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Arijit Singh New Song: मुझे इश्क हुआ है या होने वाला है…रिटायरमेंट के बाद आया अरिजीत सिंह का नया गाना, सुनकर मदहोश हो जाएंगे फैंस

Arijit Singh New Song: अरिजीत सिंह ने पिछले महीने के आखिर में ऐलान किया था कि वो फिल्मों में प्लेबैक सिंगर के तौर पर अब गाना नहीं गाएंगे. अब उनका नया गाना रिलीज़ हुई है. माना जा रहा है कि ये उनका आखिरी गाना भी हो सकता है. ये गाना विशाल भारद्वाज की फिल्म 'ओ रोमियो' का है.

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बजट 2026-27 में 'तात्कालिक राहत' से हटकर 'लंबी अवधि की सोच' पर जोर: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 2 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय बजट 2026–27 में सरकार ने लंबी अवधि की सोच को प्राथमिकता दी है। इसके लिए पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) बढ़ाया गया है और खर्च के तरीके में सुधार किया गया है।

सोमवार को जारी क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में कहा गया है कि बजट का रुझान अब लंबे समय की योजनाओं की ओर बढ़ रहा है। इसमें सुधारों, कारोबार करने में आसानी (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) और सबको साथ लेकर चलने वाली ग्रोथ को खास जगह दी गई है।

रिपोर्ट में याद दिलाया गया कि कोविड-19 महामारी के तुरंत बाद सरकार का मुख्य ध्यान इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने और महामारी के कारण अर्थव्यवस्था व लोगों की भलाई पर पड़े असर को कम करने पर था।

लेकिन जैसे-जैसे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत और स्थिर हुई, वैसे-वैसे विकास के लिए सीधे और अल्पकालिक समर्थन की जरूरत कम होती गई। इसी वजह से बजट का फोकस अब लंबे समय की ग्रोथ पर आ गया है।

सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को और मजबूत करने पर ध्यान दिया है, ताकि भविष्य में विकास के अगले चरण के लिए मंच तैयार हो सके।

रिपोर्ट में कहा गया है कि राजकोषीय समेकन यानी फिस्कल घाटा कम करने की दिशा में हुई प्रगति और मध्यम अवधि के कर्ज लक्ष्य की ओर बढ़ने से सरकार को अल्पकालिक सोच से आगे देखने की गुंजाइश मिली है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस वित्त वर्ष में भारत की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7.4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जो पिछले वित्त वर्ष के 6.5 प्रतिशत से ज्यादा है। इसकी वजह उपभोग को समर्थन देने वाली नीतियां और टैक्स में राहत है, जिससे लोगों का खर्च बढ़ा।

बजट में उपभोग संबंधी नीतियां जारी रखी गई हैं, हालांकि कम आय वाले परिवारों के लिए केंद्रीय कल्याण योजनाएं चलती रहेंगी, जिनमें रोजगार और संपत्ति बनाने वाली योजनाओं पर ज्यादा जोर दिया गया है, भले ही सब्सिडी में कमी की गई हो।

रिपोर्ट में बताया गया है कि खर्च की गुणवत्ता बेहतर हुई है। केंद्र सरकार का पूंजीगत खर्च जीडीपी का 3.1 प्रतिशत बना हुआ है, जबकि राज्यों को दी गई मदद जोड़ने पर कुल प्रभावी पूंजीगत खर्च जीडीपी का लगभग 4.4 प्रतिशत हो जाता है।

रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले कुछ वर्षों में राजस्व व्यय को पूंजीगत खर्च की ओर मोड़ा गया है। लेकिन ब्याज भुगतान बढ़ने के कारण आगे राजस्व खर्च में बड़ी कटौती करना मुश्किल हो सकता है।

पूंजीगत व्यय में 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह वित्त वर्ष 2026-27 में बढ़कर 12.2 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो हाल के वर्षों के सबसे बड़े बजट प्रावधानों में से एक है और जीडीपी का करीब 4.4 प्रतिशत है।

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2027 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रखा है, जबकि वित्त वर्ष 2026 के लिए यह 4.4 प्रतिशत आंका गया था। वहीं, नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 10 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

--आईएएनएस

डीबीपी/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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  Sports

Smriti Mandhana का बड़ा खुलासा, World Cup के उस एक गलत शॉट ने मुझे सोने नहीं दिया था

आईसीसी महिला विश्व कप 2025 के दौरान भारतीय टीम लगातार तीन मैचों में हार ने टीम की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। इस खराब क्रम की तीसरी हार इंग्लैंड के खिलाफ आई, जहां भारत जीत की मजबूत स्थिति में होने के बावजूद मैच गंवा बैठा था। स्मृति मंधाना ने उस मुकाबले में 88 रनों की अहम पारी खेली थी, लेकिन निर्णायक मोड़ पर उनका आउट होना टीम के हार की वजह बना और इंग्लैंड ने चार रन से मुकाबला जीत लिया था।

गौरतलब है कि मंधाना ने आरसीबी पॉडकास्ट में इस पूरे दौर को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वह विश्व कप में शानदार फॉर्म के साथ आई थीं, लेकिन शुरुआती तीन मैचों में चीजें उनके मुताबिक नहीं रहीं। एकदिवसीय क्रिकेट में शुरुआती ओवरों में विकेट न गंवाने को वह अपनी ताकत मानती हैं, लेकिन उस लय को वह हासिल नहीं कर पा रही थीं।

मौजूद जानकारी के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका से हार के बाद मंधाना ने खुद से सवाल किए कि गलती कहां हो रही है। नेट्स में बल्लेबाजी अच्छी थी, लेकिन मैच में सही फैसले नहीं ले पा रही थीं। इसके बाद एक मैच में 80 रन जरूर बने, जिससे लय लौटती दिखी, लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ हार उन्हें सबसे ज्यादा खली।

मंधाना ने बताया कि उस मैच में गलत शॉट खेलने का अफसोस पूरे सफर तक उनके साथ रहा। उड़ान के दौरान वह किसी से बात नहीं कर सकीं और मानसिक दबाव काफी बढ़ गया था। उन्हें यह डर सता रहा था कि घरेलू विश्व कप में सेमीफाइनल में जगह न बना पाना भारतीय महिला क्रिकेट को वर्षों पीछे धकेल सकता है।

इसके बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबला भारतीय टीम के लिए करो या मरो जैसा था। उसी मैच में मंधाना ने 95 गेंदों पर 109 रन की शानदार पारी खेली। उन्होंने कहा कि मैच की अहमियत और चारों ओर के शोर के बावजूद यह पारी उनके लिए बेहद खास रही।

उन्होंने यह भी कहा कि महिला क्रिकेट को लेकर ट्रोलिंग नई बात नहीं है, लेकिन टीम के तौर पर सभी एक-दूसरे का साथ दे रहे थे। सेमीफाइनल में पहुंचने की जिद ही उन्हें अंदर से खाए जा रही थी और उसी जज्बे ने मैदान पर उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन निकलवाया हैं।
Mon, 02 Feb 2026 22:45:53 +0530

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