बांग्लादेश में जनवरी में मॉब किलिंग और हिरासत में हुई मौत के मामले में दोगुनी बढ़ोतरी
ढाका, 1 फरवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश में हिंसा के बढ़ते मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है। हाल ही में भारत की इंटेलिजेंस एजेंसी ने चेतावनी जारी की है कि चुनाव के दिनों तक हिंसा बढ़ने की संभावना है। बांग्लादेश में जनवरी में भीड़ की हिंसा में तेजी से बढ़ोतरी हुई। सार्वजनिक स्थानों पर सरेआम पिटाई से होने वाली मौतों की संख्या पिछले महीने के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा हो गई।
इसके साथ ही जेल में होने वाली मौतों में भी काफी बढ़ोतरी हुई। देश में राष्ट्रीय चुनाव होने वाला है, लेकिन जिस तरह के हालात बने हुए हैं, इससे कानून-व्यवस्था और पूरे मानवाधिकार की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
मानवाधिकार सांस्कृतिक फाउंडेशन (एमएसएफ) की जारी हर महीने की मॉनिटरिंग रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी में भीड़ के हमले में कम से कम 21 लोग मारे गए, जबकि दिसंबर 2025 में ऐसी 10 मौतें रिपोर्ट की गई थीं। शनिवार को जारी रिपोर्ट में जनवरी में मानवाधिकार की स्थिति को खतरनाक रूप से हिंसक और जटिल बताया गया।
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि भीड़ की हिंसा के खिलाफ सरकार की तरफ से सुनिश्चित और साफ कार्रवाई न होने से सजा से बचने का ट्रेंड बढ़ा है। एमएसएफ ने कहा कि द डेली स्टार ने बताया कि इससे अपराधियों को बढ़ावा मिला है और न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कम हुआ है।
रिपोर्ट में इन घटनाओं को कानून के राज से लोगों के भरोसे में कमी का साफ संकेत बताया गया है। भीड़ द्वारा की गई हत्या के अलावा, रिपोर्ट में देश भर में मिले अज्ञात शवों की संख्या में बढ़ोतरी भी बताई गई है। जनवरी में कुल 57 शव मिले, जबकि दिसंबर में यह संख्या 48 थी।
वहीं, कस्टडी में हुई मौतें भी एक बड़ी चिंता का विषय बनकर सामने आईं। जनवरी में जेल कस्टडी में मरने वाले कैदियों की संख्या बढ़कर 15 हो गई, जबकि पिछले महीने यह संख्या नौ थी। इसके अलावा, खबर है कि दो लोगों की मौत कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कस्टडी में हुई।
एमएसएफ ने इन मौतों के लिए मेडिकल लापरवाही, अमानवीय हालात और जेल मैनेजमेंट में सिस्टम की कमियों जैसे कारणों को जिम्मेदार ठहराया। 13वें राष्ट्रीय चुनाव के पास आने के साथ रिपोर्ट में चुनाव से जुड़ी हिंसा में बढ़ोतरी देखी गई।
जनवरी के दौरान, राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ी झड़पों में चार लोगों की जान चली गई और 509 दूसरे घायल हो गए। यह दिसंबर के मुकाबले काफी बढ़ोतरी थी, जब चुनाव से जुड़ी सिर्फ एक मौत दर्ज की गई थी।
रिपोर्ट में एक और चिंताजनक ट्रेंड बताया गया कि पुलिस केस में आरोपी बनाए गए अज्ञात लोगों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। राजनीतिक केस में लिस्टेड अज्ञात लोगों की संख्या दिसंबर में 110 से बढ़कर जनवरी में 320 हो गई। मानवाधिकार समर्थकों का तर्क है कि इस प्रैक्टिस से बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां होती हैं और लोगों में डर बढ़ता है।
एमएसएफ ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा में गंभीर गिरावट को भी बताया। अकेले जनवरी में, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा के 257 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 34 दुष्कर्म और 11 सामूहिक दुष्कर्म की घटनाएं शामिल हैं। अल्पसंख्यक समुदायों पर भी हमलों में काफी बढ़ोतरी देखी गई। जनवरी में चोरी, तोड़-फोड़ या मंदिरों और मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं बढ़कर 21 हो गईं, जबकि पिछले महीने यह सिर्फ छह थीं।
एमएसएफ ने उल्लंघन की तुरंत बिना किसी भेदभाव जांच की मांग की और अधिकारियों से न्याय व्यवस्था में भरोसा वापस लाने के लिए सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
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Union Budget 2026: दुर्घटना मुआवजे के ब्याज पर टैक्स छूट, विदेश में पढ़ने वाले बच्चों के लिए भी राहत
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार यानी आज संसद में बजट पेश करते हुए टैक्स से जुड़े कई अहम प्रस्तावों की घोषणा की. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य इनकम टैक्स सिस्टम को सिंपल, पारदर्शी और नागरिकों के लिए अधिक आसान बनाया जाए ताकि ईज ऑफ लिविंग में सुधार हो सके.
दुर्घटना मुआवजे पर बड़ी राहत
वित्त मंत्री ने घोषणा की कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल द्वारा किसी व्यक्ति को दिए गए मुआवजे पर मिलने वाला ब्याज अब इनकटैक्स से पूरी तरह मुक्त होगा. इसके साथ ही इस खाते पर किसी भी तरह का TDS भी नहीं काटा जाएगा. उन्होंने कहा कि इस कदम से सड़क दुर्घटना पीड़ितों और उनके परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा और उन्हें मिलने वाला मुआवजा कर कटौती के कारण कम नहीं होगा.
विदेशी यात्रा पर TCS में कटौती
इस बार बजट में विदेशी खर्च को लेकर टैक्स कलेक्शन एट सोर्स यानी TCS में बड़ी राहत दी गई है. विदेश यात्रा टूर पैकेज की बिक्री पर TCS की दर को घटाकर 2 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है. अभी यह दर 5 प्रतिशत और कुछ मामलों में 20 प्रतिशत तक थी. वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि 2 प्रतिशत की यह दर किसी भी न्यूनतम राशि की शर्त के बिना लागू होगी, जिससे विदेशी यात्रा से जुड़े लेनदेन सरल होंगे.
शिक्षा और चिकित्सा के लिए रेमिटेंस सस्ता
शिक्षा और चिकित्सा के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसे पर भी सरकार ने राहत दी है. Liberalised Remittance Scheme के तहत शिक्षा और चिकित्सा उद्देश्यों के लिए TCS की दर को 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत किया जाएगा. इससे विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और इलाज कराने वाले परिवारों पर वित्तीय बोझ कम होने की उम्मीद है.
TDS नियमों में स्पष्टता
टैक्स कटौती को लेकर मौजूद अस्पष्टता को दूर करने के लिए सरकार ने मैनपावर सप्लाई सेवाओं को स्पष्ट रूप से भुगतान ठेकेदारों के दायरे में लाने का प्रस्ताव दिया है. इसके तहत ऐसी सेवाओं पर 1 प्रतिशत या 2 प्रतिशत की दर से TDS लागू होगा. इस कदम से व्यवसायों और सेवा प्रदाताओं के बीच TDS दरों को लेकर होने वाले विवाद कम होंगे.
छोटे टैक्सपेयर्स को अभियोजन से छूट
वित्त मंत्री ने छोटे टैक्सपेयर्स के लिए एक नई योजना की भी घोषणा की. इसके तहत जिन व्यक्तियों ने 20 लाख रुपये से कम मूल्य की गैर-अचल विदेशी संपत्तियों का खुलासा नहीं किया है, उन्हें अभियोजन से छूट दी जाएगी. यह प्रावधान 1 अक्टूबर 2024 से प्रभावी माना जाएगा, जिससे छोटे मूल्य की विदेशी संपत्ति रखने वाले टैक्सपेयर्स बिना कानूनी डर के अनुपालन कर सकेंगे.
न्यू टैक्स लॉ कब से होगा लागू?
सिथारमण ने यह भी बताया कि आयकर अधिनियम 2025, 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा. इसके साथ ही सरल आयकर नियम और नए डिजाइन के रिटर्न फॉर्म जल्द अधिसूचित किए जाएंगे ताकि करदाताओं को नई व्यवस्था को समझने और अपनाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके.
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