Koel Mallick Joins BJP | कोएल मल्लिक राज्यसभा नामांकन के अगले दिन बीजेपी में हुईं शामिल, कहा- 'खुद को सौभाग्यशाली मानती हूं'
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पूर्व सांसद और बंगाली फ़िल्म अभिनेत्री रुक्मिणी मल्लिक, जिन्हें अभिनेत्री कोएल मल्लिक के नाम से जाना जाता है, ने सोमवार (5 अक्टूबर) को कोलकाता में आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामा। पार्टी ने उन्हें पश्चिम बंगाल में होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया था, जिसके अगले ही दिन उन्होंने यह कदम उठाया।
BJP में शामिल होकर सम्मानित और सौभाग्यशाली महसूस कर रही हूं: कोएल मल्लिक
BJP में शामिल होने के बाद कोएल मल्लिक ने कहा कि पार्टी में शामिल होकर वह सम्मानित, सौभाग्यशाली और खुश महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा, "पिछले कुछ महीनों में राज्य में जो विकास हुआ है, उस पर मुझे गर्व है। मैं जानती हूं कि लोगों की सेवा कैसे की जाती है। मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है।"
कोलकाता में BJP के राज्य मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मल्लिक ने कहा, "संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) की सदस्य बनना और लोगों की भलाई के लिए काम करने का मौका मिलना मेरे लिए सम्मान की बात होगी।"
इस बीच, मल्लिक का BJP में स्वागत करते हुए पार्टी के पश्चिम बंगाल महासचिव शशि अग्निहोत्री ने कहा कि अभिनेत्री सोमवार को राज्यसभा सीट के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगी।
दिग्गज बंगाली फ़िल्म अभिनेता रंजीत मल्लिक की बेटी, कोएल मल्लिक का TMC राज्यसभा सांसद के तौर पर कार्यकाल 6 अप्रैल से 16 जुलाई तक बहुत छोटा रहा। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी की 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।
राज्यसभा चुनाव
राज्य की एकमात्र खाली राज्यसभा सीट के लिए चुनाव 16 अक्टूबर को होना है, साथ ही उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की 11 अन्य राज्यसभा सीटों के लिए भी चुनाव होंगे। 16 जुलाई, 2026 को रुक्मिणी मल्लिक (जिन्हें कोयल मल्लिक के नाम से भी जाना जाता है) के राज्यसभा से इस्तीफ़ा देने के बाद बंगाल की सीट खाली हो गई। उनका कार्यकाल असल में 2 अप्रैल, 2032 को खत्म होने वाला था।
कोयल मल्लिक जुलाई 2026 में राज्यसभा से इस्तीफ़ा देने वाली चौथी सांसद थीं। इससे पहले सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बारिक ने भी उच्च सदन से इस्तीफ़ा दिया था। बाद में ये तीनों बीजेपी में शामिल हो गए और दोबारा चुने गए। पश्चिम बंगाल विधानसभा में बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत है। राज्य विधानसभा में अपनी मज़बूत स्थिति के कारण पार्टी पश्चिम बंगाल की राज्यसभा सीट जीतने की स्थिति में है।
2020 Delhi Riots Case | नेता बच गए या याचिका में दम नहीं था? 2020 दिल्ली दंगों में 'हेट स्पीच' की FIR मांग पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला!
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों और दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के दौरान जामिया मिलिया इस्लामिया में हुई हिंसा से जुड़ी याचिकाओं के पूरे समूह को खारिज कर दिया है। इन याचिकाओं में नेताओं के खिलाफ कथित नफरती भाषण (Hate Speech) के लिए FIR दर्ज करने, स्वतंत्र एसआईटी (SIT) का गठन करने और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की गई थी। जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की बेंच ने फैसला सुनाते हुए याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि याचिकाओं के समूह को दो हिस्सों में बांटा गया था - एक उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित और दूसरा जामिया मिलिया हिंसा से संबंधित। बेंच ने कहा, "फैसले में बताई गई वजहों से, सभी याचिकाएं खारिज की जाती हैं।"
याचिकाओं में नेताओं के खिलाफ कथित हेट स्पीच के लिए FIR की मांग की गई थी
उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित याचिकाओं में राजनीतिक नेताओं के खिलाफ हिंसा के संबंध में कथित हेट स्पीच के लिए FIR दर्ज करने के निर्देश देने की मांग भी शामिल थी।
याचिकाओं में दंगों की जांच के लिए SIT, जांच आयोग या फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाने की भी मांग की गई थी। कुछ याचिकाओं में हिंसा में शामिल होने के आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ प्रभावित लोगों के इलाज और मुआवजे से संबंधित निर्देश देने की भी मांग की गई थी।
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इसलिए, राजनीतिक नेताओं के खिलाफ FIR की मांग करने वाली याचिकाएं 2020 के दंगों से संबंधित याचिकाओं के व्यापक समूह का हिस्सा थीं। हालांकि, हाई कोर्ट ने सोमवार को याचिकाओं के इस समूह को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला 24 जुलाई को सुरक्षित रख लिया था। खारिज करने की वजहों को बताने वाले विस्तृत आदेश का इंतजार है।
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2020 के दिल्ली दंगों के दौरान क्या हुआ था?
नागरिकता कानून के विरोध के बीच 24 फरवरी, 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें हुईं। कोर्ट के सामने पेश की गई जानकारी के अनुसार, हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौत हुई और लगभग 700 लोग घायल हुए। दंगों से संबंधित याचिकाओं में हिंसा की स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी, जिसमें SIT, जांच आयोग या फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी के माध्यम से जांच शामिल थी। कुछ याचिकाकर्ताओं ने उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ़ FIR दर्ज करने की भी मांग की, जिन पर हिंसा के दौरान गलत काम करने का आरोप था। याचिकाओं में दंगों से प्रभावित लोगों के इलाज और मुआवज़े से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए।
जामिया हिंसा से जुड़ी अलग-अलग याचिकाएं
दिल्ली हाई कोर्ट के सामने याचिकाओं का दूसरा सेट उस हिंसा से जुड़ा था जो दिसंबर 2019 में CAA के खिलाफ़ विरोध-प्रदर्शनों के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया में हुई थी।
याचिकाकर्ताओं ने पुलिसकर्मियों द्वारा छात्रों के साथ की गई कथित बर्बरता की जांच के लिए एक ऐसी SIT की मांग की थी जो पुलिस और केंद्र सरकार से स्वतंत्र हो। सोमवार को अपना फ़ैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट ने मामलों के इन दोनों सेटों पर अलग-अलग सुनवाई की। बेंच ने कहा, "इस मामले के समूह को दो हिस्सों में बांटा गया है: एक उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगों के लिए और दूसरा जामिया मिलिया दंगों के लिए।"
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अब जब याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं, तो उम्मीद है कि विस्तृत फ़ैसले में कोर्ट के इस निर्णय के पीछे के कारण बताए जाएंगे।
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