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एसटीटी में बढ़ोतरी से घरेलू बचत को सट्टेबाजी से बचाया जा सकेगा : सीईए अनंत नागेश्वरन
नई दिल्ली, 2 फरवरी (आईएएनएस)। मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने सोमवार को कहा कि केंद्रीय बजट 2026–27 में डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) बढ़ाने का मकसद सरकार की कमाई बढ़ाना नहीं है, बल्कि लोगों की मेहनत से कमाई गई बचत को ज्यादा सट्टेबाजी वाले सौदों से बचाना है।
उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, एसटीटी बढ़ाने का उद्देश्य राजस्व जुटाना नहीं है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि घरों की मेहनत की कमाई का इस्तेमाल संपत्ति बढ़ाने में हो। सेबी पहले ही बता चुका है कि फ्यूचर्स और ऑप्शंस (एफएंडओ) में लोग कैसे पैसा गंवाते हैं।
रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 में फ्यूचर्स पर एसटीटी को मौजूदा 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं, ऑप्शंस प्रीमियम और ऑप्शन एक्सरसाइज पर एसटीटी को क्रमशः 0.1 प्रतिशत और 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने की बात कही गई है।
बजट पेश होने के बाद ब्रोकरेज से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट की एक बड़ी वजह एसटीटी बढ़ाए जाने को माना गया।
एसटीटी हर लेन-देन पर लगता है, इसलिए दर बढ़ने से उन लोगों के लिए ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी जो बार-बार खरीद-बिक्री करते हैं, खासकर इंट्राडे और ज्यादा टर्नओवर पर आधारित रणनीतियों में। एसटीटी बढ़ने से एक्सचेंज फीस और अन्य शुल्कों के साथ कुल ट्रेडिंग लागत बढ़ जाती है।
इसी तरह, राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने भी बजट के बाद कहा कि एफएंडओ बाजार में ट्रेडिंग का स्तर देश की जीडीपी और असली शेयर बाजार के आकार की तुलना में काफी ज्यादा सट्टेबाजी वाला है।
उन्होंने कहा कि इससे छोटे निवेशकों को भारी नुकसान होता है। सरकार का इरादा सट्टेबाजी को हतोत्साहित करना है। एसटीटी बढ़ाने का फैसला डेरिवेटिव बाजार में सिस्टम से जुड़े जोखिम को संभालने के लिए लिया गया है। उनके मुताबिक, ट्रेडिंग के बड़े वॉल्यूम के मुकाबले एसटीटी की दर अब भी ज्यादा नहीं है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा कि डेरिवेटिव सेगमेंट में एसटीटी में बदलाव एक कोर्स करेक्शन है और इससे सरकार को अतिरिक्त राजस्व भी मिलेगा।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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