सीजीटीएन सर्वे : अमेरिकी संघीय सरकार का राज्यों के साथ कड़ा टकराव
बीजिंग, 1 फरवरी (आईएएनएस)। “आप हमसे शांति मांगते हैं और डोनट की दुकान से बाहर निकलते समय सड़कों पर हमारे चेहरे पर गोली लग जाती है।” यह शिकायत अमेरिकी मिनेसोटा राज्य के गवर्नर टिम वाल्ज की है, जहां एक महीने के अंदर, मिनेसोटा में अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन के कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने दो अमेरिकी नागरिकों को गोली मार दी।
यह बात अमेरिकी फेडरल सरकार और राज्य सरकारों के बीच बढ़ती दरार और टकराव को दिखाती है। सीजीटीएन द्वारा दुनिया भर के नेटिजन्स के लिए जारी एक सर्वे से पता चलता है कि 92.2 जवाब देने वालों का मानना है कि अमेरिकी समाज एक ऐसे बुरे चक्कर में फंस गया है, जिसमें “हिंसक घटनाएं सख्त कंट्रोल को बढ़ावा देती हैं, और सख्त कंट्रोल और ज्यादा हिंसक घटनाओं को बढ़ाते हैं। अमेरिका अमेरिका पर हमला कर रहा है, की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
लंबे समय से, अमेरिकी संघीय कानून प्रवर्तन अधिकारियों की हिंसक कार्रवाई से पैदा दुखद घटनाएं सामने आती रही हैं। सर्वे में, 88.2 उत्तरदाताओं ने कहा कि हिंसक कानूनी कार्यांवयन अमेरिकी समाज की एक गहरी बीमारी बन गई है, जो नस्लीय भेदभाव, अमीर-गरीब का अंतर और हथियारों के बढ़ते इस्तेमाल जैसे मुद्दों से जुड़ी हुई है, और एक ऐसा बुरा चक्र बना रही है, जिसे तोड़ना मुश्किल है। इस बीच कानून ठीक से लागू न किए जाने से अमेरिकी समाज में सुरक्षा की भावना खत्म हो रही है।
93.6 उत्तरदाताओं का मानना है कि वर्तमान अमेरिकी प्रणाली कानून प्रवर्तन अधिकारियों के पक्ष में प्रणालीगत पूर्वाग्रह दिखाती है, जो ताकत का गलत इस्तेमाल करते हैं। 93.4 का मानना है कि यह घटना किसी भी तरह से कोई अकेला सार्वजनिक सुरक्षा मामला नहीं है, बल्कि यह अमेरिका में सामाजिक अव्यवस्था, संस्थागत विफलता और राजनीतिक ध्रुवीकरण का नतीजा है। 89 लोगों का मानना है कि अमेरिका अब सुरक्षित नहीं रहा।
इसके अलावा इस सर्वे में 91.1 जवाब देने वालों का मानना है कि अमेरिकी राज्य सरकारों और फेडरल सरकार के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है और 79.6 लोग इस बात से बहुत चिंतित हैं कि ऐसी ही घटनाएं होती रहेंगी।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत ने नेपाल और अफगानिस्तान के लिए बजट आवंटन बढ़ाया, बांग्लादेश के लिए राशि में कटौती
नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत ने अफगानिस्तान, मंगोलिया और नेपाल जैसे कई पड़ोसी देशों के लिए विकास सहायता के बजट में बढ़ोतरी की है, जबकि बांग्लादेश के लिए आवंटन में 60 करोड़ रुपये की कटौती की गई है।
भूटान के लिए भारत की वित्तीय सहायता बढ़ाकर 2,288.56 करोड़ रुपये कर दी गई है। अफगानिस्तान के लिए आवंटन को 100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 150 करोड़ रुपये किया गया है, जिससे संकेत मिलता है कि वहां भारत की नई विकास परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
नेपाल के लिए 800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले बजट से 100 करोड़ रुपये अधिक है। श्रीलंका के लिए 400 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले बजट में 300 करोड़ रुपये थे। मंगोलिया के लिए सहायता राशि में भी वृद्धि करते हुए इसे 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 25 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
वहीं, बांग्लादेश के लिए वित्तीय सहायता को 120 करोड़ रुपये से घटाकर 60 करोड़ रुपये कर दिया गया है। मालदीव के लिए आवंटन 600 करोड़ रुपये से घटाकर 550 करोड़ रुपये किया गया है, जबकि म्यांमार के लिए सहायता 350 करोड़ रुपये से घटाकर 300 करोड़ रुपये कर दी गई है।
इसके अलावा, यूरेशियाई देशों के लिए भारत की वित्तीय सहायता घटाकर 38 करोड़ रुपये कर दी गई है, जबकि लैटिन अमेरिकी देशों के लिए सहायता बढ़ाकर 120 करोड़ रुपये कर दी गई है।
ताजा केंद्रीय बजट में विदेश मंत्रालय (एमईए) के कुल बजट में भी बढ़ोतरी की गई है। मंत्रालय का बजट 20,516.62 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 22,118.97 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
रविवार को संसद में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ-साथ गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने के लिए तीन ‘कर्तव्यों’ का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि सरकार के ‘संकल्प’ को पूरा करने और यह बजट ‘कर्तव्य भवन’ में तैयार किए जाने के कारण, “हम तीन कर्तव्यों से प्रेरित हैं।”
--आईएएनएस
डीएससी
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