आज वित्त मंत्री निर्माला सीतारमण 9वीं बार बजट को पेश किया है। गौरतलब है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की 75 वर्षों से अधिक की यात्रा में केंद्रीय बजट सिर्फ आमदनी और खर्चे का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि 1947 से लेकर 2026 तक भारत की अर्थव्यवस्था की नींव किसने संभाली हैं। आखिर भारतीय राजनीति के किन-किन दिग्गजों ने भारत के वित्त मंत्री की भूमिका निभाई और अर्थव्यवस्था को मौजूदा स्तर पहुंचाने में क्या योगदान दिया।
देश का पहला बजट नवंबर 1947 में पेश किया गया
आपको बता दें कि, आजादी के बाद भारत में आर्थिक चुनौतियां काफी थी। देश का पहला बजट नवंबर 1947 में पेश किया गया था। तब से लकेर 2026 तक की इस लंबी यात्रा में कई वित्त मंत्रियों ने अपनी नीतियों से भारत को एक ग्लोबल आर्थिक शक्ति बनाने के लिए मुख्य योगदान दिया है। तो चलिए आपको एक-एक करके बताते हैं 1947 से लेकर 2026 तक बजट किन-किन लोगों ने पेश किया है।
आरके शनमुखम चेट्टी (15 अगस्त 1947- 17 अगस्त 1948)
देश का पहले वित्त मंत्री आरके शनमुखम चेट्टी थे, जिन्होंने एक महीने तक केसी नियोगी ने कमान संभाली है। इनका कार्यकाल 15 अगस्त 1947- 17 अगस्त 1948 तक है। चेट्टी ने देश का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को पेश किया था। पहला बजट 171.15 करोड़ रुपये की आमदनी और 197.39 करोड़ रुपये खर्च किए थे।
जॉन मथाई (22 सितंबर 1948- 1 जून 1950)
जॉन मथाई देश के पहले रेल मंत्री बनें, इसके बाद वे वित्त मंत्री बने। इनके कार्यकाल के दौरान पंचवर्षीय योजनाएं शुरु की गईं। मथाई ने योजना आयोग की बढ़ती शक्ति के विरोध में इस्तीफा दे दिया था।
सीडी देशमुख ( 1 जून 1950- 1 अगस्त 1956)
चिंतामन द्वारकानाथ देशमुख ने 1951-52 के लिए पहला अंतरिम बजट पेश किया। इनके कार्यकाल में निगम कर सहित सभी करों में समग्र वृद्धि और सभी आयकर और सुपर टैक्स दरों पर 5 प्रतिशत सरचार्ज लगाने का प्रस्ताव रखा था।
टीटी कृष्णमाचारी ( 30 अगस्त 1956- 14 फरवरी 1958, 31 अगस्त 1963- 31 दिसंबर 1965)
टीटी कृष्णमाचारी ने संपत्ति कर और व्यय कर की शुरुआत की। इन्होंने आईडीबीआई, डीवीसी जैसी बड़ी पीएसूय की स्थापना हुई। मुंद्रा घोटाले में नाम आने के बाद वित्त मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
पंडित जवाहर लाल नेहरू
कब-कब वित्त मंत्रालय संभाला- 1 अगस्त 1956-30 अगस्त 1956, 14 फरवरी 1958 - 22 मार्च 1958
पंडित जवाहर लाल नेहरू ने केंद्रीय बजट पेश करने वाले पहले प्रधानमंत्री थे। उन्होंने उपहार कर की शुरुआत की थी। जवाहर लाल नेहरू ने वित्त मंत्री के तौर पर संपदा शुल्क अधिनियम में कुछ संशोधनों का भी प्रस्ताव रखा था।
मोरारजी देसाई
कार्यकाल- 22 मार्च 1958- 31 अगस्त 1963, 13 मार्च 1967 - 16 जुलाई 1969
मोरारजी देसाई ने भारतीय राजनीति में सबसे अधिक 10 बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड बनाया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की स्थापना की, जीवनसाथी भत्ते को हटाया, इसके बाद पति और पत्नी व्यक्तिगत करदाता बने।
सचिन्द्र चौधरी (1 जनवरी 1966- 13 मार्च 1967)
सचिन्द्र चौधरी ने देश में व्यय कर समाप्त किया था। उन्होंने बजट भाषण में कहा, 'इससे होने वाली आय बहुत कम है, जो प्रशासन पर पड़ने वाले बोझ और करदाता को होने वाली असुविधा लिहाज से सही नहीं है।'
इंदिरा गांधी (16 जुलाई 1969- 27 जून 1970)
प्रधानमंत्री इंद्रिरा गांधी ने वित्त मंत्रालय का कार्यभर संभाला। इन्होंने 1970-71 के अपने बजट भाषण में उन्होंने कहा, "ऐसी नीतियां आवश्यक हैं जो विकास की अनिवार्यताओं को जरुरमंदों और गरीबों की भलाई की चिंता के साथ जोड़ती हों।"
यशवंत राव चव्हाण 27 जून 1970- 10 अक्तूबर 1974)
इन्होंने सामान्य बीमा कंपनियों और कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण किया था। यशवंत राव चव्हाण ने कार्यकाल के दौरान अर्थव्यवस्था मंदी में चली गई।
चिदंबरम सुब्रमण्यम ( 10 अक्तूबर 1974 - 24 मार्च 1977)
चिदंबरम सुब्रमण्यम ने ईएसआई, ईपीएफ और पारिवारिक पेंशन जैसी योजनाओं स्थापित कीं। उन सरकारी कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने के लिए एक प्रोत्साहन बोनस योजना शुरु की थी, जो लोग अपने भविष्य निधि खातों से कोई राशि नहीं निकालते थे।
हीरू भाई एम पटेल (26 मार्च 1977 - 24 जनवरी 1979)
पहले गैर-कांग्रेसी वित्त मंत्री हीरू भाई एम पटेल ने अब तक सबसे छोटा बजट भाषण दिया है, जिसमें सिर्फ 800 शब्द ही थे। इन्होंने भारत में कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों में भारतीय कंपनियों की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने की नीति पेश की।
चौधरी चरण सिंह(24 जनवरी 1979 - 16 जुलाई 1979)
वर्ष 1979-80 के दौरान चौधरी चरण सिंह ने उन कार्यक्रमों पर गति और जोर देने का प्रस्ताव रखा। जिनका कृषि विकास और रोजगार को बढ़ावा देने पर वास्तविक प्रभाव पड़ा। इन्होंने एफएमसीजी पर भारी उत्पाद शुल्क लागू किया।
हेमवती नंदन बहुगुणा (28 जुलाई 1979- 19 अक्तूबर 1979)
हेमवती नंदन बहुगुणा भारत के ऐसे वित्त मंत्री रहे जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कभी बजट पेश करने का मौका नहीं मिला। यह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे है।
आर वेंकट रमण (14 जनवरी 1980- 15 जनवरी 1982)
आर. वेंकटरमन ने देश का वित्त मंत्री रहते हुए भी जीवन रक्षक दवाओं, साइकिलों, सिलाई मशीनों और प्रेशर कुकरों पर उत्पाद शुल्क में छूट प्रदान की थी। इन्होंने रेडियो पर लाइसेंस शुल्क भी हटाया। यह आगे चलकर देश के राष्ट्रपति भी बने।
प्रणव मुखर्जी
कार्यकाल- 15 जनवरी 1982 - 31 दिसंबर 1984, 24 जनवरी 2009 - 26 जून 2012)
प्रणव मुखर्जी इंदिरा, राजीव और मनमोहन सरकार में वित्त मंत्री रहे। इन्होंने खाद्य सुरक्षा विधेयक पेश किया गया। उन्होंने घाटा कम करने के लिए सरकारी खर्च में कमी की। ये देश के राष्ट्रपति भी बनें।
विश्वनाथ प्रताप सिंह ( 31 दिसबंर 1984 - 24 जनवरी 1987)
विश्वनाथ प्रताप सिंह ने लघु उद्योग विकास बैंक की घोषणा इनके कार्यकाल में की गई। उन्होंने कई गरीब हितैषी योजनाएं शुरु कीं। सफाईकर्मियों के लिए दुर्घटना बीमा योजना और रिक्शा चालकों के लिए सब्सिडी वाले बैंक ऋण।
राजीव गांधी (24 जनवरी 1987 - 25 जुलाई 1987)
राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री रहने के बाद भी वित्त मंत्रालय को संभाला है। कॉपोरेट टैक्स पेश किया। 1987-88 के बजट भाषण में आर्थिक रुप से कमजोर वर्गों के लिए आवास के लिए एक व्यापक कार्यक्रम शुरु करने का प्रस्ताव रखा।
नारायण दत्त तिवारी ( 25 जुलाई 1987- 25 जून 1988)
नारायण दत्त तिवारी ने निर्यात से होने वाले लाभ पर 100 प्रतिशत आयकर छूट प्रदान की है। उन्होंने मशीनरी और कच्चे माल के आयात को बढ़ावा देने के लिए निर्यात ऋण पर ब्याज दर को 12 प्रतिशत से घटाकर 9 प्रतिशत कर दिया था।
शंकरराव बी चाव्हाण ( 25 जून 1988 - 2 दिसंबर 1989)
इन्होंने अपने कार्यकाल में जवाहरलाल नेहरु रोजगार योजना नामक ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम शुरु हुआ है। इनके कार्यकाल में ही म्यूचुअल फंड और निवेश से होने वाली आय को एक निश्चित सीमा तक कर से छूट दी गई थी।
मधु दंडवते ( 5 दिसंबर 1989 - 10 नवंबर 1990)
मधु दंडवते ने घरेलू व्यापार को विनियमित करने वाले स्वर्ण नियंत्रण अधिनियम को समाप्त किया गया। जिस समय दंडवते ने वित्त विभाग का कार्यभार संभाला। इसके बाद शेयर बाजार नियामक सेबी की स्थापना की गई।
यशवंत सिन्हा
कार्यकाल- 1990 से जून 1991 तक , दूसरी बार मार्च 1998 से जुलाई 2002 तक
यशवंत सिन्हा ने भारत के वित्त मंत्री के रूप में दो अलग-अलग कार्यकालों में सेवा दी। इन्होंने कुल 7 बार केंद्रीय बजट पेश किया, जिसमें कर सुधार और बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित किया गया। उन्होंने आईटी क्षेत्र के लिए कर छूट को समाप्त कर दिया।
डॉ. मनमोहन सिंह
कार्यकाल- 21 जून 1991 से 16 मई 1996, इसके बाद 30 नवंबर 2008 से 24 जनवरी 2009 तीसरी बार 26- जून 2012 से 31 जुलाई 2012
डॉ. मनमोहन सिंह ने उदारीकरण,निजीकरण और वैश्वीकरण नीति से देश के बाजार को खोला। इससे विदेश मुद्रा भंडार बढ़ाने, राजकोषीय घाटे को कम करने में देश को मदद मिलती है।
जसवंत सिंह
कार्यकाल- 16-5-1996- 1-6-1996, 1-7-2002 - 22-5-2004
जसवंत सिंह के नाम सबसे कम समय तक वित्त मंत्री रहने का रिकॉर्ड है। यह 1996 में अटल जी की 16 दिन की सरकार के वित्त मंत्री रहे। लेकिन बाद में फिर अटल सरकार में वित्त मंत्री बनाए गए।
पी चिदंबरम
कार्यकाल- 1996-1998, 2004-2008, और 2012-2014)
पी चिदंबरम ने बढ़ते राजकोषीय घाटे से निपटने के लिए कर सुधार शुरु किए। इनके कार्यकाल के दौरान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना शुरु की गई। मनरेगा की शुरुआत भी की है।
इंद्र कुमार गुजराल
इंद्र कुमार गुजराल का वित्त मंत्री के रूप में कार्यकाल बहुत संक्षिप्त रहा, जो 21 अप्रैल 1997 से 1 मई 1998 तक था। उन्होंने एच.डी. देवेगौड़ा सरकार के गिरने के बाद, प्रधानमंत्री बनने के साथ ही वित्त मंत्री (अतिरिक्त प्रभार) के रूप में कार्यभार संभाला था।
अरुण जेटली ( 26 मई 2014- 30 मई 2019)
नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में वित्त मंत्री रहे। जीएसटी और नोटबंदी उनके कार्यकाल के दो बड़े फैसले लिए थे। 2017 में उन्होंने फरवरी के आखिरी कार्य दिवस पर बजट पेश करने की परंपरा को बदल दिया और इसे 1 फरवरी को पेश किया।
पीयूष गोयल ( 23 जनवरी 2019- 15 फरवरी 2019)
पीयूष गोयल ने 2018 और 2019 में वित्त मंत्री का कार्यभार संभाला। इन्होंने 1 फरवरी 2019 को अरुण जेटली की अनुपस्थिति में अंतरिम बजट पेश किया। करदाताओं को 12,500 रुपये की राहत दी थी।
निर्मला सीतारमण (31 मई 2019 - अब तक)
इस बार निर्माला सीतारमण ने नौवां बजट पेश किया है। इंदिरा गांधी के बाद दूसरी महिला वित्त मंत्री हैं। 5 जुलाई 2019 को इन्होंने अपना पहला बजट भाषण पेश किया। अब तक लगातार आठ पेश किए हैं- सात वार्षिक बजट और एक अंतरिम बजट है।
Continue reading on the app
#budget2026 #cmyogi #timesnownavbharat
UP CM Yogi On Budget: यूपी को बजट में मिला ये खास तोहफा, तारीफ में क्या बोले CM योगी ?UP Latest News
केंद्र सरकार के बजट- 2026 में यूपी को कई सौगातें मिली हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वाराणसी में पानी के जहाजों की मरम्मत के लिए पोर्ट बनाने का ऐलान किया। इसके अलावा, प्रदेश को 1,500 किमी के 2 हाईस्पीड रेल कॉरिडोर मिले हैं
You can Search us on YouTube by- NBT, NBT TV Live, Navbharat Times, Times Now, TNN, TNNB, Navbharat TV, Hindi News, Latest news and @timesnownavbharat
About Channel:
Times Now Navbharat देश का No.1 Hindi news है। यह चैनल भारत और दुनिया से जुड़ी हर Latest News और Breaking News , राजनीति, मनोरंजन और खेल से जुड़े समाचार आपके लिए लेकर आता है। इसलिए सब्सक्राइब करें और बने रहें टाइम्स नाउ नवभारत के साथ
Times Now Navbharat is India's fastest growing Hindi News Channel with 24 hour coverage. Get Breaking news, Latest news, Politics news, Entertainment news and Sports news from India & World on Times Now Navbharat.
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Watch Live TV : https://www.timesnowhindi.com/live-tv
Subscribe to our other network channels:
Times Now: https://www.youtube.com/TimesNow
Zoom: https://www.youtube.com/zoomtv
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------
You can also visit our website at: https://www.timesnowhindi.com
Like us on Facebook: https://www.facebook.com/Timesnownavbharat
Follow us on Twitter: https://twitter.com/TNNavbharat
Follow us on Instagram: https://www.instagram.com/timesnownavbharat
Join us for the latest updates on Times Now Navbharat Live TV. Stay informed and engaged with our in-depth reporting, exclusive interviews, and real-time updates. Don't miss out on the most crucial news stories from India and around the world. Subscribe to our channel and hit the notification bell to stay updated with all the breaking news, Hindi News, live hindi news, election news live, rajasthan news, mp news, up news, bihar news, pm modi news, hindi news live, live news in hindi, hindi latest news, livetv, live tv , times live, hindi news, Israel war live , News, Sports News, Entertainment News and live updates
Continue reading on the app