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British Airways Flight Emergency: हवा में 28 हजार फीट नीचे आया विमान, आयरलैंड के ऊपर मचा हड़कंप; लंदन लौटी फ्लाइट

ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट BA295 में आयरलैंड के ऊपर आपातकाल की घोषणा हुई. 7700 कोड एक्टिव होने के बाद विमान 28 हजार फीट नीचे आ गया और वापस लंदन लौटा.

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Jamia Violence: Delhi High Court ने पुलिस कार्रवाई की SIT जांच की मांग वाली याचिकाएं खारिज कीं

नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 2019 में हुई हिंसा के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस की कथित बर्बर कार्रवाई की एसआईटी (विशेष जांच दल) से जांच कराने के अनुरोध वाली याचिकाएं सोमवार को खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि जब कोई जमावड़ा शांतिपूर्ण नहीं रह जाता, तो पुलिस से मूकदर्शक बने रहने की उम्मीद नहीं की जा सकती। उच्च न्यायालय ने कहा कि पुलिस शुरू में विश्वविद्यालय में दाखिल नहीं हुई थी, जब जमावड़ा शांतिपूर्ण और जामिया परिसर तक ही सीमित था।

उसने कहा कि पुलिसकर्मी वहां तभी दाखिल हुए, जब विश्वविद्यालय के बाहर और आसपास के क्षेत्र में हालात बिगड़ गए तथा भीड़ परिसर के अंदर पहुंच गई। न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने अपने फैसले में कहा, “इसलिए पुलिस के हस्तक्षेप को उस समय की कानून-व्यवस्था की स्थिति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।” पीठ ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन का अधिकार विवाद का विषय नहीं है और संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) और 19(1)(बी) अभिव्यक्ति की आजादी तथा बिना हथियारों के शांतिपूर्वक इकट्ठा होने के अधिकार की रक्षा करते हैं, बशर्ते उचित प्रतिबंधों का पालन किया जाए। उसने स्पष्ट किया कि इन अधिकारों के तहत हिंसा या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की इजाजत नहीं है।

पीठ ने कहा, “जब कोई जमावड़ा शांतिपूर्ण नहीं रह जाता और हालात हिंसा, संज्ञेय अपराध या जानमाल को खतरे का संकेत देते हैं, तो पुलिस से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह निष्क्रिय रहे या सिर्फ मूकदर्शक बनकर देखती रहे, भले ही वह जमावड़ा विश्वविद्यालय परिसर के अंदर ही क्यों न हुआ हो।” उसने कहा, “दिसंबर 2019 की घटनाओं ने निस्संदेह लोगों के बीच काफी चिंता पैदा की और विभिन्न पक्षों के आचरण को लेकर गंभीर आरोपों को जन्म दिया।” पीठ ने केवल शिक्षण संस्थानों के भीतर पुलिस की कार्रवाई को नियंत्रित करने वाले अलग नियम बनाने से इनकार कर दिया। उसने कहा कि 15 दिसंबर 2019 को हुए विरोध-प्रदर्शन धीरे-धीरे विश्वविद्यालय परिसर के बाहर आसपास के क्षेत्र में हिंसा में बदल गए, जिसमें पथराव, बसों और अन्य वाहनों में आगजनी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और पुलिसकर्मियों पर हमले जैसी घटनाएं शामिल थीं। उच्च न्यायालय ने कहा कि पुलिस ने जिस तरह से हस्तक्षेप किया, उसमें भी कुछ कमियां थीं।

उसने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के निष्कर्षों का जिक्र किया, जिनमें साफ तौर पर कहा गया था कि विश्वविद्यालय के पुस्तकालय के अंदर आंसू गैस के गोले दागने से बचा जा सकता था। उच्च न्यायालय ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा और अकादमिक गतिविधियों की जगह है, इसलिए पुलिस के अधिकारों का इस्तेमाल करते समय इस अहम बात को हमेशा ध्यान में रखा जाना चाहिए। पीठ ने कहा, “हालांकि, इस बात का यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि पुलिस के हर हालात में विश्वविद्यालय परिसर में दाखिल होने पर रोक है।

जहां हालात में तुरंत दखल देने की जरूरत हो, वहां पुलिस से सिर्फ इसलिए बाहर खड़े रहने की उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह परिसर किसी शैक्षणिक संस्थान का है।” उच्च न्यायालय ने कहा कि पुलिस के हस्तक्षेप से पहले विश्वविद्यालय के अधिकारियों को सूचित किया जाना चाहिए और जहां हालात इजाजत दें, उनसे सलाह भी ली जानी चाहिए। उसने कहा कि यहां तक कि ‘आदर्श पुलिस नियमावली’ में भी यह प्रावधान है कि परिसर में प्रवेश करने से पहले, जहां तक संभव हो, शिक्षण संस्थान के प्रमुख को सूचित किया जाए। अदालत ने कहा, “हालांकि, यह आवश्यकता हर स्थिति में एक अनिवार्य शर्त के तौर पर लागू नहीं की जा सकती।

जानमाल को तत्काल खतरा, गैरकानूनी जमावड़ा, संज्ञेय अपराध या तेजी से बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति ऐसी हो सकती है, जिसमें पहले से सूचना देने या अनुमति लेने के लिए समय ही न हो।” उसने कहा, “पुलिस को संस्थान के अलावा अन्य स्रोतों से भी जानकारी मिल सकती है। हालांकि, इससे पुलिस की कार्रवाई जांच-पड़ताल के दायरे से बाहर नहीं हो जाती।” जामिया मिल्लिया इस्लामिया में दिसंबर 2019 में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। अदालत में याचिका दायर करने वालों में जामिया के छात्र, अधिवक्ता, ओखला (जहां विश्वविद्यालय स्थित है) के निवासी और संसद के सामने स्थित जामा मस्जिद के इमाम शामिल थे।

पीठ ने याचिकाएं यह कहते हुए खारिज कर दी कि नये सिरे से स्वतंत्र जांच का आदेश देने, जांच स्थानांतरित करने, मुआवजा देने, नए दिशा-निर्देश तैयार करने या आगे कोई और निर्देश जारी करने का कोई आधार नहीं है। उच्च न्यायालय ने कहा कि ये घटनाएं 15 दिसंबर 2019 को हुई थीं और तब से छह साल से ज्यादा समय बीत चुका है। उसने इस बात पर भी गौर किया कि आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे, दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की एसआईटी ने जांच की थी और संबंधित अदालतों में आरोपपत्र दाखिल किए गए थे।

अदालत ने कहा कि एनएचआरसी ने भी हिंसा की जांच की थी और मई 2020 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। उसने कहा, “हमारे संज्ञान में बाद की कोई ऐसी घटना या सामग्री नहीं लाई गई है, जिससे पता चले कि इन याचिकाओं में बताए गए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन जारी रहा या दोहराया गया। इसलिए हमारा सुविचारित मत है कि शैक्षणिक संस्थानों के भीतर होने वाले प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई को नियंत्रित करने के लिए नये दिशा-निर्देश तैयार करने की जरूरत नहीं है।

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  Sports

'इतिहास आपको बेहतर नजरिए से देखेगा', Ajit Agarkar के इस्तीफे पर Gautam Gambhir का आलोचकों को करारा जवाब, लिखा इमोशनल पोस्ट

भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के चीफ सेलेक्टर के रूप में अजीत अगरकर का कार्यकाल खत्म होने पर उन्हें भावुक श्रद्धांजलि दी है। इसके साथ ही गंभीर ने अगरकर के आलोचकों पर सीधा तंज कसते हुए टीम इंडिया की हालिया सफलताओं में उनके योगदान को सराहा है। अजीत अगरकर का 3 साल से अधिक का सफल कार्यकाल 4 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गया, जिसके बाद BCCI ने मुख्य चयनकर्ता पद के लिए नए आवेदनों की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

X पर अपने संदेश में गंभीर ने अगरकर के आलोचकों पर तंज कसते हुए कहा कि पिछले तीन सालों में टीम इंडिया को जो सफलता मिली, वह 'टीम को सबसे पहले रखने' के रवैये और पक्के इरादे की वजह से मिली।

अगरकर, जिनका कार्यकाल इस हफ़्ते की शुरुआत में खत्म हुआ, उन चीफ सेलेक्टर में से थे जो बड़े और कभी-कभी अलोकप्रिय फैसले लेने से नहीं हिचकिचाते थे। उनके कार्यकाल में भारत ने टेस्ट क्रिकेट में विराट कोहली और रोहित शर्मा से आगे बढ़कर नए खिलाड़ियों को मौका दिया, जबकि सूर्यकुमार यादव को भारत को 2026 T20 वर्ल्ड कप का खिताब जिताने के कुछ हफ़्ते बाद ही T20I टीम से बाहर कर दिया गया।

गंभीर ने X पर लिखा, "प्रिय अजीत भाई, आपके साथ काम करना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात रही। वे 3 ICC ट्रॉफियां आपके पक्के इरादे का सबूत हैं: टीम सबसे पहले और टीम हमेशा आगे... मैं यह ज़रूर कहूंगा कि इतिहास आपको बेहतर नज़रिए से देखेगा। हर चीज़ के लिए धन्यवाद। आपके भविष्य के कामों के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं!!"

सिलेक्शन कमेटी ने भविष्य के लिए टीम तैयार करने पर भी ज़ोर दिया, जिसमें अगरकर ने अक्सर जाने-माने नामों के बजाय युवा खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी। हर फैसला सही नहीं रहा और उनके कुछ फैसलों की आलोचना भी हुई, लेकिन उनका मुख्य नज़रिया एक जैसा रहा: भारत पीछे मुड़कर देखने के बजाय आगे बढ़ता रहा। अगरकर के जाने के तुरंत बाद भुवनेश्वर कुमार की T20I टीम में वापसी उस सोच में एक बड़ा बदलाव था, क्योंकि यह अनुभवी खिलाड़ी लगभग चार साल बाद टीम में लौटा था। गवर्निंग बॉडी ने मंगलवार को एप्लीकेशन का नोटिस जारी किया, जो अगरकर का चेयरमैन के तौर पर कार्यकाल 4 अक्टूबर को खत्म होने के ठीक 48 घंटे बाद आया। अगरकर जुलाई 2023 में सीनियर पुरुष सिलेक्शन पैनल की कमान संभालने के बाद से इसके प्रमुख थे, लेकिन खबरों से पता चला था कि वह अपना कार्यकाल आगे बढ़ाने में दिलचस्पी नहीं रखते थे।

अगरकर के कार्यकाल के दौरान ही गंभीर भारतीय टीम के कोच बने और दोनों ने मिलकर चैंपियंस ट्रॉफी 2025 और T20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए काम किया।

चीफ सिलेक्टर के तौर पर अगरकर का कार्यकाल
अगरकर ने 4 जुलाई, 2023 को भारत के सीनियर पुरुष सिलेक्शन पैनल की कमान संभाली और चेयरमैन के तौर पर तीन साल से कुछ ज़्यादा समय तक काम किया, उनका कार्यकाल अक्टूबर 2026 में खत्म हुआ। उनका कार्यकाल भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल दौर में से एक रहा, जिसमें टीम ने तीन ICC ट्रॉफियां जीतीं: 2024 T20 वर्ल्ड कप, 2025 चैंपियंस ट्रॉफी और 2026 T20 वर्ल्ड कप। उनके कार्यकाल के दौरान भारत 2023 ODI वर्ल्ड कप के फाइनल में भी पहुंचा।

अगरकर के कार्यकाल के दौरान सिलेक्शन कमेटी मीडिया के लिए ज़्यादा सुलभ रही; भारत के पूर्व ऑलराउंडर सिलेक्शन मीटिंग के बाद नियमित रूप से प्रेस से बात करते थे और बड़े फैसलों के पीछे की सोच बताते थे। अगरकर ने खुद इस काम की प्रकृति को समझा और कहा कि हर किसी को खुश करना नामुमकिन है और भारतीय क्रिकेट में लोगों की दिलचस्पी को देखते हुए सिलेक्टर्स को आलोचना का सामना करना ही पड़ेगा।

हालांकि, उनका कार्यकाल विवादों से अछूता नहीं रहा। सबसे बड़ी चर्चाओं में से एक थी रोहित शर्मा और विराट कोहली के ODI भविष्य को लेकर अनिश्चितता, क्योंकि भारत 2027 वर्ल्ड कप की ओर देख रहा था। अक्टूबर 2025 में, अगरकर ने सार्वजनिक रूप से इन दोनों दिग्गजों के बने रहने का समर्थन किया और कहा कि उनके शानदार ODI रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें "ट्रायल" पर नहीं रखा जाएगा। 2026 में अनिश्चितता का माहौल फिर से बन गया, खासकर रोहित के भविष्य को लेकर, क्योंकि अगरकर और BCCI के बीच इस बात पर मतभेद की खबरें थीं कि इस अनुभवी खिलाड़ी के वनडे करियर को कैसे संभाला जाए। आगे चलकर यह मुद्दा अगरकर का कार्यकाल खत्म होने की वजहों में से एक बना।

ऐसे मौके भी आए जब चयनकर्ताओं के फैसलों की प्रशंसकों और क्रिकेट जगत के कुछ हिस्सों ने आलोचना की, खासकर तब जब जाने-माने खिलाड़ियों को धीरे-धीरे टीम से बाहर किया गया।

Wed, 07 Oct 2026 14:14:00 +0530

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