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एफएंडओ में तेजी से बढ़ रही सट्टेबाजी को कम करने के लिए एसटीटी में की बढ़ोतरी: केंद्र

नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने रविवार को कहा कि फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) में तेजी से बढ़ रही सट्टेबाजी और प्रणालीगत जोखिम को कम करने के लिए सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) में बढ़ोतरी का प्रस्ताव लाया गया है।

मीडिया से बातचीत करते हुए राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि एफएंडओ पर एसटीटी बढ़ाने का उद्देश्य अत्यधिक सट्टेबाजी के साथ-साथ एसटीटी से जुड़े प्रणालीगत जोखिमों को कम करना है।

बजट 2026 में फ्यूचर्स पर एसटीटी को मौजूदा 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। ऑप्शंस पर अब एसटीटी बढ़कर 0.15 प्रतिशत होगा।

इसके अलावा, सरकार ने बायबैक में शेयर सरेंडर करने पर सभी प्रकार के शेयरधारकों को होने वाले फायदे को कैपिटन गेन में लाने का प्रस्ताव रखा है। इससे अब बायबैक से होने वाली आय पर अधिक टैक्स लगेगा।

बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने शेयर बायबैक पर लगने वाले टैक्स पर कहा कि नए संरचना के अंतर्गत कॉरपोरेट प्रमोटर्स पर प्रभावी रूप से 22 प्रतिशत का टैक्स लगेगा और नॉन-कॉरपोरेट प्रमोटर्स पर बायबैक लेनदेन के लिए 30 प्रतिशत का टैक्स लगेगा।

एसटीटी में बढ़ोतरी के ऐलान के बाद शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखी गई है। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,546.84 अंक या 1.88 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 80,722.94 और निफ्टी 495.20 अंक या 1.96 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,825.45 पर बंद हुआ।

इस ऐलान के कारण निफ्टी कैपिटल मार्केट इंडेक्स 5.77 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ। वहीं, ऑनलाइन ब्रोकिंग फर्म एंजेल वन और ग्रो के शेयरों में 10 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली।

एंजेल वन लिमिटेड के ग्रुप चीफ स्ट्रेटेजी ऑफिसर अमित मजूमदार ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में, एफएंडओ ब्रोकरेज ने हमारे कुल राजस्व में लगभग 44 प्रतिशत का योगदान दिया, जबकि क्लाइंट फंडिंग और हमारे व्यापक प्लेटफॉर्म से प्राप्त ब्याज आय लगभग 33 प्रतिशत रही, शेष आय कैश और कमोडिटी ब्रोकिंग, डिपॉजिटरी, डिस्ट्रीब्यूशन और अन्य आय स्रोतों से आई।

एसटीटी भारत में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर किए गए प्रतिभूति लेनदेन के मूल्य पर लगाया जाने वाला कर है। यह इक्विटी, इक्विटी म्यूचुअल फंड और फ्यूचर्स और ऑप्शंस जैसे डेरिवेटिव्स में किए गए ट्रेड्स पर लागू होता है। यह कर लेनदेन के समय ही वसूला जाता है, चाहे निवेशक को लाभ हो या हानि।

विशेषज्ञों ने इंट्रा-डे स्टॉक मार्केट क्रैश का कारण एसटीटी शुल्क में वृद्धि को बताया।

चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग के आकाश शाह ने कहा, यह मामूली बदलाव नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण वृद्धि है और इससे एफएंडओ वॉल्यूम विशेष रूप से हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स, प्रोप्राइटरी डेस्क और लागत-संवेदनशील रणनीतियों पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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सब्जी खेती के लिए ट्रेलिस मंडप पर गुजरात सरकार दे रही है ₹1.20 लाख तक की सहायता

गुजरात में सब्जी उत्पादक किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के तहत Agriculture and Co-operation Department, Government of Gujarat ने “Assistance in Trellise Mandap for Cultivation of Vegetable Crops” योजना लागू की है. इस योजना का उद्देश्य सब्जी फसलों की वैज्ञानिक और संरचित खेती को प्रोत्साहित करना है, जिससे किसानों की आय और उत्पादकता दोनों में वृद्धि हो सके.

योजना का उद्देश्य और महत्व

ट्रेलिस प्रणाली पर उगाई जाने वाली सब्जियां जैसे लौकी, करेला, तोरई और खीरा बेहतर वायु संचार, कम रोग और अधिक उत्पादन देती हैं. मंडप पद्धति से फसल की आयु बढ़ती है और गुणवत्ता भी सुधरती है. यह योजना टिकाऊ खेती की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है.

वित्तीय सहायता का डिटेल्स

योजना के अंतर्गत विभिन्न वर्गों के किसानों को अलग-अलग दरों पर सहायता प्रदान की जाती है. सामान्य किसानों को यूनिट लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम ₹80,000 प्रति हेक्टेयर सहायता मिलती है. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति किसानों के लिए यह सहायता 75 प्रतिशत या ₹1,20,000 प्रति हेक्टेयर तक है. देविपूजक वर्ग के किसानों को 90 प्रतिशत लागत या ₹46,800 प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाती है.

इनपुट सपोर्ट और तकनीकी मानक

प्रति हेक्टेयर 1,600 लकड़ी या बांस के सपोर्ट और 400 किलोग्राम जीआई वायर या प्लास्टिक वायर का प्रावधान है. अनुशंसित पौध दूरी लगभग 2.5 x 2.5 मीटर रखी गई है, जिससे पौधों को पर्याप्त स्थान और पोषण मिल सके.

क्षेत्र सीमा और वैधता

इस योजना के अंतर्गत एक खाता धारक अधिकतम 2.00 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए सहायता प्राप्त कर सकता है. योजना की वैधता अवधि 3 वर्ष निर्धारित की गई है, जिससे किसान दीर्घकालिक लाभ उठा सकें.

पात्रता शर्तें क्या है? 

आवेदक का किसान होना अनिवार्य है. वह गुजरात का निवासी होना चाहिए और सक्रिय रूप से सब्जी खेती में संलग्न होना चाहिए. साथ ही, किसान को ट्रेलिस मंडप निर्माण के लिए तैयार होना आवश्यक है.

आवेदन प्रक्रिया क्या है? 

आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है. किसान I-Khedut Portal पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं. पंजीकरण के बाद लॉगिन कर कृषि योजनाओं में इस योजना का चयन कर नया आवेदन किया जा सकता है. आवेदन की पुष्टि के बाद उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रखना आवश्यक है.

आवश्यक दस्तावेज क्या है? 

आवेदन के समय 7/12 प्रमाणपत्र, आधार कार्ड और बैंक पासबुक या रद्द चेक प्रस्तुत करना अनिवार्य है. यह योजना गुजरात के सब्जी किसानों के लिए आधुनिक खेती तकनीकों को अपनाने और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हो रही है.

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