तेमाल की पूरी प्रणाली चलाते थे। आरोप है कि तिवारी ने कोयला परिवहन की मंजूरी देने की प्रक्रिया में बदलाव करवाने और क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश जारी करने के लिए तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व तथा मुख्यमंत्री कार्यालय के साथ तालमेल बनाने में अपने राजनीतिक और प्रशासनिक संपर्कों का इस्तेमाल किया।
राज्य की एजेंसी ने कहा कि कोयला परिवहनकर्ताओं से प्रति टन 25 रुपये की मांग की जाती थी और धन लेने के बाद ही डिलीवरी ऑर्डर को मंजूरी देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती थी। परिवहनकर्ताओं ने कथित तौर पर जांचकर्ताओं को बताया कि पैसे देने से इनकार करने वालों को मंजूरी रुकने, वाहनों को रोके जाने और कारोबार से जुड़ी अन्य दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। पूर्व विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय से जुड़ी डायरी की चार प्रविष्टियों में कथित तौर पर 49.50 लाख रुपये दर्ज थे।
राय ने ईडी को बताया था कि उन्हें तिवारी से नकद मिला था और उन्होंने इसका इस्तेमाल उत्तर प्रदेश में चुनाव के दौरान कार्यकर्ताओं के रहने, खाने, यात्रा और चुनाव से जुड़े अन्य खर्चों के लिए किया था। एजेंसी का आरोप है कि उस समय कांग्रेस के प्रवक्ता रहे रामप्रताप सिंह को मीडिया प्रबंधन के काम के लिए तिवारी से नकद मिला था। जब्त की गई डायरियों में पांच फरवरी 2021 से तीन जून 2022 के बीच आरपी सिंह और आरपी नाम से 25 प्रविष्टियां मिलीं, जिनमें 2.92 करोड़ रुपये दर्ज थे।
चालान पर प्रतिक्रिया देते हुए यादव ने पीटीआई- वीडियो से कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार पूरी तरह नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि मामले के अदालत तक पहुंचने का वह स्वागत करते हैं और उन्हें भरोसा है कि उन्हें न्याय मिलेगा। यादव ने यह भी सवाल उठाया कि जांच में इतना समय क्यों लगा।
उन्होंने कहा कि उन्हें न तो जेल जाने से डर लगता है और न ही भाजपा से।
Mumbai Police ने MP से सॉफ्टवेयर इंजीनियर को दबोचा, APK फाइलों से की 15.75 करोड़ की ठगी
मुंबई, पांच अक्टूबर मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने मध्य प्रदेश के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को कथित तौर पर अंतरराज्यीय साइबर अपराध गिरोह चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने सोमवार को बताया कि यह गिरोह हानिकारक एपीके फाइलों के जरिए पूरे भारत में वरिष्ठ नागरिकों समेत अन्य लोगों से 15.75 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है। एक अधिकारी ने बताया कि जांच में सामने आया कि 36 वर्षीय आरोपी ने साइबर अपराध में लिप्त विभिन्न गिरोहों को 2,805 हानिकारक एपीके फाइलें बनाकर बेची थीं, जिनका बाद में इस्तेमाल देशभर में 9,673 लोगों को ठगने के लिए किया गया।
उल्लेखनीय है कि हानिकारक एपीके (एंड्रॉयड पैकेज किट) फाइल एक नकली या संक्रमित ‘एंड्रॉयड एप्लिकेशन’ होती है, जिसे संवेदनशील जानकारी चुराने, ओटीपी हासिल करने या मोबाइल फोन का दूर से नियंत्रण अपने हाथ में लेने के लिए तैयार किया जाता है। इस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ, जब मुंबई के 72 वर्षीय एक व्यक्ति से 13 अगस्त को 5.62 लाख रुपये की ठगी की गई। अधिकारी ने बताया कि जालसाज खुद को बैंक का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों को फोन करता था।
आरोपी बातचीत के दौरान पीड़ितों को बुजुर्गों के लिए कार्ड जारी करने के बहाने व्हाट्सऐप पर भेजी गई फाइल को इंस्टॉल करने के लिए राजी करता था और फिर उनसे निजी जानकारी तथा डेबिट कार्ड से जुड़ी जानकारी प्राप्त करता था। पीड़ित की शिकायत के आधार पर भायखला पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अधिकारी ने बताया कि मध्य प्रदेश स्थित उसके कार्यालय में छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक सीपीयू, तीन हार्ड डिस्क, एक पेन ड्राइव, एक वाई-फाई राउटर और तीन मोबाइल फोन जब्त किए।
उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी विभिन्न सेवा प्रदाता कंपनियों के सर्वरों का इस्तेमाल कर रहा था।
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