London से Chicago जा रही British Airways की फ्लाइट में आपात स्थिति, Heathrow पर सुरक्षित उतरा
लंदन से शिकागो जा रही ब्रिटिश एयरवेज की एक उड़ान को सोमवार को आयरलैंड के ऊपर अचानक आपात स्थिति घोषित करनी पड़ी। विमान ने आपात संकेत 7700 जारी किया और कुछ ही मिनटों में अपनी ऊंचाई 37,000 फीट से घटाकर करीब 9,000 फीट कर दी। इसके बाद विमान शिकागो जाने के बजाय वापस लंदन की ओर मुड़ गया और सुरक्षित रूप से हीथ्रो हवाई अड्डे पर उतर गया।
मौजूद जानकारी के अनुसार, ब्रिटिश एयरवेज की उड़ान बीए295 सोमवार को लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे से अमेरिका के शिकागो के लिए रवाना हुई थी। इसका शिकागो ओ'हारे हवाई अड्डे तक पहुंचने का तय समय करीब 8 घंटे 40 मिनट था। विमान बोइंग 777-200ईआर था। उड़ान भरने के लगभग 1 घंटे बाद विमान करीब 37,000 फीट की ऊंचाई पर पहुंच गया था।
इसी दौरान विमान ने आपात संकेत 7700 जारी किया। यह संकेत विमान में किसी सामान्य लेकिन गंभीर आपात स्थिति की जानकारी देने के लिए दुनियाभर में इस्तेमाल किया जाता है। संकेत जारी होने के बाद विमान तेजी से नीचे आने लगा। उड़ान पर नजर रखने वाली वेबसाइट फ्लाइटरडार24 के आंकड़ों के अनुसार, विमान कुछ ही मिनटों में करीब 28,000 फीट नीचे आ गया और लगभग 9,000 फीट की ऊंचाई पर पहुंच गया।
विमान उस समय आयरलैंड के ऊपर उड़ रहा था। इतनी तेजी से नीचे आने के बाद उसने शिकागो की दिशा में आगे बढ़ने के बजाय वापस ब्रिटेन की ओर रुख कर लिया। इसके बाद विमान वेल्स के दक्षिणी हिस्से और दक्षिण-पश्चिमी इंग्लैंड के ऊपर से गुजरा। लंदन लौटते समय उसने इंग्लिश चैनल के ऊपर कई चक्कर भी लगाए। करीब 4 घंटे 47 मिनट हवा में रहने के बाद विमान दोबारा हीथ्रो हवाई अड्डे पर उतर गया।
बता दें कि अभी तक ब्रिटिश एयरवेज की ओर से आपात स्थिति की असली वजह सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए विमान के अचानक नीचे आने का कारण किसी तकनीकी खराबी, चिकित्सा समस्या या किसी अन्य वजह से जुड़ा था, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। केवल उड़ान के आंकड़ों के आधार पर किसी एक कारण को जिम्मेदार मानना सही नहीं होगा।
विमान का वापस लौटने के बाद कुछ समय तक चक्कर लगाना ईंधन प्रबंधन से भी जुड़ा हो सकता है। बड़े यात्री विमानों का उड़ान भरते समय वजन काफी ज्यादा होता है। अगर किसी विमान को उड़ान भरने के तुरंत बाद वापस उसी हवाई अड्डे पर उतरना पड़े तो उसका वजन कम करना जरूरी हो सकता है। इसके लिए स्थिति के अनुसार विमान कुछ समय तक चक्कर लगाकर ईंधन खर्च कर सकता है या विशेष परिस्थितियों में अतिरिक्त ईंधन बाहर निकाल सकता है। हालांकि बीए295 के मामले में ऐसा किया गया या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
फिलहाल बीए295 के सभी यात्रियों और चालक दल की स्थिति तथा आपात स्थिति की वजह को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। विमान के सुरक्षित वापस लौटने के बाद अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि उड़ान के दौरान आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी थी और विमान को इतनी तेजी से नीचे लाने की जरूरत क्यों पड़ी थी, ताकि आगे ऐसी घटनाओं से बचाव किया जा सके।
Nirmala Sitharaman बोलीं, India US Trade वार्ता में ठहराव, आगे छूट देना कठिन
नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के लिए बातचीत अब् भी जारी है, लेकिन ऐसा लगता है कि दोनों पक्ष ठहराव के दौर में पहुंच गए हैं, जहां से किसी भी पक्ष की ओर से आगे और रियायतें देने की गुंजाइश सीमित है। उन्होंने यहां म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में कहा, समझौते के लिए बातचीत अब भी जारी है, हालांकि हमारा मानना है कि दोनों पक्ष ऐसे ठहराव पर पहुंच गए हैं, जिसके आगे कुछ देना या लेना बहुत मुश्किल हो सकता है। लेकिन शायद, अगर आगे बढ़ने की कोई गुंजाइश निकलती है, तो दोनों पक्ष उस पर विचार करेंगे।
सीतारमण ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की एक प्रमुख विशेषता भारत के पक्ष में व्यापार असंतुलन का होना है, और अमेरिका अपने इस घाटे को कम करना चाहता है। उन्होंने कहा, स्वाभाविक रूप से घाटा उनकी ओर है, या कहें कि व्यापार संतुलन अमेरिका के लिए प्रतिकूल है, इसलिए वे इस असंतुलन को कम करना चाहेंगे। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका अपने नजरिये से उस नुकसान की भरपाई करना चाहेगा जो उसके अनुसार उसने पिछले कुछ वर्षों में झेला है।
चीन के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों से तुलना करते हुए सीतारमण ने कहा कि पारंपरिक रूप से व्यापार असंतुलन को बातचीत के जरिये सुलझाया जाता रहा है, जिसमें देश अपनी वस्तुओं और सेवाओं के लिए अधिक बाजार पहुंच की मांग करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि अब व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए शुल्क का इस्तेमाल तेजी से एक हथियार के रूप में किया जा रहा है। वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘अब इस असंतुलन को अन्य तरीकों से हल करने का प्रयास किया जा रहा है, जहां शुल्क एक हथियार बन गए हैं।
शुल्क कभी बातचीत का एक जरिया हुआ करता था और इसका एक तय ढांचा था, जिसके तहत इसे लागू किया जाता था। आज ढांचा तो मौजूद है, लेकिन शुल्क का मनमाना इस्तेमाल हो रहा है।’’ चीन के साथ भारत के बढ़ते व्यापार असंतुलन का उदाहरण देते हुए सीतारमण ने कहा, जब आप व्यापार असंतुलन की बात करते हैं, तो इसे बातचीत के जरिये ही हल किया जा सकता है। पिछले सप्ताह, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा था कि अमेरिका और भारत एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन कोई समझौता अभी तुरंत होने की संभावना नहीं है।
हालांकि, उन्होंने संकेत दिया था कि प्रगति की समीक्षा के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बहुत जल्द एक बार फिर फोन पर बातचीत कर सकते हैं। भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) व्यापार समझौते पर सीतारमण ने कहा कि यह इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण है कि भारत किस तरह व्यापार समझौतों पर बातचीत कर उन्हें अंतिम रूप दे रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि इसे मदर ऑफ ऑल डील्स कहना बिल्कुल उचित है, क्योंकि यह कुल दो अरब लोगों के बीच का समझौता होने जा रहा है, और इस समझौते के दायरे में दुनिया का लगभग एक-चौथाई व्यापार तथा वैश्विक जीडीपी का एक-चौथाई हिस्सा शामिल होगा।
उन्होंने आगे कहा, आखिरकार आप राष्ट्रीय हितों को बनाए रखने के लिए समझौते को इस तरह ढाल रहे हैं ताकि एक बेहद चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल में टिके रहा जा सके, जहां विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) से जुड़े किसी भी नियम का सम्मान नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि हर किसी ने नियमों की अनदेखी की है।
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