Mayawati ने Akash Anand को फिर सौंपी BSP के राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी
लखनऊ, पांच अक्टूबर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सोमवार को एक बार फिर अपना फैसला बदलते हुए अपने भतीजे आकाश आनन्द को पार्टी में वापस शामिल कर लिया और उन्हें बसपा का राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया। बसपा प्रमुख ने सोमवार को अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर एक पोस्ट के जरिए इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘‘बसपा के हित में आकाश आनन्द को पुनः बसपा का राष्ट्रीय संयोजक बनाकर उनको फिर से पार्टी में कार्य करने का मौका दिया जा रहा है।’’ मायावती ने हाल के दिनों में आकाश आनन्द के प्रति नाराजगी जताई थी और बाद में उन्हें माफ भी कर दिया था।
हालांकि, पिछले दिनों उन्होंने कहा था कि अब आकाश आनन्द को दोबारा मौका नहीं दिया जाएगा और अपने छोटे भतीजे तथा आकाश आनन्द के भाई ईशान आनन्द को आगे बढ़ाया था। इससे पहले, मायावती ने अपने ‘अंतिम फैसले’ और ‘‘प्रतिज्ञा’’ के आठ दिन बाद 20 सितंबर को पारिवारिक मामलों को लेकर नया फैसला सुनाते हुए कहा था कि अब उनके छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे आकाश आनन्द और बेटी दीपिका आनन्द को पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा था कि परिवार में से केवल ईशान आनन्द को ही सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाया जाएगा।
मायावती का यह फैसला 12 सितंबर को किए गए उनके एक ‘‘पारिवारिक फैसले’’ के आठ दिन बाद आया था, जिसमें बसपा प्रमुख ने कहा था कि उनके छोटे भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे (आकाश और ईशान) को पार्टी में छोटे या बड़े किसी भी पद पर रहते हुए राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा। मायावती ने दिसंबर 2023 में आकाश आनन्द को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था। हालांकि, 10 सितंबर को उन्होंने आकाश आनन्द को बसपा से पूरी तरह मुक्त कर दिया था और इसकी वजह उनके ससुर एवं पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ को बताया था।
कभी मायावती के बेहद करीबी रहे सिद्धार्थ ने बसपा से निकाले जाने के बाद राजनीति से संन्यास ले लिया है। मायावती ने सोमवार को एक्स पर अपने एक पोस्ट में कहा, ‘‘आकाश आनन्द का व्यक्तित्व पार्टी में काफी हद तक ठीक ही रहा है, लेकिन इनको लेकर पिछले दिनों कुछ ऐसे कारण भी रहे हैं, जिसकी वजह से पार्टी संगठन में कई बार कुछ जरूरी परिवर्तन भी करने पड़े हैं और फिर अंततः आकाश आनन्द के ससुर अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने के लिए मजबूर भी होना पड़ा है।’’ बसपा प्रमुख ने कहा, ‘‘उसके बाद से आकाश आनन्द के व्यक्तित्व व कार्यशैली आदि में काफी कुछ बदलाव भी लोग देख रहे हैं, जिसका खास प्रमाण पार्टी में वापसी हेतु अभी हाल ही में सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर किया गया उनका एक पोस्ट भी है, जिसकी काफी चर्चा भी है।’’ आकाश आनन्द ने दो अक्टूबर को अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर एक पोस्ट में कहा था कि वह किसी अन्य राजनीतिक दल में नहीं जा रहे हैं और बसपा उनके लिए केवल एक पार्टी नहीं, बल्कि उनका परिवार है। आनन्द ने मायावती को अपना राजनीतिक गुरु, प्रेरणा और ‘बुआ मां’ बताते हुए कहा था कि उन्होंने राजनीति में जो कुछ सीखा और किया, वह मायावती के मार्गदर्शन में किया है।
मायावती ने अपने पोस्ट में कहा कि अधिकांश लोगों का यही कहना है कि आकाश आनन्द के अनुरोध को स्वीकार करते हुए उन्हें पहले दी गई जिम्मेदारियों के साथ काम करने का मौका दिया जाए। इसके लिए उनके पिता आनंद कुमार के साथ-साथ छोटे भाई ईशान आनन्द ने भी अपनी सहमति जताई है। ईशान आनन्द ने अपनी ‘‘मिशनरी भावना’’ प्रदर्शित करते हुए कहा है कि वह बिना किसी पद के भी पार्टी में बहनजी के दिशा-निर्देशन में जो भी कार्य सौंपा जाएगा, उसे पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निभाएंगे।
बसपा प्रमुख ने उम्मीद जताते हुए कहा कि ‘‘अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति से संन्यास लेने के बाद से अब पार्टी में सब कुछ ठीक व सुचारू ढंग से चलेगा और पार्टी संगठन में भी बार-बार परिवर्तन नहीं करना पड़ेगा, हालांकि यह काफी कुछ आकाश आनन्द के ऊपर भी निर्भर करेगा।
वैश्विक भाषा बन गई है हिंदी: प्रो. संजय द्विवेदी
भोपाल। भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि हिंदी विश्व भाषा बन चुकी है। अनेक देशों में हिंदी को देखा, सुना और पढ़ा जा रहा है। डिजिटल माध्यमों, सोशल मीडिया, सिनेमा और नई तकनीक ने इसके वैश्विक विस्तार को गति दी है।
वे केनरा बैंक, भोपाल के अंचल कार्यालय में आयोजित हिंदी दिवस समारोह और पुरस्कार वितरण कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। अध्यक्षता बैंक के अंचल प्रमुख सत्य प्रकाश सिंह ने की। इस अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के हिंदी दिवस संदेश का वाचन भी किया गया। संचालन राजभाषा अधिकारी खुशबू गुप्ता ने और स्वागत भाषण उप महाप्रबंधक किरीट नागर ने किया। इस मौके पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
प्रो. द्विवेदी ने कहा कि भाषा संवाद का माध्यम होने के साथ संस्कृति, स्मृति और पहचान की संवाहक भी है। हिंदी ने भारत की विविधताओं को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसे सरकारी कामकाज तक सीमित न रखकर ज्ञान, विज्ञान, तकनीक, व्यापार और रोजगार की भाषा बनाना होगा। नई पीढ़ी को हिंदी, आधुनिक तकनीक और वैश्विक ज्ञान से जोड़ना समय की आवश्यकता है। हिंदी का विकास अन्य भारतीय भाषाओं के विरोध में नहीं, बल्कि उनके साथ मिलकर होना चाहिए।
राजभाषा का हो प्रभावी प्रयोग: सिंह
सत्य प्रकाश सिंह ने कहा कि राजभाषा हिंदी का प्रभावी प्रयोग बैंकिंग सेवाओं को सहज, सरल और जनसुलभ बनाने में महत्वपूर्ण है। ग्राहकों से उनकी भाषा में संवाद करने से बैंक और ग्राहकों के बीच आत्मीयता बढ़ती है। उन्होंने कर्मचारियों से हिंदी को दैनिक कार्य-व्यवहार की सहज भाषा के रूप में अपनाने का आह्वान किया।
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