Rajpal Yadav को सुप्रीम कोर्ट से कड़ी फटकार, चेक बाउंस मामले में रकम न चुकाने पर जताई नाराजगी
नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने चेक बाउंस के लंबे समय से जारी कई मामलों में एक निजी कंपनी के बकाये की रकम जमा करने का अपना वादा पूरा नहीं करने पर सोमवार को अभिनेता राजपाल यादव को कड़ी फटकार लगाई। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने 15 सितंबर को यादव को दो सप्ताह का आखिरी मौका देते हुए निजी कंपनी को बकाया रकम चुकाने के लिए ठोस प्रस्ताव देने और शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री में दो करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था। सोमवार को अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि दो सप्ताह की अवधि खत्म होने के बावजूद पांच अक्टूबर तक कोई भुगतान नहीं किया गया है।
सुनवाई के दौरान यादव के वकील ने कहा, ‘‘वे (शिकायतकर्ता) गरीब नहीं हैं।’’ इस पर न्यायमूर्ति बागची नाराज हो गए और कहा, ‘‘हो सकता है कि वे आपसे अधिक अमीर हों, लेकिन आपने रकम उनसे हड़पी है... इस अहंकार को सही जगह दिखानी होगी। आपको पता होना चाहिए कि कब मुंह खोलना है। आपकी जगह जेल में है।’’ पीठ ने निर्देश दिया कि मंगलवार तक भुगतान किया जाए और मामले को बुधवार को सुनवाई के लिए पहले मामले के रूप में सूचीबद्ध किया।
पीठ ने कहा कि वह यादव की अपील खारिज कर सकती है, लेकिन ऐसा करने से शिकायतकर्ता के लिए रकम वसूलने की संभावना प्रभावित हो सकती है, इसलिए वह ऐसा करने से हिचक रही है। पीठ ने कहा कि यादव को सोमवार तक भुगतान करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसका पालन नहीं किया। यादव के वकील ने 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की एक प्रति पेश की और कहा कि बैंक में ड्राफ्ट की प्रक्रिया जारी है।
पीठ ने कहा, ‘‘यह असली है या नहीं? हमें नहीं पता।’’ वकील ने जब कहा कि डिमांड ड्राफ्ट बैंक के पास है और उसकी प्रक्रिया जारी है, तो शिकायतकर्ता के वकील ने अभिनेता पर अदालत के निर्देशों का बार-बार पालन नहीं करने का आरोप लगाया। शिकायतकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत सिन्हा ने कहा, ‘‘वह फिल्म अभिनेता हैं।
यहां भी अभिनय कर रहे हैं। उन्हें इस संस्था की गरिमा का कोई सम्मान नहीं है।’’ शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि यादव ने 2010 में एक फिल्म के लिए उन्हें दी गई पांच करोड़ रुपये की वित्तीय मदद के निपटारे के लिए 2013 में 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक दिए थे। कंपनी ने आरोप लगाया कि उक्त चेक बाउंस हो गए।
शिकायतकर्ता के अनुसार, 2012 में दोनों पक्षों के बीच हुए एक समझौते में यादव, उनकी पत्नी और उनकी कंपनी ने ब्याज समेत करीब 11 करोड़ रुपये चुकाने पर सहमति जताई थी। शीर्ष अदालत ने 15 सितंबर को यादव को आत्मसमर्पण करने से मिली छूट को पांच अक्टूबर तक बढ़ा दिया था। पीठ ने तब कहा था, ‘‘वह नाटक करने में माहिर हैं... अदालत के पहले के आदेशों का पालन नहीं किया गया है।’’ पीठ ने कहा था कि यादव के आचरण से विश्वास पैदा नहीं होता, लेकिन उन्हें आखिरी मौका दिया जा रहा है।
यादव की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पी. एस. पटवालिया ने बकाया रकम चुकाने के लिए ठोस प्रस्ताव देने को दो सप्ताह का समय मांगा था और कहा था कि वह अपनी बातों की प्रमाणिकता साबित करने के लिए दो करोड़ रुपये जमा करेंगे। पटवालिया ने कहा था कि यादव साढ़े चार महीने जेल में रहे और मनोरंजन उद्योग में उनके दोस्तों ने उन्हें जमानत दिलाई। शिकायतकर्ता मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिन्हा ने कहा कि उनकी चिंता रकम को लेकर है, क्योंकि यादव ने अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी नहीं की हैं।
Mayawati ने Akash Anand को फिर सौंपी BSP के राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी
लखनऊ, पांच अक्टूबर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सोमवार को एक बार फिर अपना फैसला बदलते हुए अपने भतीजे आकाश आनन्द को पार्टी में वापस शामिल कर लिया और उन्हें बसपा का राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया। बसपा प्रमुख ने सोमवार को अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर एक पोस्ट के जरिए इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘‘बसपा के हित में आकाश आनन्द को पुनः बसपा का राष्ट्रीय संयोजक बनाकर उनको फिर से पार्टी में कार्य करने का मौका दिया जा रहा है।’’ मायावती ने हाल के दिनों में आकाश आनन्द के प्रति नाराजगी जताई थी और बाद में उन्हें माफ भी कर दिया था।
हालांकि, पिछले दिनों उन्होंने कहा था कि अब आकाश आनन्द को दोबारा मौका नहीं दिया जाएगा और अपने छोटे भतीजे तथा आकाश आनन्द के भाई ईशान आनन्द को आगे बढ़ाया था। इससे पहले, मायावती ने अपने ‘अंतिम फैसले’ और ‘‘प्रतिज्ञा’’ के आठ दिन बाद 20 सितंबर को पारिवारिक मामलों को लेकर नया फैसला सुनाते हुए कहा था कि अब उनके छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे आकाश आनन्द और बेटी दीपिका आनन्द को पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा था कि परिवार में से केवल ईशान आनन्द को ही सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाया जाएगा।
मायावती का यह फैसला 12 सितंबर को किए गए उनके एक ‘‘पारिवारिक फैसले’’ के आठ दिन बाद आया था, जिसमें बसपा प्रमुख ने कहा था कि उनके छोटे भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे (आकाश और ईशान) को पार्टी में छोटे या बड़े किसी भी पद पर रहते हुए राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा। मायावती ने दिसंबर 2023 में आकाश आनन्द को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था। हालांकि, 10 सितंबर को उन्होंने आकाश आनन्द को बसपा से पूरी तरह मुक्त कर दिया था और इसकी वजह उनके ससुर एवं पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ को बताया था।
कभी मायावती के बेहद करीबी रहे सिद्धार्थ ने बसपा से निकाले जाने के बाद राजनीति से संन्यास ले लिया है। मायावती ने सोमवार को एक्स पर अपने एक पोस्ट में कहा, ‘‘आकाश आनन्द का व्यक्तित्व पार्टी में काफी हद तक ठीक ही रहा है, लेकिन इनको लेकर पिछले दिनों कुछ ऐसे कारण भी रहे हैं, जिसकी वजह से पार्टी संगठन में कई बार कुछ जरूरी परिवर्तन भी करने पड़े हैं और फिर अंततः आकाश आनन्द के ससुर अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने के लिए मजबूर भी होना पड़ा है।’’ बसपा प्रमुख ने कहा, ‘‘उसके बाद से आकाश आनन्द के व्यक्तित्व व कार्यशैली आदि में काफी कुछ बदलाव भी लोग देख रहे हैं, जिसका खास प्रमाण पार्टी में वापसी हेतु अभी हाल ही में सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर किया गया उनका एक पोस्ट भी है, जिसकी काफी चर्चा भी है।’’ आकाश आनन्द ने दो अक्टूबर को अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर एक पोस्ट में कहा था कि वह किसी अन्य राजनीतिक दल में नहीं जा रहे हैं और बसपा उनके लिए केवल एक पार्टी नहीं, बल्कि उनका परिवार है। आनन्द ने मायावती को अपना राजनीतिक गुरु, प्रेरणा और ‘बुआ मां’ बताते हुए कहा था कि उन्होंने राजनीति में जो कुछ सीखा और किया, वह मायावती के मार्गदर्शन में किया है।
मायावती ने अपने पोस्ट में कहा कि अधिकांश लोगों का यही कहना है कि आकाश आनन्द के अनुरोध को स्वीकार करते हुए उन्हें पहले दी गई जिम्मेदारियों के साथ काम करने का मौका दिया जाए। इसके लिए उनके पिता आनंद कुमार के साथ-साथ छोटे भाई ईशान आनन्द ने भी अपनी सहमति जताई है। ईशान आनन्द ने अपनी ‘‘मिशनरी भावना’’ प्रदर्शित करते हुए कहा है कि वह बिना किसी पद के भी पार्टी में बहनजी के दिशा-निर्देशन में जो भी कार्य सौंपा जाएगा, उसे पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निभाएंगे।
बसपा प्रमुख ने उम्मीद जताते हुए कहा कि ‘‘अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति से संन्यास लेने के बाद से अब पार्टी में सब कुछ ठीक व सुचारू ढंग से चलेगा और पार्टी संगठन में भी बार-बार परिवर्तन नहीं करना पड़ेगा, हालांकि यह काफी कुछ आकाश आनन्द के ऊपर भी निर्भर करेगा।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi










